14 जुलाई 2026
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पाकिस्तान में मानसून बाढ़ का कहर: गिलगित-बाल्टिस्तान में तबाही, सरकारी तैयारियों पर सवाल

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पाकिस्तान में मानसून बाढ़ का कहर: गिलगित-बाल्टिस्तान में तबाही, सरकारी तैयारियों पर सवाल

सारांश

पाकिस्तान में मानसून की शुरुआत के साथ ही तैयारियों की पोल खुल गई — वित्तीय संकट के चलते फंड जारी नहीं, नाले साफ नहीं, और गिलगित-बाल्टिस्तान के डायमर में छह जगहों पर अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। काराकोरम हाईवे ठप, हज़ारों बेघर।

मुख्य बातें

पाकिस्तान में मानसून बाढ़ की तैयारियाँ अधूरी ; वित्तीय संकट के कारण ज़रूरी फंड जारी नहीं हुए।
रावलपिंडी में कई नालों से गाद नहीं निकाली गई; लेह नाला क्षेत्र के निवासियों को अस्थायी रूप से विस्थापित किया गया।
गिलगित-बाल्टिस्तान के डायमर ज़िले में 14 जुलाई की सुबह 6 स्थानों पर अचानक बाढ़ आई।
काराकोरम हाईवे (KKH) पर यातायात ठप; बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त, हज़ारों लोग प्रभावित।
डायमर-भाषा डैम परियोजना की निजी कंपनी के 13 डंपर, 1 एक्सकेवेटर, 1 क्रशिंग प्लांट और 2 टैंकर बाढ़ में बह गए।
प्रभावित निवासियों ने NDMA और GBDMA से तत्काल राहत, सड़क मरम्मत और आर्थिक सहायता की माँग की।

पाकिस्तान में मानसून बाढ़ का मौसम शुरू होते ही स्थिति गंभीर होती जा रही है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस्लामाबाद सहित देश के कई हिस्सों में बाढ़ से निपटने की तैयारियाँ अभी भी अधूरी हैं, और इसके पीछे पाकिस्तान का गहरा वित्तीय संकट प्रमुख कारण बताया जा रहा है। इसी बीच, गिलगित-बाल्टिस्तान के डायमर ज़िले में 14 जुलाई की सुबह छह स्थानों पर अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है।

अधूरी तैयारियाँ और वित्तीय संकट

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि रावलपिंडी में कई नालों से अभी तक गाद नहीं निकाली गई है। लेह नाला क्षेत्र में निचले इलाकों के कुछ निवासियों को अस्थायी रूप से दूसरी जगह भेजा गया है और लोगों ने अपना कीमती सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुँचा दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, मॉनसून की तैयारी के लिए आवश्यक फंड अभी तक जारी नहीं किए गए हैं, जिसे सीधे तौर पर देश के चल रहे वित्तीय संकट से जोड़ा जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पिछले कई वर्षों से अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ राहत पैकेज की शर्तों पर निर्भर है। गौरतलब है कि 2022 की विनाशकारी बाढ़ में पाकिस्तान को अनुमानित ₹2,700 करोड़ डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ था, फिर भी आपदा प्रबंधन ढाँचे में सुधार की गति धीमी रही है।

जर्जर इमारतें और प्रशासनिक निष्क्रियता

रिपोर्टों के अनुसार, टपकती छतों और कमज़ोर दीवारों वाली इमारतों और दुकानों को खाली करने के लिए लगातार नोटिस जारी होने के बावजूद उन्हें खाली नहीं कराया जा रहा। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, हर मानसून में एक या दो इमारतें आंशिक या पूरी तरह गिर जाती हैं और नोटिस केवल कार्रवाई के कागज़ी सबूत के तौर पर जारी किए जाते हैं।

खाली कराने से जुड़े कई मामले अदालतों में लंबित बताए जा रहे हैं। रिपोर्टों में यह भी आरोप लगाया गया है कि कथित तौर पर किराएदारों के साथ मिलीभगत के कारण सरकार प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही है।

गिलगित-बाल्टिस्तान में अचानक बाढ़ की तबाही

गिलगित-बाल्टिस्तान डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (GBDMA) के अनुसार, सोमवार सुबह डायमर ज़िले में छह स्थानों पर अचानक बाढ़ आई। काराकोरम हाईवे (KKH) के किनारे कई घर, फसलें, खेती की ज़मीन और सरकारी व निजी संपत्तियाँ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं।

थोर वैली में मुख्य सड़क के बह जाने के कारण यातायात पूरी तरह ठप हो गया। बिजली पारेषण लाइनें क्षतिग्रस्त होने और बाढ़ का मलबा घरों में घुसने से हज़ारों लोग मुश्किलों में हैं। खानबारी में आई भीषण बाढ़ में पूरे घर, घरेलू सामान और मवेशी भी बह जाने की खबरें सामने आई हैं।

डायमर-भाषा डैम परियोजना को भी नुकसान

रिपोर्टों के अनुसार, डायमर-भाषा डैम परियोजना पर कार्यरत एक निजी कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। बाढ़ के पानी में 13 डंपर, एक एक्सकेवेटर, एक क्रशिंग प्लांट और दो पानी के टैंकर बह गए, जिससे परियोजना का विकास कार्य रुक गया है।

राहत की माँग और आगे की चुनौतियाँ

प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों ने सरकार, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), GBDMA और अन्य संबंधित संस्थाओं से तत्काल राहत अभियान शुरू करने, KKH और अन्य सड़कों की मरम्मत, बिजली आपूर्ति बहाल करने और प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की अपील की है। पाकिस्तान में मानसून का मौसम आमतौर पर जुलाई से सितंबर तक चलता है, और आने वाले हफ्तों में स्थिति और विकट होने की आशंका जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कागज़ी नोटिस और वित्तीय बाधाओं की आड़। 2022 की विनाशकारी बाढ़ के बाद भी आपदा प्रबंधन ढाँचे में ठोस सुधार न होना यह दर्शाता है कि समस्या केवल फंड की नहीं, बल्कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जवाबदेही की भी है। गिलगित-बाल्टिस्तान जैसे पहाड़ी और भूकंप-संवेदनशील क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे की कमज़ोरी और बाढ़ पूर्व-चेतावनी प्रणाली की अनुपस्थिति एक बड़े नीतिगत विफलता की ओर इशारा करती है। जब तक तैयारी और जवाबदेही को एक-दूसरे से नहीं जोड़ा जाता, यह चक्र हर साल दोहराता रहेगा।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान में मानसून बाढ़ की तैयारियाँ क्यों अधूरी हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के गहरे वित्तीय संकट के कारण मानसून तैयारी के लिए ज़रूरी फंड अभी तक जारी नहीं किए गए हैं। रावलपिंडी में नाले साफ नहीं हुए और जर्जर इमारतों को खाली कराने के नोटिस भी प्रभावी नहीं रहे।
गिलगित-बाल्टिस्तान में बाढ़ से कितना नुकसान हुआ?
GBDMA के अनुसार, 14 जुलाई की सुबह डायमर ज़िले में छह स्थानों पर अचानक बाढ़ आई जिसमें घर, फसलें, खेती की ज़मीन और सरकारी-निजी संपत्तियाँ क्षतिग्रस्त हुईं। डायमर-भाषा डैम परियोजना के 13 डंपर, एक एक्सकेवेटर, एक क्रशिंग प्लांट और दो टैंकर भी बह गए।
काराकोरम हाईवे (KKH) पर यातायात क्यों बंद हुआ?
थोर वैली में अचानक आई बाढ़ के कारण मुख्य सड़क के कई हिस्से बह गए, जिससे KKH पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। बिजली पारेषण लाइनें क्षतिग्रस्त होने से हज़ारों लोग अंधेरे में हैं।
प्रभावित लोगों ने सरकार से क्या माँग की है?
प्रभावित निवासियों ने NDMA, GBDMA और सरकार से तत्काल राहत अभियान शुरू करने, KKH और अन्य सड़कों की मरम्मत, बिजली आपूर्ति बहाल करने और प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की अपील की है।
पाकिस्तान में मानसून का मौसम कब तक रहता है और आगे क्या खतरा है?
पाकिस्तान में मानसून का मौसम आमतौर पर जुलाई से सितंबर तक चलता है। तैयारियाँ अधूरी रहने और वित्तीय संकट बने रहने की स्थिति में आने वाले हफ्तों में बाढ़ से और अधिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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