13 जुलाई 2026
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'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर JPC का लखनऊ दौरा, अनुराग ठाकुर बोले — सभी पक्षों की राय के बाद बनेगी रिपोर्ट

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'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर JPC का लखनऊ दौरा, अनुराग ठाकुर बोले — सभी पक्षों की राय के बाद बनेगी रिपोर्ट

सारांश

'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर JPC का लखनऊ दौरा महज औपचारिकता नहीं — यह उस विधेयक की परीक्षा है जो भारत की चुनावी संरचना को बदल सकता है। अनुराग ठाकुर के मुताबिक, 17 जुलाई को रिपोर्ट अंतिम होगी, लेकिन राजनीतिक दलों की आशंकाएँ अभी भी खुली हैं।

मुख्य बातें

संयुक्त संसदीय समिति (JPC) 'वन नेशन, वन इलेक्शन' विधेयक पर राय लेने 13 जुलाई 2026 को लखनऊ पहुँची।
BJP सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा — सभी हितधारकों की राय के बाद ही रिपोर्ट अंतिम होगी।
JPC की 17 जुलाई को होने वाली बैठक में रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर संसद में पेश किए जाने की योजना है।
ठाकुर के अनुसार, बार-बार आदर्श आचार संहिता लागू होने से शासन, निवेश और विकास परियोजनाएँ प्रभावित होती हैं।
कुछ राजनीतिक दलों को आशंका है कि एक साथ चुनाव होने पर क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय एजेंडे के सामने दब सकते हैं।

'वन नेशन, वन इलेक्शन' विधेयक की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) अपने देशव्यापी परामर्श अभियान के तहत 13 जुलाई 2026 को लखनऊ पहुँची। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद और JPC सदस्य अनुराग ठाकुर ने स्पष्ट किया कि समिति राजनीतिक दलों, सरकारी अधिकारियों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों सहित सभी हितधारकों की राय लेने के बाद ही अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी।

देशव्यापी परामर्श का दायरा

अनुराग ठाकुर ने बताया कि JPC अब तक कई राज्यों का दौरा कर चुकी है और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ इस श्रृंखला की अगली कड़ी है। उन्होंने कहा, 'वन नेशन, वन इलेक्शन पर गठित संयुक्त संसदीय समिति कई राज्यों का दौरा कर चुकी है। इस दौरान राजनीतिक दलों, सरकारी अधिकारियों और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों से बातचीत की जा रही है। सरकार द्वारा प्रस्तावित विधेयक को बेहतर बनाने के लिए सुझाव और संशोधन माँगे जा रहे हैं।'

मौजूदा चुनाव प्रणाली पर आपत्तियाँ

ठाकुर ने मौजूदा व्यवस्था की कमियाँ गिनाते हुए कहा कि पाँच वर्षों के दौरान बार-बार आदर्श आचार संहिता लागू होने से शासन बाधित होता है। उनके अनुसार, 'चुनावी प्रक्रिया अक्सर अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यों पर हावी हो जाती है, क्योंकि बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों और संसाधनों को चुनावी ड्यूटी में लगाया जाता है।' उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार के चुनाव निवेश और विकास परियोजनाओं की गति को प्रभावित करते हैं।

राजनीतिक दलों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

ठाकुर ने स्वीकार किया कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' को लेकर राजनीतिक दलों की राय एकसमान नहीं है। उन्होंने कहा, 'कुछ दलों को आशंका है कि अगर देशभर में एक साथ चुनाव होते हैं तो राष्ट्रीय मुद्दे चुनावी चर्चा में ज़्यादा प्रभावी हो सकते हैं और क्षेत्रीय मुद्दों को पर्याप्त जगह नहीं मिल पाएगी।' हालाँकि उन्होंने दावा किया कि इस पहल के समर्थन में पर्याप्त आँकड़े और व्यापक जन-समर्थन मौजूद है।

रिपोर्ट और संसदीय प्रक्रिया की अगली कड़ी

JPC की 17 जुलाई को होने वाली बैठक में रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर स्वीकार किए जाने की उम्मीद है। इसके बाद रिपोर्ट आगे की विधायी प्रक्रिया के लिए संसद में प्रस्तुत की जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल इस विधेयक के संवैधानिक निहितार्थों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं और संघवाद पर इसके प्रभाव को लेकर बहस जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या परामर्श वास्तव में रिपोर्ट को आकार देगा या यह पूर्व-निर्धारित निष्कर्ष को वैधता देने की कवायद मात्र है। गौरतलब है कि विपक्षी दलों ने संघवाद और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर जो आपत्तियाँ उठाई हैं, वे अनुत्तरित हैं — और ठाकुर ने स्वयं माना कि दलों की राय 'अलग-अलग' है। 17 जुलाई की समय-सीमा इतनी तंग है कि इतने विविध सुझावों का सार्थक समावेश संदिग्ध लगता है। यदि रिपोर्ट असहमति को पर्याप्त स्थान नहीं देती, तो संसद में इस विधेयक का रास्ता और विवादास्पद हो सकता है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर JPC का लखनऊ दौरा क्यों हुआ?
JPC 'वन नेशन, वन इलेक्शन' विधेयक पर देशव्यापी परामर्श अभियान के तहत लखनऊ पहुँची, जहाँ राजनीतिक दलों, सरकारी अधिकारियों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए गए। यह कई राज्यों के दौरे की श्रृंखला का हिस्सा है।
JPC 'वन नेशन, वन इलेक्शन' रिपोर्ट कब अंतिम होगी?
समिति की 17 जुलाई 2026 को होने वाली बैठक में रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर स्वीकार किए जाने की उम्मीद है। इसके बाद रिपोर्ट संसद में पेश की जाएगी।
'वन नेशन, वन इलेक्शन' का विरोध क्यों हो रहा है?
कुछ राजनीतिक दलों को आशंका है कि एक साथ चुनाव होने पर राष्ट्रीय मुद्दे हावी हो जाएँगे और क्षेत्रीय मुद्दों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा। संघवाद पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
अनुराग ठाकुर ने मौजूदा चुनाव प्रणाली की क्या कमियाँ बताईं?
ठाकुर के अनुसार, बार-बार आदर्श आचार संहिता लागू होने से शासन बाधित होता है, निवेश और विकास परियोजनाओं की गति धीमी पड़ती है और बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों को चुनावी ड्यूटी में लगाना पड़ता है।
'वन नेशन, वन इलेक्शन' का उद्देश्य क्या है?
इस प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य पूरे देश में लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराना है, ताकि बार-बार होने वाले चुनावों से उत्पन्न प्रशासनिक और वित्तीय बोझ को कम किया जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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