विशाल ददलानी भावुक: 'किशोर दा, लता जी और पंचम दा जैसे कलाकार सदियों में एक बार जन्म लेते हैं'

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विशाल ददलानी भावुक: 'किशोर दा, लता जी और पंचम दा जैसे कलाकार सदियों में एक बार जन्म लेते हैं'

सारांश

इंडियन आइडल के मंच पर अंशिका की 'तेरे बिना जिया जाए ना' प्रस्तुति ने विशाल ददलानी की आँखें नम कर दीं। उनका कहना था कि पंचम दा, किशोर दा और लता जी जैसे कलाकार सदियों में एक बार आते हैं — और उनका संगीत आज भी दिलों में ज़िंदा है।

मुख्य बातें

इंडियन आइडल के आगामी एपिसोड में कंटेस्टेंट अंशिका ने फिल्म 'घर' का गीत 'तेरे बिना जिया जाए ना' प्रस्तुत किया।
जज विशाल ददलानी प्रस्तुति के दौरान भावुक हो गए और उन्होंने आर.
बर्मन , किशोर कुमार , लता मंगेशकर और गुलजार को 'सदियों में एक बार जन्म लेने वाले कलाकार' बताया।
गायिका श्रेया घोषाल ने लता मंगेशकर की गायकी की विशेषता — लय, शब्द और भावना के अनूठे संयोग — को याद किया।
यह गीत 1978 की फिल्म 'घर' से है और हिंदी फिल्म संगीत के सुनहरे दौर की अमर रचनाओं में गिना जाता है।
विशाल ददलानी ने संगीत को 'अनंत दुनिया' की संज्ञा दी और कहा कि इन महान कलाकारों से उन्होंने जीवन में बहुत कुछ सीखा है।

'इंडियन आइडल' के आगामी एपिसोड में कंटेस्टेंट अंशिका ने फिल्म 'घर' के कालजयी गीत 'तेरे बिना जिया जाए ना' की प्रस्तुति दी, जिसने मंच पर मौजूद जज और संगीतकार-गायक विशाल ददलानी को गहरे भावुक कर दिया। यह गीत दिवंगत गायकों किशोर कुमार और लता मंगेशकर की आवाज़ में है, संगीत आर. डी. बर्मन (पंचम दा) का है और बोल गुलजार ने लिखे हैं।

अंशिका की प्रस्तुति और मंच का माहौल

जैसे ही अंशिका ने 'तेरे बिना जिया जाए ना' की पहली पंक्ति गाई, मंच पर एक अलग ही सन्नाटा छा गया। दर्शकों और जजों के चेहरों पर पुराने दौर के संगीत की यादें साफ़ झलक रही थीं। प्रस्तुति के दौरान विशाल ददलानी की आँखें नम हो गईं, जो इस गीत की भावनात्मक गहराई का प्रमाण था।

विशाल ददलानी ने किया दिग्गजों को नमन

परफॉर्मेंस समाप्त होने के बाद विशाल ददलानी ने कहा, 'पंचम दा सिर्फ एक संगीतकार नहीं थे, बल्कि संगीत की दुनिया की एक अलग ही ताकत थे। किशोर दा, लता जी, आशा जी और गुलजार साहब जैसी शख्सियतें सदियों में एक बार जन्म लेती हैं। ये जिस गहराई और दर्द के साथ गाने को बनाते थे, वह आज भी लोगों के दिलों को छू जाता है।'

विशाल ने आगे जोड़ा, 'मैं समझ ही नहीं पाता कि कोई इंसान इतनी गहराई से किसी के दिल की भावना को कैसे छू लेता है। इन कलाकारों के अंदर कोई अलग ही शक्ति थी, जिसकी वजह से उनका संगीत आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। हम हमेशा इन कलाकारों के सामने सिर झुकाते रहेंगे, क्योंकि हमारे लिए यही लोग असली संगीत हैं।'

उन्होंने यह भी कहा, 'मुझे इन महान कलाकारों से जिंदगी में बहुत कुछ सीखने को मिला है। जैसे कोई अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में जाकर एक अनंत दुनिया को महसूस करता होगा, ठीक वैसा ही एहसास मुझे संगीत के साथ होता है। मेरे लिए संगीत की दुनिया की कोई सीमा नहीं है।'

श्रेया घोषाल ने लता मंगेशकर की गायकी को किया याद

शो में विशेष रूप से उपस्थित मशहूर गायिका श्रेया घोषाल भी अंशिका की प्रस्तुति से प्रभावित हुईं। उन्होंने लता मंगेशकर की गायकी की विशेषता पर कहा, 'लता जी गाने की लय, शब्दों और भावनाओं के साथ बहुत खूबसूरती से खेलती थीं। उनका गाने का तरीका बिल्कुल अलग था और वही अंदाज लोगों के दिलों तक सीधा पहुंचता था। उनकी आवाज़ में जो मासूमियत और भावना होती थी, वही इस गीत की सबसे बड़ी ताकत है।'

गीत और कलाकारों की विरासत

फिल्म 'घर' (1978) का यह गीत आज भी हिंदी फिल्म संगीत के सुनहरे दौर की सबसे अमर रचनाओं में गिना जाता है। आर. डी. बर्मन की धुन, गुलजार के बोल और किशोर कुमार तथा लता मंगेशकर की आवाज़ का संयोग इसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रासंगिक बनाए रखता है। गौरतलब है कि 'इंडियन आइडल' जैसे मंचों पर इन गीतों की वापसी यह दर्शाती है कि नई पीढ़ी भी इस विरासत से गहरे जुड़ी है।

आगे क्या देखने को मिलेगा

शो का यह भावनात्मक एपिसोड जल्द ही दर्शकों के सामने आएगा। अंशिका की इस प्रस्तुति के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि वे आगे के दौर में किस तरह की चुनौतियाँ स्वीकार करती हैं और क्या वे इस भावनात्मक लहर को अपनी प्रतिस्पर्धा में बदल पाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह क्षण उससे अलग है — यह एक पीढ़ी का अपनी संगीत विरासत के सामने नतमस्तक होना है। विशाल ददलानी और श्रेया घोषाल जैसे समकालीन कलाकारों का आर. डी. बर्मन युग के प्रति यह सार्वजनिक श्रद्धाभाव दर्शाता है कि हिंदी फिल्म संगीत की जड़ें कितनी गहरी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब स्ट्रीमिंग और रीमिक्स संस्कृति के बीच मूल रचनाओं की प्रासंगिकता पर बहस चल रही है। असली सवाल यह है कि क्या ये मंच इस विरासत को केवल नॉस्टेल्जिया के रूप में परोसते हैं, या नई पीढ़ी को उसे समझने और आगे ले जाने के लिए प्रेरित भी करते हैं।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'तेरे बिना जिया जाए ना' गाना किस फिल्म का है और इसे किसने गाया है?
यह गाना 1978 की हिंदी फिल्म 'घर' का है, जिसे किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने गाया है। इसका संगीत आर. डी. बर्मन (पंचम दा) ने तैयार किया और बोल गुलजार ने लिखे हैं।
इंडियन आइडल में अंशिका कौन हैं?
अंशिका इंडियन आइडल के मौजूदा सीज़न की एक कंटेस्टेंट हैं, जिन्होंने आगामी एपिसोड में 'तेरे बिना जिया जाए ना' की प्रस्तुति दी। उनकी इस परफॉर्मेंस ने जज विशाल ददलानी और गायिका श्रेया घोषाल को गहरे भावुक किया।
विशाल ददलानी ने आर. डी. बर्मन के बारे में क्या कहा?
विशाल ददलानी ने कहा कि पंचम दा (आर. डी. बर्मन) सिर्फ एक संगीतकार नहीं, बल्कि संगीत की दुनिया की एक अलग ही ताकत थे। उन्होंने किशोर कुमार, लता मंगेशकर, आशा भोसले और गुलजार को 'सदियों में एक बार जन्म लेने वाली शख्सियतें' बताया।
श्रेया घोषाल ने लता मंगेशकर की गायकी के बारे में क्या कहा?
श्रेया घोषाल ने कहा कि लता मंगेशकर गाने की लय, शब्दों और भावनाओं के साथ बहुत खूबसूरती से खेलती थीं और उनकी आवाज़ में जो मासूमियत और भावना थी, वही इस गीत की सबसे बड़ी ताकत है।
इंडियन आइडल का यह भावनात्मक एपिसोड कब प्रसारित होगा?
शो के अनुसार यह एपिसोड जल्द ही दर्शकों के सामने आएगा। सटीक प्रसारण तिथि की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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