UP चुनाव 2027: सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा का दावा — भाजपा 27 सीटें भी नहीं जीत पाएगी
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने 14 जुलाई को लखनऊ में कई अहम मुद्दों पर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि यदि सपा और कांग्रेस मिलकर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में उतरें, तो भाजपा 27 सीटें भी नहीं जीत पाएगी।
भाजपा पर 2027 का बड़ा दावा
वर्मा ने कहा कि इंडिया ब्लॉक में कोई मतभेद नहीं है और ऐसी खबरें केवल भ्रम फैलाने के लिए चलाई जा रही हैं। उनके अनुसार, राहुल गांधी और अखिलेश यादव मिलकर एक मज़बूत विपक्षी मोर्चे के रूप में चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा खुद जानती है कि वह चुनाव से पहले ही हार चुकी है, इसलिए सपा और कांग्रेस के बीच फूट डालने की कोशिश की जा रही है।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद और सरकार पर सवाल
सपा प्रवक्ता ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित चंदा चोरी मामले को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के खिलाफ अब तक FIR दर्ज न होना संदेह पैदा करता है। वर्मा के अनुसार, भाजपा इस मामले से ध्यान हटाने के लिए वक्फ बोर्ड का मुद्दा उठा रही है — जो उन्होंने 'डायवर्जन पॉलिटिक्स' करार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट में CEO पद के लिए आवेदन माँगे जाने से पहले चंदा चोरी मामले की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।
उन्होंने मीडिया से अपील की कि वह इस पर सवाल उठाए कि सर्वोच्च न्यायालय ने SIT के गठन और उसकी कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल क्यों उठाए। वर्मा ने कहा कि इतने बड़े मामले में केवल 'छोटे लोगों' को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है और सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान लेने के बाद सच्चाई सामने आएगी।
CSAM मामले में सरकार की सक्रियता पर सवाल
सोशल मीडिया पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) के विरुद्ध केंद्र सरकार द्वारा जारी निर्देशों पर वर्मा ने कहा कि यह सरकार की अपनी पहल नहीं, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय की फटकार का परिणाम है। उनके अनुसार, जब न्यायालय ने पूछा कि नाबालिगों से जुड़ी अश्लील सामग्री रोकने के लिए कोई नियामक व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई, तब जाकर सरकार सक्रिय हुई।
इमरान मसूद विवाद और इंडिया ब्लॉक की एकता
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने कहा था कि सपा किसी भी ऐसे मुस्लिम नेता को बर्दाश्त नहीं कर सकती जो दमदारी से बात रखे — वर्मा ने कहा कि मसूद इंडिया ब्लॉक या कांग्रेस के संगठनात्मक फैसले लेने वाले नेता नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मसूद अक्सर सुर्खियों में बने रहने के लिए बयान देते हैं और इस तरह की बातों का कोई खास मतलब नहीं रह जाता जब राहुल गांधी और अखिलेश यादव मिलकर चुनाव की तैयारी में हों।
'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर व्यावहारिक सवाल
'वन नेशन, वन इलेक्शन' के विचार पर वर्मा ने कहा कि यह कोई नई अवधारणा नहीं है — 1952 के बाद कई वर्षों तक देश में एक साथ चुनाव होते रहे हैं। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि भारत की संघीय व्यवस्था में विधानसभाएँ समय से पहले भंग हो सकती हैं या मध्यावधि चुनाव की नौबत आ सकती है। उनके अनुसार, असली मुद्दा इसकी व्यावहारिक रूपरेखा और क्रियान्वयन प्रक्रिया पर गंभीर चर्चा होना है — जो अब तक नहीं हुई। आने वाले महीनों में इंडिया ब्लॉक की सीट-बँटवारे की बातचीत इन दावों की असली परीक्षा होगी।