सेंसेक्स 117 अंक उछला, 75,318 पर बंद; ऑयल-गैस सेक्टर में सबसे ज़्यादा तेजी
सारांश
मुख्य बातें
बीएसई सेंसेक्स बुधवार, 20 मई को 117.54 अंक यानी 0.16 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,318.39 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 41 अंक यानी 0.17 प्रतिशत चढ़कर 23,659 पर बंद हुआ। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों के बावजूद घरेलू बाजार ने उतार-चढ़ाव भरे सत्र में मामूली लेकिन सकारात्मक बढ़त दर्ज की।
मुख्य बाजार आँकड़े
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 74,806.49 पर खुला और इंट्रा-डे में 75,406.18 का उच्च स्तर तथा 74,529.41 का निम्न स्तर छुआ। एनएसई निफ्टी 23,457.25 पर खुलकर 23,690.90 के दिन के उच्चतम और 23,397.30 के निम्नतम स्तर तक गया।
व्यापक बाजारों में भी सकारात्मक रुझान रहा — निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.49 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.04 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज हुई। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले सत्र के ₹459 लाख करोड़ से बढ़कर ₹461 लाख करोड़ हो गया, जिससे निवेशकों को एक ही सत्र में करीब ₹2 लाख करोड़ की संपत्ति का लाभ हुआ।
सेक्टरवार प्रदर्शन
सेक्टरवार देखें तो ऑयल एंड गैस में सबसे ज़्यादा 1.59 प्रतिशत की बढ़त रही। इसके अलावा निफ्टी ऑटो, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी मेटल में भी तेजी दर्ज की गई।
दूसरी ओर, निफ्टी मीडिया में 1.45 प्रतिशत की गिरावट रही — जो आज के सत्र में सबसे बड़ी क्षेत्रीय गिरावट थी। निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा में भी दबाव देखा गया।
निफ्टी50 में शीर्ष लाभार्थी शेयरों में हिंडाल्को, बजाज ऑटो, ग्रासिम, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, विप्रो और इंडिगो रहे। वहीं बीईएल, टेक महिंद्रा, इटरनल, टाटा स्टील, एसबीआई लाइफ और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयरों में सबसे ज़्यादा गिरावट आई।
ऊर्जा क्षेत्र में तेजी की वजह
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हाल ही में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को बढ़ती लागत का बोझ उपभोक्ताओं तक स्थानांतरित करने में मदद मिली है, जिससे उनके मुनाफे की संभावनाएँ बेहतर हुई हैं। गौरतलब है कि ब्रेंट क्रूड इस सप्ताह की शुरुआत में पश्चिम एशिया तनाव के कारण 111-112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया था, लेकिन बुधवार के कारोबार में यह घटकर 105-106 डॉलर के आसपास आ गया। कच्चे तेल की कीमतों में इस नरमी और घरेलू ईंधन मूल्यों में बढ़ोतरी के संयोग से रिफाइनिंग मार्जिन बेहतर होने की उम्मीद बढ़ी, जिससे एनर्जी सेक्टर में संस्थागत निवेशकों की सक्रिय खरीदारी देखी गई।
रुपया और तकनीकी स्तर
एक बाजार विशेषज्ञ के अनुसार, भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले और कमज़ोर होकर 97 रुपए के करीब पहुँच गया। रुपए पर दबाव मुख्य रूप से वैश्विक तेल कीमतों में तेजी और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण बना हुआ है।
तकनीकी दृष्टिकोण से विशेषज्ञों का कहना है कि निफ्टी के लिए 23,700 और 23,800 का स्तर निकटतम रेजिस्टेंस बन गया है, जहाँ मुनाफावसूली का दबाव संभव है। इससे ऊपर 24,000 का स्तर सबसे बड़ा मनोवैज्ञानिक रेजिस्टेंस माना जा रहा है। नीचे की ओर 23,500-23,600 का दायरा महत्वपूर्ण सपोर्ट ज़ोन है; यदि यह टूटता है तो 23,300 अगला प्रमुख सपोर्ट होगा।
आगे की दिशा
विश्लेषकों का मानना है कि यदि निफ्टी 24,000 के ऊपर टिकने में सफल रहता है तो बाजार में फिर से मज़बूत तेजी लौट सकती है। लेकिन अगर 23,600 के ऊपर टिकाव नहीं बनता, तो बिकवाली और अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति और वैश्विक कच्चे तेल के भाव आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगे।