14 जुलाई 2026
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वैष्णो देवी नकली चांदी विवाद: जम्मू कोर्ट ने क्राइम ब्रांच जांच अधिकारी को 29 जुलाई को तलब किया

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वैष्णो देवी नकली चांदी विवाद: जम्मू कोर्ट ने क्राइम ब्रांच जांच अधिकारी को 29 जुलाई को तलब किया

सारांश

वैष्णो देवी श्राइन में कथित ₹550 करोड़ की नकली चांदी का मामला अब अदालत पहुँच गया है। जम्मू कोर्ट ने क्राइम ब्रांच अधिकारी को 29 जुलाई को तलब किया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि चांदी में विषैले कैडमियम की मिलावट थी — यह मामला सिर्फ वित्तीय नहीं, सार्वजनिक स्वास्थ्य का भी सवाल है।

मुख्य बातें

जम्मू की अदालत ने क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को 29 जुलाई को सभी रिकॉर्ड सहित उपस्थित होने का आदेश दिया।
शिकायतकर्ता अधिवक्ता दीपक शर्मा ने 9 मई 2026 को क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार श्राइन बोर्ड की लगभग 20 टन चांदी में से अधिकांश कथित रूप से नकली, बाज़ार मूल्य करीब ₹550 करोड़ ।
कथित तौर पर चांदी में अत्यंत विषैले धातु कैडमियम की मिलावट पाई गई, जो लाइसेंस-नियंत्रित पदार्थ है।
शर्मा का आरोप — क्राइम ब्रांच ने जांच की जिम्मेदारी लेने से बचते हुए मामला नियमित पुलिस को स्थानांतरित किया।

जम्मू की एक अदालत ने श्री माता वैष्णो देवी श्राइन में कथित नकली चांदी चढ़ाए जाने के मामले में क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को 29 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और मामले से जुड़े सभी दस्तावेज़ व रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश शिकायतकर्ता अधिवक्ता दीपक शर्मा की याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया गया, जिन्होंने 9 मई 2026 को क्राइम ब्रांच में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के पास मौजूद लगभग 20 टन चांदी की जांच के दौरान अधिकांश चांदी कथित तौर पर नकली पाई गई। रिपोर्टों में इस चांदी का बाज़ार मूल्य करीब ₹550 करोड़ बताया गया था, जबकि दावा किया गया कि केवल 5 से 10 किलोग्राम अथवा लगभग ₹30 करोड़ मूल्य की चांदी ही असली थी। इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में व्यापक चिंता उत्पन्न हुई।

अधिवक्ता की मुख्य दलीलें

अधिवक्ता दीपक शर्मा का कहना है कि यह मानना कठिन है कि देशभर से लाखों श्रद्धालु अलग-अलग समय पर, अलग-अलग स्थानों से खरीदी गई चांदी माता के दरबार में चढ़ाएं और वह सब एक साथ नकली निकले। उनके अनुसार, यदि किसी एक व्यक्ति की भेंट में गड़बड़ी होती तो बात समझ में आती, लेकिन लाखों श्रद्धालुओं की आस्थापूर्ण भेंट को एकमुश्त नकली बताना गंभीर सवाल खड़े करता है।

शर्मा ने एक और अहम तथ्य की ओर ध्यान दिलाया — कथित तौर पर इस चांदी में कैडमियम की मिलावट पाई गई थी। उन्होंने कहा कि कैडमियम एक अत्यंत विषैला धातु है, जिसकी खरीद और उपयोग लाइसेंस के तहत नियंत्रित होती है। इतनी बड़ी मात्रा में कैडमियम का इस्तेमाल अपने आप में गहन जांच का विषय है और यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा संभावित मुद्दा भी हो सकता है।

क्राइम ब्रांच पर उठे सवाल

शर्मा ने आरोप लगाया कि 9 मई 2026 को शिकायत दर्ज होने के बाद क्राइम ब्रांच ने स्वयं जांच आगे बढ़ाने के बजाय मामले को नियमित पुलिस (एग्जीक्यूटिव पुलिस) को स्थानांतरित कर दिया। उनका कहना है कि इससे ऐसा प्रतीत हुआ कि क्राइम ब्रांच ने इस संवेदनशील मामले की जिम्मेदारी लेने से बचने का प्रयास किया। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया, जिस पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए जांच अधिकारी को तलब किया।

श्रद्धालुओं की आस्था पर असर

अधिवक्ता शर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सहित देशभर से लाखों श्रद्धालु गहरी आस्था के साथ माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए आते हैं। कई श्रद्धालु कठिन व्रत रखते हैं, पैदल यात्रा करते हैं और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ यह यात्रा पूरी करते हैं। ऐसे में यदि उनकी श्रद्धापूर्वक अर्पित भेंट पर सवाल उठते हैं तो इससे लाखों लोगों का विश्वास प्रभावित हो सकता है।

शर्मा ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करना नहीं, बल्कि सच्चाई सामने लाना और व्यवस्था में यदि कोई खामी है तो उसे दूर कराना है। उन्होंने माँग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।

आगे क्या होगा

अब सभी की नज़रें 29 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं, जब क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को मामले से जुड़े समस्त रिकॉर्ड के साथ अदालत के समक्ष उपस्थित होना है। यह सुनवाई न केवल जांच की दिशा तय करेगी, बल्कि श्राइन बोर्ड की प्रशासनिक जवाबदेही पर भी महत्वपूर्ण सवाल उठाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि सत्यापित होता है, तो यह मामला वित्तीय अनियमितता से कहीं आगे सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की श्रेणी में आ सकता है — एक पहलू जिसे अब तक मुख्यधारा की कवरेज में पर्याप्त महत्व नहीं मिला। श्राइन बोर्ड की प्रशासनिक पारदर्शिता और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा — दोनों एक साथ दांव पर हैं। 29 जुलाई की सुनवाई यह तय करेगी कि जांच सही दिशा में आगे बढ़ती है या एक और संवेदनशील मामला प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ जाता है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वैष्णो देवी नकली चांदी मामला क्या है?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के पास मौजूद लगभग 20 टन चांदी की जांच में अधिकांश चांदी कथित तौर पर नकली पाई गई, जिसका बाज़ार मूल्य करीब ₹550 करोड़ बताया गया। इसमें केवल 5 से 10 किलोग्राम यानी लगभग ₹30 करोड़ मूल्य की चांदी ही असली बताई गई।
जम्मू कोर्ट ने क्राइम ब्रांच अधिकारी को क्यों तलब किया?
अधिवक्ता दीपक शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए जम्मू की अदालत ने क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को 29 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। शर्मा का आरोप था कि क्राइम ब्रांच ने जांच की जिम्मेदारी लेने के बजाय मामला नियमित पुलिस को स्थानांतरित कर दिया।
कैडमियम मिलावट का आरोप कितना गंभीर है?
शिकायतकर्ता के अनुसार, कथित तौर पर नकली चांदी में कैडमियम की मिलावट पाई गई, जो एक अत्यंत विषैला और लाइसेंस-नियंत्रित धातु है। यदि यह आरोप सत्यापित होता है, तो इतनी बड़ी मात्रा में कैडमियम की उपस्थिति वित्तीय अनियमितता के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा का भी गंभीर मुद्दा बन जाती है।
शिकायत कब और किसने दर्ज कराई?
जम्मू के अधिवक्ता दीपक शर्मा ने 9 मई 2026 को क्राइम ब्रांच में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई थी। जब क्राइम ब्रांच ने मामला नियमित पुलिस को स्थानांतरित कर दिया, तब उन्होंने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया।
इस मामले का श्रद्धालुओं पर क्या असर पड़ सकता है?
लाखों श्रद्धालु हर वर्ष गहरी आस्था के साथ माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए आते हैं और चांदी सहित अन्य भेंट चढ़ाते हैं। यदि उनकी श्रद्धापूर्वक अर्पित भेंट को नकली बताया जाए, तो इससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं और श्राइन प्रशासन में उनका विश्वास कमज़ोर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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