वैष्णो देवी नकली चांदी विवाद: जम्मू कोर्ट ने क्राइम ब्रांच जांच अधिकारी को 29 जुलाई को तलब किया
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू की एक अदालत ने श्री माता वैष्णो देवी श्राइन में कथित नकली चांदी चढ़ाए जाने के मामले में क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को 29 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और मामले से जुड़े सभी दस्तावेज़ व रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश शिकायतकर्ता अधिवक्ता दीपक शर्मा की याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया गया, जिन्होंने 9 मई 2026 को क्राइम ब्रांच में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई थी।
मामले की पृष्ठभूमि
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के पास मौजूद लगभग 20 टन चांदी की जांच के दौरान अधिकांश चांदी कथित तौर पर नकली पाई गई। रिपोर्टों में इस चांदी का बाज़ार मूल्य करीब ₹550 करोड़ बताया गया था, जबकि दावा किया गया कि केवल 5 से 10 किलोग्राम अथवा लगभग ₹30 करोड़ मूल्य की चांदी ही असली थी। इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में व्यापक चिंता उत्पन्न हुई।
अधिवक्ता की मुख्य दलीलें
अधिवक्ता दीपक शर्मा का कहना है कि यह मानना कठिन है कि देशभर से लाखों श्रद्धालु अलग-अलग समय पर, अलग-अलग स्थानों से खरीदी गई चांदी माता के दरबार में चढ़ाएं और वह सब एक साथ नकली निकले। उनके अनुसार, यदि किसी एक व्यक्ति की भेंट में गड़बड़ी होती तो बात समझ में आती, लेकिन लाखों श्रद्धालुओं की आस्थापूर्ण भेंट को एकमुश्त नकली बताना गंभीर सवाल खड़े करता है।
शर्मा ने एक और अहम तथ्य की ओर ध्यान दिलाया — कथित तौर पर इस चांदी में कैडमियम की मिलावट पाई गई थी। उन्होंने कहा कि कैडमियम एक अत्यंत विषैला धातु है, जिसकी खरीद और उपयोग लाइसेंस के तहत नियंत्रित होती है। इतनी बड़ी मात्रा में कैडमियम का इस्तेमाल अपने आप में गहन जांच का विषय है और यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा संभावित मुद्दा भी हो सकता है।
क्राइम ब्रांच पर उठे सवाल
शर्मा ने आरोप लगाया कि 9 मई 2026 को शिकायत दर्ज होने के बाद क्राइम ब्रांच ने स्वयं जांच आगे बढ़ाने के बजाय मामले को नियमित पुलिस (एग्जीक्यूटिव पुलिस) को स्थानांतरित कर दिया। उनका कहना है कि इससे ऐसा प्रतीत हुआ कि क्राइम ब्रांच ने इस संवेदनशील मामले की जिम्मेदारी लेने से बचने का प्रयास किया। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया, जिस पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए जांच अधिकारी को तलब किया।
श्रद्धालुओं की आस्था पर असर
अधिवक्ता शर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सहित देशभर से लाखों श्रद्धालु गहरी आस्था के साथ माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए आते हैं। कई श्रद्धालु कठिन व्रत रखते हैं, पैदल यात्रा करते हैं और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ यह यात्रा पूरी करते हैं। ऐसे में यदि उनकी श्रद्धापूर्वक अर्पित भेंट पर सवाल उठते हैं तो इससे लाखों लोगों का विश्वास प्रभावित हो सकता है।
शर्मा ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करना नहीं, बल्कि सच्चाई सामने लाना और व्यवस्था में यदि कोई खामी है तो उसे दूर कराना है। उन्होंने माँग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
आगे क्या होगा
अब सभी की नज़रें 29 जुलाई की सुनवाई पर टिकी हैं, जब क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को मामले से जुड़े समस्त रिकॉर्ड के साथ अदालत के समक्ष उपस्थित होना है। यह सुनवाई न केवल जांच की दिशा तय करेगी, बल्कि श्राइन बोर्ड की प्रशासनिक जवाबदेही पर भी महत्वपूर्ण सवाल उठाएगी।