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2027 यूपी चुनाव: अबू आजमी का दावा — ईमानदार चुनाव हुआ तो सपा बनाएगी सरकार

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2027 यूपी चुनाव: अबू आजमी का दावा — ईमानदार चुनाव हुआ तो सपा बनाएगी सरकार

सारांश

सपा महाराष्ट्र अध्यक्ष अबू आजमी ने दावा किया कि निष्पक्ष चुनाव और बैलेट पेपर से 2027 में यूपी में सपा की सरकार बनेगी। अमित शाह के 'अंगद के पैर' वाले बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने भाजपा की जीत को 'वोट चोरी' पर आधारित बताया और यूसीसी, अल्पसंख्यक अधिकारों व आज़म खान की यूनिवर्सिटी पर भी सवाल उठाए।

मुख्य बातें

अबू आजमी ने दावा किया कि 2027 यूपी विधानसभा चुनाव बिना ईवीएम के हुआ तो सपा की सरकार बनेगी।
गृह मंत्री अमित शाह के 'अंगद के पैर' वाले बयान पर आजमी ने कहा — भाजपा का आत्मविश्वास 'वोट चोरी' पर टिका है।
यूसीसी पर आजमी ने सवाल उठाया: यदि सबके लिए समान कानून है तो आदिवासी समुदाय को बाहर क्यों रखा गया।
आज़म खान की यूनिवर्सिटी संपत्ति कुर्की को आजमी ने अनुचित बताया, कहा — सुधार कर संस्था दोबारा खोली जाए।
1 नवंबर की रैली पर कहा — 140 करोड़ जनता के मुद्दों के आगे एक दिन की असुविधा छोटी है।

समाजवादी पार्टी (सपा) महाराष्ट्र के अध्यक्ष और विधायक अबू आजमी ने 30 अक्टूबर 2026 को मुंबई में मीडिया से बातचीत में दावा किया कि यदि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव निष्पक्ष और बिना ईवीएम के कराए गए, तो राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी। उन्होंने यह भी कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी (BJP) सत्ता से बाहर हो जाएगी।

अमित शाह के बयान पर पलटवार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि उत्तर प्रदेश में भाजपा अंगद के पैर की तरह है — जिसे कोई हिला नहीं सकता। इस बयान पर आजमी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि भाजपा का यह आत्मविश्वास 'वोट चोरी' और 'ईवीएम में सेटिंग' पर टिका है, न कि जनता के समर्थन पर। आजमी ने आरोप लगाया कि जनता सरकार के कामकाज से असंतुष्ट है और यदि बैलेट पेपर से मतदान हो तो परिणाम अलग होंगे।

यूसीसी और संवैधानिक अधिकारों पर रुख

उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की चर्चा के बीच आजमी ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक और हर धर्म के अनुयायी को अपने धार्मिक आचरण का अधिकार देता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सभी के लिए समान कानून की बात की जा रही है, तो आदिवासी समुदाय को यूसीसी के दायरे से बाहर क्यों रखा गया है। उनका कहना था कि धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप हुआ तो विरोध-प्रदर्शन अपरिहार्य होंगे।

आज़म खान की यूनिवर्सिटी और अल्पसंख्यक मुद्दे

सपा के वरिष्ठ नेता आज़म खान की यूनिवर्सिटी की संपत्ति कुर्क किए जाने पर आजमी ने कहा कि किसी एक व्यक्ति के खिलाफ लगातार इस प्रकार की कार्रवाई उचित नहीं है। उनके अनुसार यह संस्था बच्चों की शिक्षा के लिए बनाई गई थी, और सरकार को चाहिए कि यदि कोई त्रुटि हो तो उसे सुधारकर विश्वविद्यालय दोबारा शुरू किया जाए। दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा रेस कोर्स मस्जिद में नमाज़ की अनुमति देने से इनकार पर भी आजमी ने सवाल उठाए और कहा कि भाजपा सरकार के आने के बाद से मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है।

रैली, नसीरुद्दीन शाह और इज़रायल पर टिप्पणी

1 नवंबर की प्रस्तावित रैली को लेकर व्यापारियों की चिंता पर आजमी ने कहा कि देश की 140 करोड़ जनता के सामने खड़े बड़े संकट के सामने एक दिन की असुविधा छोटी बात है। अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के हालिया बयान के संदर्भ में उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति सच बोलता है, उसे बदनाम करने की कोशिश की जाती है, जबकि संविधान नागरिकों को सरकार की आलोचना का अधिकार देता है। इज़रायल के चुनाव में अरब पार्टी की संभावित भूमिका पर आजमी ने कहा कि वे दुआ करते हैं कि इससे बेंजामिन नेतन्याहू का अहंकार समाप्त हो और फ़िलिस्तीनियों को सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिले।

आगे क्या

आजमी के ये बयान 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट के बीच आए हैं, जब विपक्षी दल अपनी रणनीति तेज़ कर रहे हैं। सपा और भाजपा के बीच ईवीएम, यूसीसी और अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर राजनीतिक तीखापन आने वाले महीनों में और बढ़ने के संकेत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी विश्वसनीयता तब तक सीमित रहती है जब तक कोई सत्यापन-योग्य साक्ष्य सामने न आए। यूसीसी पर आदिवासी छूट का सवाल ज़रूर नीतिगत दृष्टि से ठोस है और मुख्यधारा की बहस में अक्सर अनदेखा किया जाता है। असली परीक्षा यह है कि क्या सपा 2027 तक एक ठोस, जातीय गणित से परे वैकल्पिक शासन एजेंडा पेश कर पाती है — केवल भाजपा-विरोधी बयानबाज़ी पर्याप्त नहीं होगी।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अबू आजमी ने 2027 यूपी चुनाव को लेकर क्या दावा किया?
सपा विधायक अबू आजमी ने कहा कि यदि 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव निष्पक्ष तरीके से और बैलेट पेपर के ज़रिए कराया गया तो सपा की सरकार बनेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि 2029 में भाजपा लोकसभा में भी सत्ता से बाहर हो जाएगी।
अबू आजमी ने ईवीएम पर क्या आरोप लगाए?
आजमी ने आरोप लगाया कि भाजपा का चुनावी आत्मविश्वास 'वोट चोरी' और 'ईवीएम में सेटिंग' पर आधारित है। उन्होंने मांग की कि ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराया जाए, जिससे चुनाव का परिणाम बदल सकता है।
समान नागरिक संहिता (UCC) पर अबू आजमी का क्या रुख है?
आजमी ने यूसीसी का विरोध करते हुए कहा कि संविधान हर नागरिक को अपने धर्म के अनुसार चलने का अधिकार देता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यूसीसी सबके लिए समान है तो आदिवासी समुदाय को इसके दायरे से बाहर क्यों रखा गया।
आज़म खान की यूनिवर्सिटी की संपत्ति कुर्की पर आजमी ने क्या कहा?
आजमी ने कुर्की को अनुचित बताते हुए कहा कि यह बच्चों की शिक्षा के लिए बनाई गई संस्था है। उन्होंने सरकार से अपील की कि यदि कोई त्रुटि हो तो उसे सुधारकर विश्वविद्यालय दोबारा शुरू किया जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
1 नवंबर की सपा रैली पर आजमी ने क्या कहा?
आजमी ने कहा कि एक दिन की रैली से व्यापारियों को असुविधा हो सकती है, लेकिन देश की 140 करोड़ जनता के सामने खड़े संकट की तुलना में यह छोटी बात है। उन्होंने लोगों से सड़क पर उतरकर सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज़ उठाने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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