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राम मंदिर चांदी विवाद: IBJA ने कहा — 60 किलो चांदी ट्रस्ट को सौंपी, SIT जांच पर भरोसा

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राम मंदिर चांदी विवाद: IBJA ने कहा — 60 किलो चांदी ट्रस्ट को सौंपी, SIT जांच पर भरोसा

सारांश

राम मंदिर चांदी विवाद के बीच IBJA नॉर्थ इंडिया के प्रमुख अनुराग रस्तोगी ने साफ किया कि 2020 में दी गई करीब 60 किलो चांदी ट्रस्ट को विधिवत सौंपी गई थी। संगठन ने किसी पर आरोप नहीं लगाया और मुख्यमंत्री योगी की SIT जांच पर भरोसा जताया।

मुख्य बातें

IBJA नॉर्थ इंडिया के प्रमुख अनुराग रस्तोगी ने कहा कि वर्ष 2020 में दी गई चांदी विधिवत राम मंदिर ट्रस्ट को सौंपी जा चुकी है।
कुल दान में 39 किलो मुख्य चांदी, 3 किलो का लैंप, 1 किलो का कलश और राज किशोर गुप्ता की 22.5 किलो चांदी शामिल — कुल लगभग 60 किलो ।
संगठन ने मंदिर ट्रस्ट या प्रशासन पर कोई औपचारिक आरोप नहीं लगाया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित SIT को 15 दिनों में रिपोर्ट देने का निर्देश; IBJA ने जांच पर भरोसा जताया।
रस्तोगी ने कहा — 'हमने तो राम को दिया और राम जानें'; जांच का दायित्व एजेंसियों पर।

अयोध्या राम मंदिर को दान में दी गई चांदी की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) नॉर्थ इंडिया के प्रमुख अनुराग रस्तोगी ने 20 जून 2026 को स्पष्ट किया कि संगठन और उससे जुड़े व्यापारियों द्वारा वर्ष 2020 में दी गई लगभग 60 किलो चांदी विधिवत रूप से मंदिर ट्रस्ट को सौंपी जा चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि दानदाताओं का मंदिर ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश प्रशासन पर पूरा भरोसा बना हुआ है।

दान का पूरा विवरण

रस्तोगी ने बताया कि IBJA और उससे जुड़े व्यापारियों की ओर से कुल मिलाकर करीब 60 किलो चांदी राम मंदिर निर्माण के लिए समर्पित की गई थी। इसमें 39 किलो चांदी का मुख्य दान शामिल था। इसके अतिरिक्त 3 किलो का एक चांदी का लैंप और 1 किलो का चांदी का कलश भी भेंट किया गया था। गाजियाबाद के व्यापारी और संगठन से जुड़े राज किशोर गुप्ता ने अलग से 22.5 किलो चांदी का योगदान दिया था, जिसे मिलाकर यह कुल आँकड़ा करीब 60 किलो बनता है।

उन्होंने कहा कि जब राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो रहा था, तब देशभर के बुलियन व्यापारियों में अपार उत्साह था। उन्होंने कहा, 'हमने IBJA की ओर से राम मंदिर निर्माण के दौरान भावनात्मक रूप से एक अंश समर्पित किया था।'

विवाद की पृष्ठभूमि

हाल के दिनों में अयोध्या राम मंदिर को प्राप्त दान सामग्री — विशेषकर चांदी — के उपयोग और उपलब्धता को लेकर मीडिया में कथित अनियमितताओं की चर्चा उठी है। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मंदिर निर्माण के बाद ट्रस्ट की जवाबदेही को लेकर व्यापक सार्वजनिक रुचि बनी हुई है। रस्तोगी ने स्पष्ट किया कि संगठन की ओर से अब तक किसी पर कोई औपचारिक आरोप नहीं लगाया गया है। उन्होंने कहा, 'मीडिया और अन्य माध्यमों से कुछ अनियमितताओं या कथित घोटाले की बातें सुनने को मिल रही हैं, लेकिन हमारी ओर से किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँचा गया है।'

SIT जांच पर भरोसा

दान सामग्री को लेकर उठे सवालों के मद्देनज़र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। रस्तोगी ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने 15 दिनों के भीतर पूरी स्थिति स्पष्ट करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, 'हम उनकी बात से सहमत हैं और जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।' रस्तोगी ने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन पर पूर्ण विश्वास जताया।

आस्था और जवाबदेही

रस्तोगी ने भावनात्मक अंदाज़ में कहा कि दानदाताओं का कर्तव्य श्रद्धा से दान देना था, जो पूरा किया जा चुका है। उन्होंने कहा, 'हमने तो राम को दिया और राम जानें।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दान की गई वस्तुओं की सुरक्षा और उपयोग की जांच करना जांच एजेंसियों का काम है, न कि दानदाताओं का।

यह मामला आगे भी चर्चा में बना रह सकता है, क्योंकि SIT की रिपोर्ट आने के बाद ही दान सामग्री की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उतना ही सावधानी से तैयार किया गया भी लगता है — संगठन ने न तो ट्रस्ट का बचाव किया, न आरोप लगाया; बस दान की पुष्टि की और गेंद SIT के पाले में डाल दी। असली सवाल यह है कि 60 किलो चांदी 'सौंपी गई' और 'उपयोग की गई' के बीच का फ़र्क SIT की रिपोर्ट में कितना स्पष्ट होगा। राम मंदिर जैसे संवेदनशील धार्मिक विश्वास से जुड़े मामले में पारदर्शिता की माँग जायज़ है, और 15 दिन की समयसीमा में ठोस जवाब न आए तो यह विवाद और गहरा हो सकता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चांदी विवाद क्या है?
अयोध्या राम मंदिर निर्माण के दौरान दानदाताओं द्वारा दी गई चांदी और अन्य सामग्री के उपयोग व उपलब्धता को लेकर मीडिया में कथित अनियमितताओं की चर्चा उठी है। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने SIT गठित की है, जो 15 दिनों में रिपोर्ट देगी।
IBJA ने राम मंदिर को कितनी चांदी दान की थी?
IBJA नॉर्थ इंडिया और उससे जुड़े व्यापारियों ने कुल मिलाकर लगभग 60 किलो चांदी दान की थी। इसमें 39 किलो मुख्य दान, 3 किलो का लैंप, 1 किलो का कलश और गाजियाबाद के व्यापारी राज किशोर गुप्ता की 22.5 किलो चांदी शामिल है।
IBJA ने मंदिर ट्रस्ट पर कोई आरोप लगाया है?
नहीं। IBJA नॉर्थ इंडिया के प्रमुख अनुराग रस्तोगी ने स्पष्ट कहा कि संगठन की ओर से किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है। उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश सरकार पर उनका पूरा भरोसा बना हुआ है।
SIT जांच में क्या होगा और कब तक नतीजे आएंगे?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश है। SIT यह जाँचेगी कि दान की गई सामग्री सुरक्षित है या नहीं और उसका उपयोग किस प्रकार किया गया।
यह दान कब और किस उद्देश्य से दिया गया था?
वर्ष 2020 में राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू होने के समय IBJA और जुड़े व्यापारियों ने श्रद्धा और आस्था के साथ यह चांदी मंदिर की नींव में योगदान के रूप में दी थी। यह दान विधिवत मंदिर ट्रस्ट को सौंपा गया था।
राष्ट्र प्रेस
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