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राम मंदिर धन विवाद: अयोध्या के संतों की अपील — एसआईटी जांच पूरी होने तक धैर्य रखें

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राम मंदिर धन विवाद: अयोध्या के संतों की अपील — एसआईटी जांच पूरी होने तक धैर्य रखें

सारांश

राम मंदिर से जुड़े कथित धन दुरुपयोग मामले में अयोध्या के तीन प्रमुख संतों ने श्रद्धालुओं से एसआईटी जांच पूरी होने तक संयम बरतने की अपील की है। संतों ने विपक्ष पर 2027 चुनाव को देखते हुए मुद्दे के राजनीतिकरण का आरोप भी लगाया।

मुख्य बातें

महंत विजय दास , महंत अवधेश दास जी महाराज और महंत जन्मेजय शरण ने 4 जुलाई को राम मंदिर धन विवाद पर प्रतिक्रिया दी।
तीनों संतों ने एसआईटी जांच पूरी होने तक धैर्य बनाए रखने की अपील की।
महंत विजय दास ने आरोप लगाया कि विपक्ष 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है।
महंत अवधेश दास ने माना कि गड़बड़ी गंभीर है और इससे सनातन धर्म की छवि को नुकसान पहुंचा है।
समाजवादी पार्टी द्वारा वीडियो जारी किए जाने के बाद से मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका जताई गई।
दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की माँग सभी संतों ने की, किंतु जांच से पहले किसी को दोषी ठहराने से इनकार किया।

अयोध्या के प्रमुख संतों ने 4 जुलाई को राम मंदिर से जुड़े कथित धन दुरुपयोग और चोरी के मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी और श्रद्धालुओं से विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच पूरी होने तक धैर्य बनाए रखने की अपील की। महंत विजय दास, हनुमान बाग के महंत अवधेश दास जी महाराज और जानकी घाट बड़ा स्थान के रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण ने एक स्वर में कहा कि दोषियों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, किंतु जांच से पहले किसी को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।

महंत विजय दास का पक्ष

महंत विजय दास ने राम मंदिर से जुड़े आरोपों को बेबुनियाद और निराधार बताया। उन्होंने कहा कि चंपत राय ने अपना पूरा जीवन धर्म के प्रचार-प्रसार और मंदिर निर्माण के कार्य में समर्पित किया है और वृद्धावस्था में भी उन्होंने मंदिर निर्माण की निगरानी की। उनके अनुसार, यदि कहीं कोई चूक हुई भी है, तो उसे अनावश्यक रूप से बड़ा विवाद नहीं बनाया जाना चाहिए।

महंत विजय दास ने आरोप लगाया कि 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए विपक्ष इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि लापरवाही के कारण कुछ लोगों ने स्वार्थवश धन का दुरुपयोग किया, इसीलिए एसआईटी ने संबंधित व्यक्तियों को पकड़ा है और कार्रवाई जारी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर विश्वास रखने की भी अपील की।

चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की मांग पर उन्होंने कहा कि किसी संस्था में यदि कुछ लोगों से गलती हुई है, तो पूरे संगठन को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उनके शब्दों में, 'विपक्ष का काम इस्तीफा मांगना है, लेकिन केवल मांग करने से कोई इस्तीफा नहीं दे देता।'

महंत अवधेश दास का बयान

हनुमान बाग के महंत अवधेश दास जी महाराज ने स्वीकार किया कि मंदिरों में छोटी-मोटी चोरी की घटनाएं असामान्य नहीं होतीं, लेकिन इस मामले में गड़बड़ी अधिक गंभीर प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि इससे सनातन धर्म की छवि को नुकसान पहुंचा है।

महंत अवधेश दास ने कहा कि जब समाजवादी पार्टी की ओर से पहला वीडियो जारी किया गया, तभी से इस प्रकरण में राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका पैदा हुई। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस घटनाक्रम से बेहद दुखी हैं, क्योंकि उन्होंने अयोध्या के विकास और उसे विश्व स्तर पर स्थापित करने के लिए अथक परिश्रम किया है। उनके अनुसार, निचले स्तर पर हुई गड़बड़ी के लिए मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।

महंत जन्मेजय शरण की संक्षिप्त प्रतिक्रिया

जानकी घाट बड़ा स्थान के रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण ने संक्षिप्त किंतु स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके मन में किसी के प्रति कोई नाराजगी नहीं है, और जिन लोगों की गलती है, उन्हें कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए।

एसआईटी जांच और आगे की राह

तीनों संतों ने एकमत से कहा कि एसआईटी की जांच पर भरोसा रखा जाना चाहिए और उसके निष्कर्षों का इंतजार किया जाना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर से जुड़े कथित धन दुरुपयोग का मामला राजनीतिक और धार्मिक दोनों हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। गौरतलब है कि जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है। एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद ही दोषियों की भूमिका और कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हो सकेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास पर सवाल हैं। संतों का विपक्ष पर राजनीतिकरण का आरोप आंशिक रूप से वैध हो सकता है, किंतु यह आरोप स्वयं संस्थागत जवाबदेही की माँग को कमज़ोर नहीं करता। गौरतलब है कि एसआईटी ने कार्रवाई की है — यह स्वयं स्वीकृति है कि गड़बड़ी हुई। असली परीक्षा यह है कि जांच का दायरा कितना निष्पक्ष और पारदर्शी रहता है, और क्या निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएंगे।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर धन दुरुपयोग मामला क्या है?
राम मंदिर से जुड़े कथित धन दुरुपयोग और चोरी के आरोपों की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है। एसआईटी ने कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया है और जांच अभी जारी है।
अयोध्या के संतों ने इस मामले पर क्या कहा?
महंत विजय दास, महंत अवधेश दास जी महाराज और महंत जन्मेजय शरण ने एसआईटी जांच पूरी होने तक धैर्य रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए।
क्या इस मामले में विपक्ष की भूमिका है?
संतों ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी द्वारा वीडियो जारी किए जाने के बाद से मामले में राजनीतिक रंग आया। महंत विजय दास के अनुसार, 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए विपक्ष इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की माँग पर संतों का क्या कहना है?
महंत विजय दास ने कहा कि किसी संस्था में कुछ लोगों की गलती के लिए पूरे संगठन को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि केवल विपक्ष की माँग पर इस्तीफा देना उचित नहीं होगा।
एसआईटी जांच के बाद क्या होगा?
संतों ने विश्वास जताया कि एसआईटी जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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