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राम मंदिर फंड गबन: एसआईटी आज राम शंकर यादव से करेगी पूछताछ, सोने-चांदी के रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे

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राम मंदिर फंड गबन: एसआईटी आज राम शंकर यादव से करेगी पूछताछ, सोने-चांदी के रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे

सारांश

अयोध्या राम मंदिर के दान में कथित ₹50 करोड़ के गबन की जांच अब निर्णायक मोड़ पर है — एसआईटी आज मुख्य संदिग्ध टिन्नू यादव से पूछताछ करेगी और सोने-चांदी के रिकॉर्ड में अंतर का पैमाना तय करेगी। यह मामला देश के सबसे चर्चित धार्मिक स्थल के वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

मुख्य बातें

एसआईटी ने 20 जून 2025 को जांच के पाँचवें दिन मुख्य संदिग्ध राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से पूछताछ की योजना बनाई है।
आरोप है कि यादव ने मंदिर फंड से कथित तौर पर ₹50 करोड़ का दुरुपयोग कर आलीशान मकान बनवाया।
एसआईटी अब तक मंदिर के 10 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ कर चुकी है।
मंदिर में चढ़ाए गए सोने-चांदी और आभूषणों के वास्तविक स्टॉक और कागज़ी रिकॉर्ड के बीच अंतर की जांच की जा रही है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की है; समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने न्यायिक जांच की माँग की है।

अयोध्या राम मंदिर की दानराशि में कथित गबन मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने 20 जून 2025 को अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है। सूत्रों के अनुसार, जांच के पाँचवें दिन एसआईटी मुख्य संदिग्ध राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से विस्तृत पूछताछ कर सकती है। इसके साथ ही मंदिर में चढ़ाए गए सोने-चांदी और आभूषणों के दस्तावेज़ों तथा आरोपी के भूमि अभिलेखों की गहन पड़ताल भी की जाएगी।

मुख्य आरोप और जांच का दायरा

राम शंकर यादव इस मामले के प्रमुख संदिग्धों में शामिल हैं। आरोप है कि उन्होंने मंदिर के फंड से कथित तौर पर ₹50 करोड़ का दुरुपयोग कर एक आलीशान मकान का निर्माण कराया। राम मंदिर क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के साथ उनके कथित संबंधों के सामने आने के बाद यह विवाद और गहरा हो गया था।

एसआईटी अब तक यादव से प्राप्त दस्तावेज़ों का उनके बयानों से मिलान करेगी, ताकि विसंगतियों को चिह्नित किया जा सके। यह ऐसे समय में आया है जब मंदिर प्रशासन पर पारदर्शिता को लेकर पहले से सवाल उठ रहे थे।

चढ़ावे के रिकॉर्ड में अंतर की जांच

एसआईटी ने अब तक मंदिर के 10 से अधिक प्रमुख अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की है। जांचकर्ता मंदिर में प्राप्त गहनों, आभूषणों और अन्य चढ़ावे की वास्तविक मात्रा और उनके आधिकारिक कागज़ी रिकॉर्ड के बीच के अंतर का पता लगाने में जुटे हैं।

सूत्रों के अनुसार, सोने-चांदी के रूप में प्राप्त दान और मंदिर प्रशासन के पास उपलब्ध उनके अभिलेखों के बीच की खाई के आधार पर ही एसआईटी कथित गड़बड़ियों का पैमाना तय करेगी। गौरतलब है कि यह विवाद सबसे पहले स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के ज़रिए सामने आया था, जिनमें चढ़ावा संग्रह में अनियमितताओं का उल्लेख था।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और एसआईटी का गठन

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने करोड़ों रुपये के बिना हिसाब-किताब वाले दान की चोरी का दावा करते हुए मामले की न्यायिक जांच की माँग की थी। आलोचकों का कहना है कि इतने बड़े धार्मिक स्थल के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी गंभीर चिंता का विषय है।

यह पहली बार नहीं है जब किसी प्रमुख धार्मिक ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठे हों — देश के कई बड़े मंदिर ट्रस्टों में इस तरह के विवाद पहले भी सामने आ चुके हैं।

आगे क्या होगा

जांच के अगले चरण में एसआईटी राम शंकर यादव के बयानों का दस्तावेज़ी साक्ष्यों से मिलान करने के बाद आगे की कार्रवाई तय करेगी। यदि रिकॉर्ड में पाई गई विसंगतियाँ पुष्ट होती हैं, तो गबन के पैमाने का खुलासा हो सकता है और नई गिरफ्तारियाँ भी संभव हैं। यह मामला अयोध्या में राम मंदिर प्रशासन की जवाबदेही की सबसे बड़ी परीक्षा बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जवाबदेही का सवाल किसी भी दल से परे है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर फंड गबन मामला क्या है?
अयोध्या के राम मंदिर में दान के रूप में प्राप्त धनराशि और सोने-चांदी में कथित गड़बड़ी का यह मामला स्थानीय मीडिया रिपोर्टों से सामने आया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की है, जो मुख्य संदिग्ध राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव सहित 10 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है।
राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव पर क्या आरोप हैं?
आरोप है कि राम शंकर यादव ने कथित तौर पर मंदिर के फंड से ₹50 करोड़ का दुरुपयोग कर एक आलीशान मकान का निर्माण कराया। उनके राम मंदिर क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के साथ कथित संबंधों के सामने आने के बाद यह मामला और अधिक विवादास्पद हो गया।
एसआईटी की जांच में अब तक क्या सामने आया है?
एसआईटी ने अब तक मंदिर के 10 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की है। जांचकर्ता मंदिर में चढ़ाए गए सोने-चांदी और आभूषणों की वास्तविक मात्रा और उनके कागज़ी रिकॉर्ड के बीच के अंतर का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे गबन के पैमाने का अनुमान लगाया जा सकेगा।
समाजवादी पार्टी ने इस मामले में क्या माँग की है?
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने करोड़ों रुपये के बिना हिसाब-किताब वाले दान की चोरी का दावा किया है और मामले की न्यायिक जांच की माँग उठाई है। उनका कहना है कि एसआईटी जांच पर्याप्त नहीं है और स्वतंत्र न्यायिक निगरानी ज़रूरी है।
इस मामले में आगे क्या होने की संभावना है?
एसआईटी राम शंकर यादव के बयानों का दस्तावेज़ी साक्ष्यों से मिलान करने के बाद आगे की कार्रवाई तय करेगी। यदि रिकॉर्ड में विसंगतियाँ पुष्ट होती हैं, तो गबन के पैमाने का खुलासा होगा और नई गिरफ्तारियाँ भी संभव हैं।
राष्ट्र प्रेस
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