विशाल ददलानी भावुक: 'किशोर दा, लता जी और पंचम दा जैसे कलाकार सदियों में एक बार जन्म लेते हैं'
सारांश
मुख्य बातें
'इंडियन आइडल' के आगामी एपिसोड में कंटेस्टेंट अंशिका ने फिल्म 'घर' के कालजयी गीत 'तेरे बिना जिया जाए ना' की प्रस्तुति दी, जिसने मंच पर मौजूद जज और संगीतकार-गायक विशाल ददलानी को गहरे भावुक कर दिया। यह गीत दिवंगत गायकों किशोर कुमार और लता मंगेशकर की आवाज़ में है, संगीत आर. डी. बर्मन (पंचम दा) का है और बोल गुलजार ने लिखे हैं।
अंशिका की प्रस्तुति और मंच का माहौल
जैसे ही अंशिका ने 'तेरे बिना जिया जाए ना' की पहली पंक्ति गाई, मंच पर एक अलग ही सन्नाटा छा गया। दर्शकों और जजों के चेहरों पर पुराने दौर के संगीत की यादें साफ़ झलक रही थीं। प्रस्तुति के दौरान विशाल ददलानी की आँखें नम हो गईं, जो इस गीत की भावनात्मक गहराई का प्रमाण था।
विशाल ददलानी ने किया दिग्गजों को नमन
परफॉर्मेंस समाप्त होने के बाद विशाल ददलानी ने कहा, 'पंचम दा सिर्फ एक संगीतकार नहीं थे, बल्कि संगीत की दुनिया की एक अलग ही ताकत थे। किशोर दा, लता जी, आशा जी और गुलजार साहब जैसी शख्सियतें सदियों में एक बार जन्म लेती हैं। ये जिस गहराई और दर्द के साथ गाने को बनाते थे, वह आज भी लोगों के दिलों को छू जाता है।'
विशाल ने आगे जोड़ा, 'मैं समझ ही नहीं पाता कि कोई इंसान इतनी गहराई से किसी के दिल की भावना को कैसे छू लेता है। इन कलाकारों के अंदर कोई अलग ही शक्ति थी, जिसकी वजह से उनका संगीत आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। हम हमेशा इन कलाकारों के सामने सिर झुकाते रहेंगे, क्योंकि हमारे लिए यही लोग असली संगीत हैं।'
उन्होंने यह भी कहा, 'मुझे इन महान कलाकारों से जिंदगी में बहुत कुछ सीखने को मिला है। जैसे कोई अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में जाकर एक अनंत दुनिया को महसूस करता होगा, ठीक वैसा ही एहसास मुझे संगीत के साथ होता है। मेरे लिए संगीत की दुनिया की कोई सीमा नहीं है।'
श्रेया घोषाल ने लता मंगेशकर की गायकी को किया याद
शो में विशेष रूप से उपस्थित मशहूर गायिका श्रेया घोषाल भी अंशिका की प्रस्तुति से प्रभावित हुईं। उन्होंने लता मंगेशकर की गायकी की विशेषता पर कहा, 'लता जी गाने की लय, शब्दों और भावनाओं के साथ बहुत खूबसूरती से खेलती थीं। उनका गाने का तरीका बिल्कुल अलग था और वही अंदाज लोगों के दिलों तक सीधा पहुंचता था। उनकी आवाज़ में जो मासूमियत और भावना होती थी, वही इस गीत की सबसे बड़ी ताकत है।'
गीत और कलाकारों की विरासत
फिल्म 'घर' (1978) का यह गीत आज भी हिंदी फिल्म संगीत के सुनहरे दौर की सबसे अमर रचनाओं में गिना जाता है। आर. डी. बर्मन की धुन, गुलजार के बोल और किशोर कुमार तथा लता मंगेशकर की आवाज़ का संयोग इसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रासंगिक बनाए रखता है। गौरतलब है कि 'इंडियन आइडल' जैसे मंचों पर इन गीतों की वापसी यह दर्शाती है कि नई पीढ़ी भी इस विरासत से गहरे जुड़ी है।
आगे क्या देखने को मिलेगा
शो का यह भावनात्मक एपिसोड जल्द ही दर्शकों के सामने आएगा। अंशिका की इस प्रस्तुति के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि वे आगे के दौर में किस तरह की चुनौतियाँ स्वीकार करती हैं और क्या वे इस भावनात्मक लहर को अपनी प्रतिस्पर्धा में बदल पाती हैं।