शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल, सेंसेक्स ने 2800 अंकों की वृद्धि की; जानें इसके प्रमुख कारण
सारांश
Key Takeaways
- सेंसेक्स में 2800 अंकों की वृद्धि हुई है।
- अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा का बड़ा प्रभाव है।
- कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत मिली है।
- बीएसई का कुल मार्केट कैप 444 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।
- RBI ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा।
मुंबई, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार के कारोबारी सत्र में अद्भुत तेजी का अनुभव किया। प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स ने 2,800 अंकों से अधिक की वृद्धि के साथ 77,456.11 के इंट्राडे उच्च स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 ने भी 800 अंकों से अधिक की बढ़त के साथ 23,961.25 तक पहुँच गया। यह तेजी पूरे बाजार पर प्रभाव डालती दिखाई दी, जहां मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी 4 प्रतिशत तक की मजबूती आई।
इस तेज रफ्तार का प्रभाव निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 429 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 444 लाख करोड़ रुपए हो गया, जिससे निवेशकों को कुछ ही समय में लगभग 15 लाख करोड़ रुपए का लाभ हुआ। बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडिया वीआईएक्स इंडेक्स 19 प्रतिशत से अधिक गिरकर 20 के नीचे चला गया, जो बाजार में डर कम होने का संकेत देता है।
इस तेजी के पीछे सबसे प्रमुख कारण अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा है। डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि अमेरिका अगले दो हफ्तों तक ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोक देगा, जिसे ईरान ने भी स्वीकार कर लिया है। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच शुक्रवार को बातचीत की संभावना ने निवेशकों में आशा जगाई है कि पश्चिम एशिया में तनाव जल्दी समाप्त हो सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट ने भी बाजार को मजबूती प्रदान की। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 14 प्रतिशत घटकर 95 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई, जिससे भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिली। तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई पर दबाव कम होने और आर्थिक विकास को समर्थन मिलने की संभावना बढ़ी है।
इसके अतिरिक्त, डॉलर इंडेक्स में 1 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है, जबकि भारतीय रुपया मजबूत हुआ है। एक मजबूत रुपया और कमजोर डॉलर विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार की ओर सकारात्मक रुख को प्रोत्साहित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) फिर से खरीदारी कर सकते हैं।
ग्लोबल संकेत भी सकारात्मक रहे हैं। अमेरिका-ईरान सीजफायर के बाद एशियाई बाजारों में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली, जहां जापान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में 6 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई। इसका प्रभाव भारतीय बाजार पर भी स्पष्ट रूप से देखा गया।
इसके साथ ही, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा है और 'न्यूट्रल' रुख अपनाया है, जो बाजार की उम्मीदों के अनुरूप है। यह निर्णय छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) द्वारा सर्वसम्मति से मंजूर किया गया और इसका उद्देश्य मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है।