राहुल गांधी का तेज लहरों वाला पोस्ट, सीईसी ज्ञानेश कुमार के महाभियोग की मांग के बीच सियासी हलचल
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 27 सितंबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक संदेश पोस्ट किया जिसने राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी। उन्होंने लिखा, 'मुझे समुद्र में तब तैरना पसंद है, जब लहरें तेज हों। इससे यह सीखने को मिलता है कि उथल-पुथल भी शांति का ही एक रूप है।' यह पोस्ट ऐसे समय में आई जब विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने की माँग को लेकर आक्रामक है।
महाभियोग की माँग का पृष्ठभूमि
कांग्रेस समेत 'इंडी' गठबंधन के कई दलों ने सीईसी के इस्तीफे की माँग को लेकर नई दिल्ली सहित पूरे देश में धरना-प्रदर्शन किया था। इस विवाद की जड़ में केरल कांग्रेस का वह पोस्ट है जिसमें केरल के पूर्व मुख्य सचिव जीजी थॉमसन के हवाले से आरोप लगाया गया कि ज्ञानेश कुमार ने — उस समय एक सेवारत आईएएस अधिकारी के रूप में — उनसे संपर्क किया और उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर चुनाव लड़ने को कहा, यहाँ तक कि मंत्री पद की पेशकश भी की। केरल कांग्रेस ने सवाल उठाया कि ऐसा प्रस्ताव देने का अधिकार उन्हें किसने दिया।
राहुल गांधी का सीधा हमला
इन आरोपों के संदर्भ में राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, 'पहले ज्ञानेश कुमार, जो उस समय एक सेवारत आईएएस अधिकारी थे, का इस्तेमाल BJP के लिए भर्ती करने में किया गया। फिर मोदी और शाह ने उन्हें अंपायर बनाया और उन्हें भारत के चुनावों में मैच फिक्सिंग का जिम्मा सौंप दिया।' गौरतलब है कि ये आरोप कथित तौर पर हैं और BJP ने इन्हें सिरे से खारिज किया है।
चुनाव आयोग की सफाई और SIR विवाद
विपक्ष का यह भी आरोप है कि चुनाव आयोग स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की आड़ में मतदाता सूचियों से नाम काट रहा है। इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने एक प्रेस नोट जारी कर अपना पक्ष स्पष्ट किया। आयोग ने बताया कि 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए SIR का आदेश जारी किया गया था, जो बिहार से शुरू होकर पश्चिम बंगाल और 30 अन्य राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों तक विस्तारित हुआ। आयोग ने जोर दिया कि यह आदेश 'आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी' से जारी किया गया था।
आयोग के अनुसार 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए SIR कार्यक्रम 27 अगस्त 2025 को जारी हुआ, जबकि 19 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए यह कार्यक्रम 14 मई 2026 को सर्वसम्मति से स्वीकृत हुआ। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि तीसरे चरण के शेष 12 राज्यों में अंतिम प्रकाशन के बाद ही कुल मतदाताओं की संख्या ज्ञात होगी।
BJP का पलटवार
इस प्रेस नोट के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पर हमला बोला। BJP का तर्क है कि जब आयोग के सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं, तो किसी एक आयुक्त के मतभेद की बात निराधार है। पार्टी ने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को अस्थिर करने का आरोप लगाया।
आगे क्या
महाभियोग की माँग और SIR विवाद के बीच यह राजनीतिक टकराव चुनाव आयोग की स्वायत्तता और विश्वसनीयता को लेकर एक बड़ी बहस का रूप लेता दिख रहा है। विपक्षी दलों की रणनीति और आयोग की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में इस संघर्ष की दिशा तय करेगी।