जयराम रमेश का बड़ा हमला: सीईसी ज्ञानेश कुमार को कोई नहीं बचा सकता, ECI का IT सिस्टम बदलना ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने 18 अक्टूबर 2026 को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पर कड़ा हमला करते हुए आरोप लगाया कि आयोग ने 8 वर्षों तक राजनीतिक दलों को खोज-योग्य मतदाता सूची न देकर 'वोट चोरी' को बढ़ावा दिया। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को फौरन निलंबित करने की माँग की।
मुख्य आरोप: 8 साल तक सर्चेबल सूची से इनकार
रमेश ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पिछले दो वर्षों से लगातार यह माँग करते आ रहे हैं कि ECI सभी राजनीतिक दलों को खोज-योग्य प्रारूप में मतदाता सूची उपलब्ध कराए। उनके अनुसार, ECI ने यह सुविधा 2018 में बंद कर दी थी, उसी वर्ष जब कांग्रेस को मध्य प्रदेश में लाखों फर्जी मतदाताओं का पता चला था। रमेश ने आरोप लगाया कि 'वोट चोरी' को संभव बनाने के लिए आठ वर्षों तक इस माँग को ठुकराया जाता रहा।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने ECI की मतदाता सूची प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए हों। पिछले कई चुनावों में विपक्षी दलों ने मतदाता सूची की पारदर्शिता पर चिंता जताई है।
15 अक्टूबर के आदेश पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया
रमेश ने बताया कि 15 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने एक आदेश जारी किया, जिसमें 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दो वर्षों के अंतराल के बाद फिर से शुरू हुए 'विशेष सारांश पुनरीक्षण' (SSR) के लिए राजनीतिक दलों को सर्चेबल प्रारूप में मतदाता सूची देने का निर्देश दिया गया। उन्होंने इसे जनता के दबाव की जीत बताया और कहा कि 'पूरा देश वोट चोरों के खिलाफ सड़कों पर उतर आया है।'
सीईसी ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला
रमेश ने बेबाकी से आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कथित तौर पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के निर्देशों पर काम करते हुए आयोग में जनता के भरोसे को नष्ट किया है। उनके अनुसार, 'सीईसी को कोई नहीं बचा सकता — उन्हें पद से हटना ही होगा।' हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महज़ इस्तीफा पर्याप्त नहीं होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब ECI की कार्यप्रणाली पर विपक्षी दलों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि आयोग की स्वायत्तता पर प्रश्नचिह्न लगना लोकतंत्र की मज़बूती के लिए गंभीर चुनौती है।
SIR पर 13 करोड़ मतदाताओं के अधिकार का सवाल
रमेश ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर सबसे गंभीर आरोप लगाया। उनका दावा है कि SIR के कारण 13 करोड़ से अधिक भारतीयों के संवैधानिक मताधिकार को खतरे में डाल दिया गया है, इसलिए इसे तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए। उन्होंने माँग की कि ECI और उसके पूरे IT सिस्टम का व्यापक ओवरहॉल किया जाए।
कांग्रेस की यह माँग आगामी चुनावों की तैयारियों के बीच आई है, जब मतदाता सूची की शुद्धता पर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है। आने वाले दिनों में ECI की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा की जा रही है।