13 अगस्त 2026
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अहिल्याबाई होल्कर पुण्यतिथि: ओम बिरला, राजनाथ सिंह, अमित शाह ने किया नमन

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अहिल्याबाई होल्कर पुण्यतिथि: ओम बिरला, राजनाथ सिंह, अमित शाह ने किया नमन

सारांश

लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि पर 13 अगस्त को देश के शीर्ष नेताओं ने एक स्वर में नमन किया। ओम बिरला, राजनाथ सिंह, अमित शाह, जेपी नड्डा और शिवराज सिंह चौहान ने उनके सुशासन, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और नारी सशक्तिकरण के आदर्शों को आज भी प्रासंगिक बताया।

मुख्य बातें

13 अगस्त को लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि पर वरिष्ठ केंद्रीय नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद पुस्तकालय भवन में स्थापित साढ़े छह फीट ऊँची कांस्य प्रतिमा का उल्लेख किया, जिसका अनावरण 24 अगस्त 2006 को हुआ था।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने काशी विश्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार सहित वंचित वर्गों के लिए उनके कार्यों को रेखांकित किया।
गृह मंत्री अमित शाह ने नारी शिक्षा और विधवा विवाह को प्रोत्साहन देने वाले उनके प्रयासों को याद किया।
जेपी नड्डा और शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें सनातन संस्कृति की संरक्षक और नारी सशक्तिकरण की प्रतीक बताया।

लोकमाता महारानी अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि पर 13 अगस्त को देशभर में श्रद्धांजलि अर्पित की गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके योगदान को याद किया। सभी नेताओं ने एकमत से लोकमाता को सुशासन, नारी सशक्तिकरण और भारतीय सांस्कृतिक विरासत की संरक्षक के रूप में स्मरण किया।

ओम बिरला की श्रद्धांजलि

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक्स पर लिखा कि पुण्यश्लोका अहिल्याबाई होल्कर ने अपने शासनकाल में किसानों, कारीगरों, व्यापारियों और आम नागरिकों के हितों को सर्वोपरि रखा तथा मालवा में व्यापार, कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाई दी। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अहिल्याबाई ने देश के प्रमुख तीर्थस्थलों पर मंदिरों, घाटों, कुओं, बावड़ियों और धर्मशालाओं के निर्माण एवं जीर्णोद्धार में ऐतिहासिक भूमिका निभाई, जिसकी छाप आज भी भारत की सांस्कृतिक विरासत में स्पष्ट दिखती है।

बिरला ने संसद पुस्तकालय भवन के प्रांगण में स्थापित साढ़े छह फीट ऊँची अहिल्याबाई की कांस्य प्रतिमा का भी उल्लेख किया। यह प्रतिमा प्रसिद्ध मूर्तिकार शशिकांत वारके ने बैठी हुई मुद्रा में शिल्पित की है और तत्कालीन उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत ने 24 अगस्त 2006 को इसका अनावरण किया था। उनके अनुसार यह प्रतिमा केवल एक महान नायिका की स्मृति नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और जनसेवा के आदर्शों का प्रतीक है।

राजनाथ सिंह और अमित शाह का नमन

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अहिल्याबाई के जनकल्याणकारी शासन, अदम्य साहस और कुशल प्रशासन को अद्भुत मिसाल बताया। उन्होंने विशेष रूप से काशी विश्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार में उनके योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज के वंचित और जनजातीय वर्गों की आजीविका के लिए उठाए गए उनके कदम और महिला सशक्तिकरण के प्रयास अपने समय से बहुत आगे थे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि लोकमाता ने मंदिरों के जीर्णोद्धार से लेकर तीर्थों के विकास तक विरासत संरक्षण में अतुलनीय योगदान दिया। उन्होंने नारी शिक्षा और विधवा विवाह को प्रोत्साहन देकर महिलाओं को सशक्त बनाने के उनके प्रयासों को भी रेखांकित किया।

नड्डा और चौहान का संबोधन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अहिल्याबाई को 'महान वीरांगना व परम शिवभक्त' बताते हुए कहा कि सुशासन, लोकसेवा और नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके आदर्श अनुपम हैं। उनके अनुसार, सनातन संस्कृति के संरक्षण और जनकल्याण के लिए समर्पित उनका जीवन सेवा, त्याग और सादगी का प्रेरणास्रोत है।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अहिल्याबाई को 'सनातन चेतना की शाश्वत प्रतीक' और 'नारी शक्ति की प्रतिमूर्ति' कहते हुए कहा कि उनकी ओर से रखी गई आदर्श शासन व्यवस्था की नींव आज 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' की निर्माण यात्रा को नई दिशा प्रदान कर रही है।

अहिल्याबाई होल्कर: विरासत और महत्व

गौरतलब है कि अहिल्याबाई होल्कर मराठा साम्राज्य के मालवा क्षेत्र की शासक थीं, जिनका शासनकाल सुशासन और जनसेवा के लिए इतिहास में दर्ज है। उन्होंने काशी, द्वारका, सोमनाथ सहित देशभर के प्रमुख तीर्थस्थलों पर निर्माण और जीर्णोद्धार कार्य करवाए। उनकी पुण्यतिथि प्रतिवर्ष राष्ट्रीय स्तर पर स्मरण की जाती है और विभिन्न राज्य सरकारें उन्हें लोककल्याण की प्रतीक के रूप में सम्मानित करती हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और नारी सशक्तिकरण राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में हैं। अहिल्याबाई के आदर्श आने वाली पीढ़ियों को जनसेवा और राष्ट्रहित के मार्ग पर प्रेरित करते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

सोमनाथ और सांस्कृतिक विरासत के पुनरुद्धार के संदर्भ में उनका उल्लेख वर्तमान सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं से स्वाभाविक रूप से मेल खाता है। हालाँकि मुख्यधारा की कवरेज इसे केवल श्रद्धांजलि समाचार के रूप में देखती है, असली सवाल यह है कि क्या उनके शासन मॉडल — जो जवाबदेही, जनसुनवाई और समावेशी विकास पर आधारित था — की प्रेरणा नीतिगत स्तर पर भी ली जा रही है, या यह स्मरण केवल प्रतीकात्मक रहता है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर कौन थीं?
अहिल्याबाई होल्कर मराठा साम्राज्य के मालवा क्षेत्र की शासक थीं, जो सुशासन, जनकल्याण और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए इतिहास में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने काशी विश्वनाथ, सोमनाथ और द्वारका सहित देशभर के प्रमुख तीर्थस्थलों पर मंदिरों, घाटों और धर्मशालाओं का निर्माण व जीर्णोद्धार करवाया।
13 अगस्त को किन नेताओं ने अहिल्याबाई होल्कर को श्रद्धांजलि दी?
13 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने एक्स पर पोस्ट कर उनके आदर्शों को याद किया।
संसद परिसर में अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा कब और किसने स्थापित की?
संसद पुस्तकालय भवन के प्रांगण में स्थापित साढ़े छह फीट ऊँची कांस्य प्रतिमा का अनावरण तत्कालीन उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत ने 24 अगस्त 2006 को किया था। इसे प्रसिद्ध मूर्तिकार शशिकांत वारके ने बैठी हुई मुद्रा में शिल्पित किया है।
अहिल्याबाई होल्कर का नारी सशक्तिकरण में क्या योगदान था?
अहिल्याबाई होल्कर ने नारी शिक्षा और विधवा विवाह को प्रोत्साहन देकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए, जो उनके समय से बहुत आगे माने जाते हैं। उन्होंने समाज के वंचित और जनजातीय वर्गों की आजीविका के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए।
अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि क्यों मनाई जाती है?
अहिल्याबाई होल्कर की पुण्यतिथि उनके सुशासन, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और जनसेवा के आदर्शों को राष्ट्रीय स्तर पर स्मरण करने के लिए मनाई जाती है। विभिन्न राज्य सरकारें और केंद्र सरकार उन्हें लोककल्याण की प्रतीक के रूप में सम्मानित करती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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