'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर JPC की लखनऊ बैठक: सतीश महाना बोले — 5 साल में 10 बार चुनाव से प्रशासन ठप
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने 14 जुलाई 2026 को लखनऊ में 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' विधेयक की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के समक्ष अपने सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा व्यवस्था में 5 वर्षों में 10 बार चुनाव प्रक्रिया होती है, जिससे प्रशासनिक तंत्र लगातार चुनावी मोड में रहता है और जनसेवा प्रभावित होती है।
समिति के समक्ष महाना के मुख्य तर्क
महाना ने समिति को आँकड़ों के साथ बताया कि सामान्य क्षेत्रों में जहाँ 5 साल में 10 बार चुनाव होते हैं, वहीं कैंटोनमेंट बोर्ड में यही चुनाव केवल एक बार होता है। उनका सीधा सवाल था — 'अगर चुनाव में प्रशासनिक व्यवस्था लगी रहेगी तो जनता के हित में कब काम करेगी?'
यह ऐसे समय में आया है जब JPC देशभर में राज्य विधानसभाओं और संसद के एक साथ चुनाव कराने की व्यावहारिकता पर विभिन्न राज्यों के विचार जुटा रही है। गौरतलब है कि इस विधेयक को लेकर राजनीतिक दलों के बीच गहरे मतभेद हैं।
एक साथ चुनाव से क्या बदलेगा
महाना ने समिति के सामने यह मत रखा कि जब सभी चुनाव एक साथ होंगे, तो जनप्रतिनिधि एक ही बार मतदाताओं के पास जाएंगे और अपने-अपने क्षेत्र के कार्यों का वादा करेंगे। उनके अनुसार, इससे वादे पूरे होने की संभावना बढ़ेगी, क्योंकि नेताओं के पास चुनाव के बीच काम करने का पर्याप्त समय होगा।
मध्यावधि चुनाव के सवाल पर विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यदि किसी जनप्रतिनिधि की मृत्यु हो जाए या वह अयोग्य घोषित हो, तो उस स्थिति में उपचुनाव का प्रावधान रहेगा।
मंत्री धर्मवीर प्रजापति के बयान
उत्तर प्रदेश के मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने झारखंड स्थित देवघर में बाबा बैद्यनाथ धाम में पूजा-अर्चना के बाद मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के चंदे की चोरी के मामले में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
प्रजापति ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) फिर सत्ता में आएगी। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, 'हम लोग चुनाव का इंतजार नहीं करते, बल्कि निरंतर जनता के बीच रहते हैं।' उनके अनुसार विपक्ष केवल चुनाव के समय सक्रिय होता है और प्रतिकूल परिणाम आने पर आरोप लगाता है।
आगे क्या होगा
JPC की यह बैठक 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' विधेयक पर देशव्यापी परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा है। समिति विभिन्न राज्यों के विधानसभा अध्यक्षों और संवैधानिक विशेषज्ञों के सुझाव लेने के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी। यह विधेयक संसद में पहले ही पेश किया जा चुका है और इसके क्रियान्वयन की समयसीमा तथा संवैधानिक संशोधनों की आवश्यकता पर विचार जारी है।