अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि: CM योगी, भजनलाल, धामी समेत कई मुख्यमंत्रियों ने किया नमन
सारांश
मुख्य बातें
लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 13 अगस्त को पुण्यतिथि के अवसर पर देशभर के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर राजस्थान, दिल्ली और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों तक, सभी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस महान शासक को याद किया। यह अवसर न केवल एक ऐतिहासिक विभूति को स्मरण करने का था, बल्कि नारी नेतृत्व और सुशासन की उनकी विरासत को रेखांकित करने का भी था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की श्रद्धांजलि
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि अहिल्याबाई होल्कर 'नारी शक्ति, न्यायप्रियता, नीति-निपुणता और लोक-कल्याण की जीवंत प्रतिमूर्ति' थीं। उन्होंने आगे कहा, "उन्होंने अपने राज्य में ही नहीं, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र में समृद्धि, सामाजिक समरसता और धार्मिक पुनर्जागरण के नए आयाम स्थापित कर 'सांस्कृतिक राष्ट्रवाद' का अद्वितीय परचम लहराया।" योगी ने यह भी कहा कि लोकमाता ने न्याय को नीति, सेवा को साधना और सुशासन को संस्कार बनाया।
राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों का नमन
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर लिखा कि अहिल्याबाई होल्कर 'सुशासन, लोककल्याण और नारी नेतृत्व की अनुपम प्रेरणा' हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, परंपराओं और धरोहरों के संरक्षण में उनका योगदान सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उन्हें 'परम शिवभक्त, महान वीरांगना और जन-जन की लोकमाता' बताते हुए कहा कि देशभर के तीर्थों और मंदिरों के पुनरुद्धार से उन्होंने सांस्कृतिक विरासत को नई शक्ति दी।
उत्तराखंड के CM धामी और UP उपमुख्यमंत्री का संदेश
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर लिखा कि अहिल्याबाई होल्कर 'धर्मरक्षा, महिला सशक्तीकरण एवं लोककल्याण की महान प्रतीक' थीं और मंदिरों-मठों के संरक्षण में उनका योगदान अतुलनीय है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने न्याय और जनकल्याण को शासन का मूल आधार बनाकर प्रजावत्सल नेतृत्व का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।
अहिल्याबाई होल्कर की विरासत
अहिल्याबाई होल्कर 18वीं सदी की मराठा साम्राज्य की मालवा रियासत की शासक थीं, जिन्होंने इंदौर से अपना प्रशासन चलाया। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर सहित देशभर के अनेक तीर्थस्थलों के जीर्णोद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका शासनकाल न्याय, लोककल्याण और धार्मिक सहिष्णुता के लिए विख्यात रहा है।
राजनीतिक महत्व और आगे की दिशा
गौरतलब है कि अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि पर इतने बड़े पैमाने पर राजनीतिक नेताओं का श्रद्धांजलि अर्पित करना नारी नेतृत्व और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को लेकर राजनीतिक विमर्श में उनकी बढ़ती प्रासंगिकता को दर्शाता है। यह ऐसे समय में आया है जब महिला सशक्तीकरण और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण राष्ट्रीय नीति-चर्चा के केंद्र में हैं। उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर राष्ट्रीय स्तर पर आयोजन एवं स्मरण की परंपरा आगे भी जारी रहने की संभावना है।