क्या गणतंत्र दिवस की परेड में मध्य प्रदेश की झांकी अहिल्याबाई को समर्पित थी?

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क्या गणतंत्र दिवस की परेड में मध्य प्रदेश की झांकी अहिल्याबाई को समर्पित थी?

सारांश

गणतंत्र दिवस पर मध्य प्रदेश की झांकी ने देवी अहिल्याबाई की 300वीं जयंती का सम्मान किया। यह झांकी उनके सुशासन, नारी सशक्तीकरण और सांस्कृतिक धरोहर की अनूठी प्रदर्शनी थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देखा। जानिए इस ऐतिहासिक झांकी के महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।

Key Takeaways

  • गणतंत्र दिवस परेड में मध्य प्रदेश की झांकी का समर्पण
  • लोकमाता देवी अहिल्याबाई की 300वीं जयंती
  • नारी सशक्तीकरण और सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान
  • महेश्वर घाट और नर्मदा नदी का भव्य दृश्य
  • सुशासन और प्रशासनिक दृष्टि का महत्व

भोपाल, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। गणतंत्र दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित परेड में मध्य प्रदेश की झांकी ‘पुण्यश्लोका लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर’ को विशेष रूप से समर्पित किया गया।

इस परेड में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के उपलक्ष्य में झांकी ने उनके गौरवमयी व्यक्तित्व, सुशासन, आत्मनिर्भरता, नारी सशक्तीकरण और सांस्कृतिक संरक्षण की विरासत को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया।

भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने परेड की सलामी ली। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने परेड का अवलोकन किया।

झांकी के अग्रभाग में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की प्रसिद्ध प्रतिमा को दर्शाया गया, जिसमें वे हाथ में शिवलिंग धारण किए पद्मासन में विराजमान हैं। यह दृश्य भारतीय मातृशक्ति की सौम्यता, गरिमा और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है।

मध्य भाग में अहिल्याबाई अपने मंत्रिगण एवं सैनिकों के साथ प्रदर्शित हैं, जो उनके सुदृढ़ प्रशासन और न्यायप्रिय शासन व्यवस्था को दर्शाते हैं। इसके निचले हिस्से में उनके शासनकाल में होलकर साम्राज्य द्वारा कराए गए मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं निर्माण कार्यों का प्रभावशाली चित्रण किया गया, जहां एक सैनिक द्वारा पहरा देना सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा का संदेश देता है।

झांकी के पिछले भाग में अहिल्याबाई की राजधानी महेश्वर के प्रसिद्ध घाट, मंदिर और किले का भव्य दृश्य प्रस्तुत किया गया। पवित्र नर्मदा नदी, घाटों और नौकाओं का मनोहारी अंकन झांकी को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान करता है।

महेश्वर घाट स्थित मंदिरों के शिखर पृष्ठभूमि में दिखाई देते हैं। साथ ही भित्तिचित्रों में लोकमाता अहिल्याबाई के मार्गदर्शन में महिलाएं महेश्वरी साड़ी की बुनाई करती हुई नजर आती हैं, जो उनके शासनकाल में नारी सशक्तीकरण, स्वदेशी उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा का सशक्त प्रमाण है।

Point of View

बल्कि पूरे देश को यह संदेश दिया कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और नारी सशक्तीकरण की दिशा में किए गए प्रयास कभी नहीं भुलाए जाएंगे। यह एक ऐतिहासिक पल है, जिसका महत्व आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा रहेगा।
NationPress
06/02/2026

Frequently Asked Questions

गणतंत्र दिवस परेड में मध्य प्रदेश की झांकी का क्या महत्व है?
यह झांकी देवी अहिल्याबाई की 300वीं जयंती को समर्पित है और उनके सुशासन और नारी सशक्तीकरण को दर्शाती है।
कौन-कौन से प्रमुख लोग परेड में उपस्थित थे?
परेड में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई केंद्रीय मंत्री शामिल थे।
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