सुवेंदु अधिकारी का अभिषेक बनर्जी पर पलटवार: 'सोडियम-पोटेशियम असंतुलन' का ताना, न्यूयॉर्क इलाज की सलाह
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी पर तीखा पलटवार किया — व्यंग्यपूर्वक उन्हें 'सोडियम-पोटेशियम के असंतुलन' के लिए न्यूयॉर्क में इलाज कराने की सलाह देते हुए। यह प्रतिक्रिया बनर्जी के उस भाषण के एक दिन बाद आई, जिसमें उन्होंने राज्य के पुलिस अधिकारियों को खुले तौर पर चेतावनी दी थी कि सरकार बदलने पर उन्हें कोई नहीं बचाएगा।
बनर्जी की चेतावनी: क्या था गुरुवार का विवादित भाषण
गुरुवार शाम अभिषेक बनर्जी ने भाजपा नेतृत्व वाली राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी सुवेंदु अधिकारी के इशारे पर TMC कार्यकर्ताओं को झूठे मामलों में फँसा रहे हैं।
बनर्जी ने सार्वजनिक मंच से कहा, 'मैं हर उस अधिकारी को चेतावनी दे रहा हूँ जो यह सोचता है कि वह सुवेंदु अधिकारी के इशारे पर काम करेगा। सरकार बदलने पर कोई उन्हें नहीं बचा पाएगा। कानून से ऊपर कोई नहीं है। दो साल में क्या होता है, हम देखेंगे।' यह बयान राजनीतिक हलकों में तत्काल विवाद का विषय बन गया।
सुवेंदु अधिकारी का पलटवार: व्यंग्य और जाँच का हवाला
कोलकाता के एक होटल के निकट पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बनर्जी का नाम लिए बिना कहा, 'उनके सोडियम-पोटेशियम स्तर में कुछ गड़बड़ है। उन्हें इलाज के लिए न्यूयॉर्क जाना चाहिए। हम उन्हें अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी कर देंगे।' अधिकारी ने बनर्जी के इस गुस्से को जाँच एजेंसियों तक महत्वपूर्ण जानकारियाँ पहुँचने के कारण उत्पन्न घबराहट से जोड़ा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बनर्जी के पूर्व निजी सहायक सुमित रॉय — जिनसे हाल ही में पुलिस ने पूछताछ की — ने जाँच अधिकारियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी है। अधिकारी ने कहा, 'उनके लिए पैसे इकट्ठा करने वाला व्यक्ति, उनका पीए लगता है। उसने सब कुछ बता दिया है। फिर भी, हमें सारी जानकारी मिल रही है।'
राजनीतिक संदर्भ: बंगाल में सत्ता-संघर्ष की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में भाजपा और TMC के बीच राजनीतिक तनाव अपने चरम पर है। गौरतलब है कि अभिषेक बनर्जी TMC की अगली पीढ़ी के सबसे प्रमुख चेहरे माने जाते हैं और उनके बयानों को विपक्षी दल गंभीरता से लेता है।
बनर्जी का 'दो साल में सरकार बदलने' का इशारा अगले विधानसभा चुनाव की ओर था, जो राज्य में राजनीतिक सरगर्मी को और तेज करता है। आलोचकों का कहना है कि पुलिस अधिकारियों को सार्वजनिक मंच से इस तरह की चेतावनी देना संस्थागत स्वायत्तता के लिए चिंताजनक है।
आगे क्या होगा
कथित तौर पर सुमित रॉय से पूछताछ के बाद जाँच का दायरा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। दोनों पक्षों के बीच यह वाकयुद्ध अगले कुछ दिनों में और तीखा हो सकता है, विशेषकर जब जाँच एजेंसियाँ अपने निष्कर्ष सामने रखेंगी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह विवाद बंगाल की चुनावी राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है।