30 अक्टूबर 2026
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एसआईआर पर मदन राठौड़ का पलटवार: कांग्रेस शासन में 10 बार हो चुकी है यह प्रक्रिया

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एसआईआर पर मदन राठौड़ का पलटवार: कांग्रेस शासन में 10 बार हो चुकी है यह प्रक्रिया

सारांश

राजस्थान BJP अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस के एसआईआर-विरोध को पलटते हुए याद दिलाया कि यही प्रक्रिया कांग्रेस शासन में 10 बार अपनाई जा चुकी है। 13 करोड़ नाम हटाने के आरोपों पर उन्होंने अपने आंकड़े पेश किए और आपातकाल की विरासत पर कांग्रेस को घेरा।

मुख्य बातें

मदन राठौड़ ने 30 अक्टूबर 2026 को जयपुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का बचाव किया।
राठौड़ के अनुसार, कांग्रेस शासन में यह प्रक्रिया 10 बार लागू हो चुकी है।
कांग्रेस के 13 करोड़ नाम हटाने के दावे पर राठौड़ ने कहा — 2.8 करोड़ मृत, 6.3 करोड़ स्थानांतरित, 1 करोड़ दोहरे पंजीकृत और 3 करोड़ का पता नहीं।
राठौड़ ने पूर्व CM अशोक गहलोत के इंदिरा गांधी को लोकतंत्र से जोड़ने वाले बयान पर आपातकाल की याद दिलाई।
BJP का 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान कांग्रेस के दोहरे रवैये को उजागर करने के लिए चलाया जा रहा है।

राजस्थान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने 30 अक्टूबर 2026 को जयपुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का जोरदार बचाव किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया न तो भारत में नई है और न ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई अभूतपूर्व व्यवस्था है।

कांग्रेस पर राठौड़ का सीधा हमला

एसआईआर में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष के तीखे विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए राठौड़ ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के शासनकाल में यह प्रक्रिया 10 बार लागू की जा चुकी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो पार्टी खुद इस प्रक्रिया का उपयोग कर चुकी है, वह अब इसे लोकतंत्र के लिए खतरा क्यों बता रही है। राठौड़ के अनुसार, कांग्रेस गलत जानकारी फैलाकर जनता में भ्रम पैदा करने का प्रयास कर रही है।

BJP नेता ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए विदेशी टूलकिट का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति न जनहित में है और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुकूल।

आपातकाल और इंदिरा गांधी पर निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लोकतंत्र के प्रतीक के रूप में पेश किए जाने पर राठौड़ ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को खुश करने के लिए भ्रामक बयान दिए जा रहे हैं। BJP नेता ने कांग्रेस से अपनी 'भारत बचाओ' रैली से पहले इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल को याद करने की नसीहत दी।

उन्होंने याद दिलाया कि उस दौर में समाचार पत्रों पर सेंसरशिप लगाई गई थी, नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे और अनेक राजनीतिक नेताओं को जेल की सलाखों के पीछे भेजा गया था।

13 करोड़ नाम हटाने के आरोप पर राठौड़ के आंकड़े

कांग्रेस के इस आरोप पर कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, राठौड़ ने अपने दावों के साथ विस्तृत आंकड़े प्रस्तुत किए। उनके अनुसार इनमें से 2.8 करोड़ मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी थी, 6.3 करोड़ अपना निवास स्थान बदल चुके थे, लगभग 1 करोड़ एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत थे और 3 करोड़ का पता नहीं लग पाया।

राठौड़ ने स्पष्ट किया कि जिन मतदाताओं का पता नहीं चल सका है, उन्हें केवल सत्यापन के लिए चिन्हित किया गया है — उन्हें स्वतः मतदाता सूची से नहीं हटाया गया है। उन्होंने पूछा कि क्या कांग्रेस यह चाहती है कि मृत या स्थानांतरित हो चुके लोगों के नाम सूची में बने रहें और उनका दुरुपयोग हो।

'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान

BJP प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी का 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान कांग्रेस के लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर अपनाए जा रहे दोहरे रवैये के बारे में जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। गौरतलब है कि यह बयानबाज़ी ऐसे समय में आई है जब राजस्थान सहित कई राज्यों में एसआईआर को लेकर राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है।

राठौड़ ने अंत में जोर देकर कहा कि सटीक और अद्यतन मतदाता सूची बनाए रखना किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक विवाद और गहराने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मूल सवाल का जवाब नहीं देता — इस बार की प्रक्रिया में पारदर्शिता और शिकायत-निवारण तंत्र कितना मजबूत है। 13 करोड़ नामों पर प्रस्तुत आंकड़े BJP की ओर से हैं, और स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है। यह विवाद असल में दो बड़े सवाल खड़ा करता है — मतदाता सूची की सफाई कहाँ जरूरी है और कहाँ राजनीतिक रूप से संवेदनशील है — जिसका जवाब केवल चुनाव आयोग की पारदर्शी रिपोर्टिंग से मिल सकता है।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूचियों को अद्यतन और सटीक बनाने के लिए व्यापक जाँच कराता है। इसमें मृत, स्थानांतरित या दोहरे पंजीकृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए या सत्यापित किए जाते हैं।
कांग्रेस एसआईआर का विरोध क्यों कर रही है?
कांग्रेस का आरोप है कि एसआईआर के दौरान लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। पार्टी ने इस प्रक्रिया में अनियमितताओं का दावा करते हुए निष्पक्ष जाँच की माँग की है।
मदन राठौड़ ने 13 करोड़ नाम हटाने के आरोप पर क्या कहा?
राठौड़ ने दावा किया कि इनमें से 2.8 करोड़ मतदाता मृत हो चुके थे, 6.3 करोड़ ने निवास बदल लिया था, करीब 1 करोड़ एक से अधिक स्थानों पर दर्ज थे और 3 करोड़ का पता नहीं चल पाया। उन्होंने कहा कि जिनका पता नहीं चला उन्हें केवल सत्यापन के लिए चिन्हित किया गया है, सूची से स्वतः नहीं हटाया गया।
क्या कांग्रेस ने भी एसआईआर का इस्तेमाल किया है?
BJP नेता मदन राठौड़ के अनुसार, कांग्रेस शासनकाल में यह प्रक्रिया 10 बार लागू की जा चुकी है। हालाँकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी है और कांग्रेस ने इस तर्क को खारिज किया है।
BJP का 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान क्या है?
यह BJP का राजनीतिक अभियान है जिसका उद्देश्य कांग्रेस के लोकतांत्रिक मूल्यों पर दोहरे रवैये को जनता के सामने रखना है। राठौड़ ने इसे एसआईआर विवाद और आपातकाल की विरासत के सन्दर्भ में चलाए जाने की बात कही।
राष्ट्र प्रेस
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