'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर गुजरात CM भूपेंद्र पटेल ने JPC को बताया — बार-बार चुनाव से शासन और उत्पादन दोनों प्रभावित

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'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर गुजरात CM भूपेंद्र पटेल ने JPC को बताया — बार-बार चुनाव से शासन और उत्पादन दोनों प्रभावित

सारांश

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने GIFT सिटी में JPC के सामने दो-टूक कहा — बार-बार चुनाव न केवल सरकारी मशीनरी को जकड़ते हैं, बल्कि गुजरात जैसे औद्योगिक राज्यों में प्रवासी श्रमिकों के पलायन से उत्पादन भी ठप होता है। यह बयान 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' को आर्थिक तर्क की ज़मीन पर खड़ा करने की कोशिश है।

मुख्य बातें

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 20 मई 2026 को GIFT सिटी, गांधीनगर में JPC के समक्ष 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर गुजरात का पक्ष रखा।
पटेल ने कहा कि बार-बार चुनाव से राज्य तंत्र का बड़ा हिस्सा चुनावी कार्यों में व्यस्त रहता है, जिससे शासन प्रभावित होता है।
गुजरात में कार्यरत लाखों प्रवासी श्रमिकों के मतदान के लिए घर लौटने से औद्योगिक उत्पादन बाधित होता है।
पटेल ने इस प्रस्ताव को PM मोदी के 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' दृष्टिकोण और GST जैसे 'एक राष्ट्र' सुधारों की कड़ी बताया।
उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता के बाद 15 वर्षों तक भारत में एकसाथ चुनाव होते थे, जो राजनीतिक अस्थिरता के कारण बाधित हुए।

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 20 मई 2026 को गांधीनगर के GIFT सिटी में आयोजित परामर्श बैठक में 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' प्रस्ताव की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के समक्ष गुजरात का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने से राज्य तंत्र का बड़ा हिस्सा चुनावी कार्यों में उलझा रहता है, जिससे शासन व्यवस्था और आर्थिक गतिविधियाँ दोनों प्रभावित होती हैं। पटेल ने इस सुधार को राष्ट्रीय हित में अनिवार्य बताया।

मुख्य तर्क: प्रशासनिक बोझ और उत्पादन पर असर

मुख्यमंत्री पटेल ने JPC को बताया कि बार-बार चुनाव कराने के लिए रसद, बुनियादी ढाँचे और जनशक्ति की व्यापक तैनाती करनी पड़ती है। इससे सरकारी मशीनरी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा लंबे समय तक चुनाव-संबंधी कार्यों में व्यस्त रहता है, जो सामान्य प्रशासन को बाधित करता है।

उन्होंने गुजरात का विशेष उदाहरण देते हुए कहा कि यह एक विकसित औद्योगिक राज्य है जहाँ अन्य प्रदेशों से लाखों प्रवासी श्रमिक कार्यरत हैं। बार-बार चुनाव होने पर इनमें से बड़ी संख्या में श्रमिकों को मतदान के लिए अपने पैतृक स्थानों पर लौटना पड़ता है, जिससे राज्य में उत्पादन सीधे प्रभावित होता है।

लोकतांत्रिक भागीदारी और प्रशासनिक दक्षता

पटेल ने तर्क दिया कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने से प्रशासनिक दक्षता में सुधार होगा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता की भागीदारी मज़बूत होगी। उन्होंने कहा कि एकसाथ चुनाव से वित्तीय और प्रशासनिक बोझ कम होगा तथा मतदाताओं का उत्साह भी बढ़ेगा।

उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि स्वतंत्रता के बाद लगभग 15 वर्षों तक भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होते थे। राजनीतिक अस्थिरता और विधानसभाओं के समय से पहले भंग होने के कारण यह व्यवस्था बाधित हुई।

'एक भारत' के व्यापक दृष्टिकोण से जुड़ाव

मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप बताया। उन्होंने केंद्र सरकार की उन पहलों का उल्लेख किया जो प्रशासनिक एकरूपता लाने के लिए शुरू की गई हैं — जैसे 'एक राष्ट्र, एक कर' (GST), 'एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड', 'एक राष्ट्र, एक ग्रिड' और 'एक राष्ट्र, एक सदस्यता'

पटेल ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की विकास-यात्रा में सुशासन, नीतिगत स्पष्टता और जन-भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, और 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' इस दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।

JPC की परामर्श प्रक्रिया और आगे की राह

GIFT सिटी में हुई यह बैठक JPC की उस व्यापक परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा है जिसमें विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और हितधारकों से सुझाव लिए जा रहे हैं। गुजरात सरकार का यह पक्ष-प्रस्तुतीकरण समिति के अंतिम सिफारिशी दस्तावेज़ में शामिल किए जाने की संभावना है। JPC की रिपोर्ट संसद के आगामी सत्र में प्रस्तुत किए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक चुनाव' की बहस मुख्यतः खर्च और प्रशासन तक सीमित रही थी। लेकिन यह तर्क एक बड़े सवाल को अनुत्तरित छोड़ता है: प्रवासी श्रमिकों की मतदान-पहुँच सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी किसकी है — चुनाव-कैलेंडर बदलने की, या 'एक राष्ट्र, एक मतदाता सूची' जैसे तंत्र की? विपक्ष यह भी पूछ सकता है कि एकसाथ चुनाव में समय से पहले सरकार गिरने की स्थिति में संवैधानिक प्रावधान क्या होंगे — यह सवाल JPC की परामर्श प्रक्रिया में अभी तक सार्वजनिक रूप से हल नहीं हुआ है।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर गुजरात CM ने JPC को क्या बताया?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने JPC को बताया कि बार-बार चुनाव होने से राज्य तंत्र का बड़ा हिस्सा चुनावी कार्यों में व्यस्त रहता है और गुजरात जैसे औद्योगिक राज्यों में प्रवासी श्रमिकों के घर लौटने से उत्पादन प्रभावित होता है। उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनाव एकसाथ कराने को राष्ट्रीय हित में बताया।
JPC की 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' परामर्श बैठक कहाँ हुई?
यह परामर्श बैठक 20 मई 2026 को गांधीनगर के GIFT सिटी में आयोजित की गई, जहाँ संयुक्त संसदीय समिति ने गुजरात सरकार का पक्ष सुना।
भारत में पहले एकसाथ चुनाव कब होते थे?
मुख्यमंत्री पटेल के अनुसार, स्वतंत्रता के बाद लगभग 15 वर्षों तक भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एकसाथ होते थे। राजनीतिक अस्थिरता और विधानसभाओं के समय से पहले भंग होने के कारण यह व्यवस्था बाद में बाधित हो गई।
'एक राष्ट्र, एक चुनाव' को किन अन्य सुधारों से जोड़कर देखा जा रहा है?
पटेल ने इसे 'एक राष्ट्र, एक कर' (GST), 'एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड', 'एक राष्ट्र, एक ग्रिड' और 'एक राष्ट्र, एक सदस्यता' जैसे सुधारों की श्रृंखला का हिस्सा बताया, जो प्रशासनिक एकरूपता लाने के लिए लागू किए गए हैं।
JPC की रिपोर्ट कब आने की उम्मीद है?
JPC विभिन्न राज्यों और हितधारकों से परामर्श की प्रक्रिया में है। रिपोर्ट संसद के आगामी सत्र में प्रस्तुत किए जाने की उम्मीद है, हालाँकि कोई आधिकारिक तिथि अभी घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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