जेपीसी का गुजरात दौरा: 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर राजनीतिक दलों और अधिकारियों से विस्तृत विचार-विमर्श
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने 20 मई 2026 को गांधीनगर में अपने तीन दिवसीय गुजरात दौरे के दूसरे दिन 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' प्रस्ताव पर गहन चर्चा जारी रखी। समिति ने प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, मौजूदा विधायकों और राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया। यह दौरा संविधान (129वें संशोधन) विधेयक, 2024 की जांच प्रक्रिया का हिस्सा है।
समिति की संरचना और कार्यक्षेत्र
39 सदस्यीय इस जेपीसी में लोकसभा के 27 सांसद और राज्यसभा के 12 सांसद शामिल हैं। समिति की अध्यक्षता भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद पीपी चौधरी कर रहे हैं। समिति को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के संवैधानिक एवं प्रशासनिक पहलुओं की जांच का दायित्व सौंपा गया है। इसके अंतर्गत संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 की बारीकी से समीक्षा की जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
दौरे के पहले दिन समिति ने गांधीनगर के जीआईएफटी सिटी में राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें शासन संरचनाओं और चुनावी तैयारियों पर विस्तृत जानकारी साझा की गई। अध्यक्ष पीपी चौधरी ने इस प्रस्तुति को 'आदर्श' बताते हुए कहा कि यह पहली बार है जब समिति के समक्ष इतनी व्यापक और एकीकृत जानकारी प्रस्तुत की गई। उन्होंने मुख्य सचिव और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की तथा संकेत दिया कि गुजरात के इस मॉडल को अन्य राज्यों के साथ नमूने के रूप में साझा किया जाएगा।
दूसरे दिन समिति ने सभी प्रमुख दलों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया। आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी, विधायक गोपाल इटालिया और चैतर वसावा शामिल रहे। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने किया, जिसमें विधायक इमरान खेड़ावाला भी शामिल थे। BJP का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ पदाधिकारियों और विधायकों ने किया।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी और कई कैबिनेट मंत्री भी इन चर्चाओं में भागीदार रहे।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
BJP नेताओं ने प्रस्ताव के प्रति अपना समर्थन दोहराया, जबकि विपक्षी दलों ने संवैधानिक ढाँचे, संघीय सिद्धांतों और चुनावी निष्पक्षता से जुड़ी चिंताएँ उठाईं। चौधरी ने पत्रकारों को बताया कि इन चर्चाओं का उद्देश्य संसद के लिए अंतिम सिफारिशें तैयार करने से पहले राज्यों, राजनीतिक हितधारकों और विभिन्न संस्थाओं से व्यवस्थित सुझाव एकत्र करना है। उन्होंने यह भी कहा कि अर्थशास्त्रियों के अनुसार एक साथ चुनाव कराने से जीडीपी में 1.6 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है और देश ₹7 लाख करोड़ की बचत कर सकता है, जिसे बुनियादी ढाँचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याणकारी कार्यों में लगाया जा सकता है।
ऐतिहासिक संदर्भ
भारत में आखिरी बार एक साथ चुनाव 1967 में हुए थे। इसके बाद कई विधानसभाओं और लोकसभा के समय से पहले भंग होने के कारण यह क्रम टूट गया। यह प्रस्ताव पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट के बाद गहन जांच के दौर से गुजर रहा है। उस समिति ने चरणबद्ध दृष्टिकोण का सुझाव दिया है, जिसमें चुनावी चक्रों का तालमेल और मध्यावधि में विधानसभा भंग होने की स्थिति से निपटने के प्रावधान शामिल हैं।
आगे की राह
यदि संवैधानिक बदलाव पूरे हो जाते हैं, तो इस व्यवस्था को 2029 से लागू किया जा सकता है। जेपीसी से अपेक्षा है कि वह गुजरात दौरे के शेष दिनों में भी हितधारकों से विचार-विमर्श जारी रखेगी और इसके बाद अपनी संसदीय रिपोर्ट के लिए प्राप्त सुझावों को संकलित करने की प्रक्रिया शुरू करेगी।