राम मंदिर धन विवाद: अयोध्या के संतों की अपील — एसआईटी जांच पूरी होने तक धैर्य रखें
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के प्रमुख संतों ने 4 जुलाई को राम मंदिर से जुड़े कथित धन दुरुपयोग और चोरी के मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी और श्रद्धालुओं से विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच पूरी होने तक धैर्य बनाए रखने की अपील की। महंत विजय दास, हनुमान बाग के महंत अवधेश दास जी महाराज और जानकी घाट बड़ा स्थान के रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण ने एक स्वर में कहा कि दोषियों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, किंतु जांच से पहले किसी को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।
महंत विजय दास का पक्ष
महंत विजय दास ने राम मंदिर से जुड़े आरोपों को बेबुनियाद और निराधार बताया। उन्होंने कहा कि चंपत राय ने अपना पूरा जीवन धर्म के प्रचार-प्रसार और मंदिर निर्माण के कार्य में समर्पित किया है और वृद्धावस्था में भी उन्होंने मंदिर निर्माण की निगरानी की। उनके अनुसार, यदि कहीं कोई चूक हुई भी है, तो उसे अनावश्यक रूप से बड़ा विवाद नहीं बनाया जाना चाहिए।
महंत विजय दास ने आरोप लगाया कि 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए विपक्ष इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि लापरवाही के कारण कुछ लोगों ने स्वार्थवश धन का दुरुपयोग किया, इसीलिए एसआईटी ने संबंधित व्यक्तियों को पकड़ा है और कार्रवाई जारी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर विश्वास रखने की भी अपील की।
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की मांग पर उन्होंने कहा कि किसी संस्था में यदि कुछ लोगों से गलती हुई है, तो पूरे संगठन को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उनके शब्दों में, 'विपक्ष का काम इस्तीफा मांगना है, लेकिन केवल मांग करने से कोई इस्तीफा नहीं दे देता।'
महंत अवधेश दास का बयान
हनुमान बाग के महंत अवधेश दास जी महाराज ने स्वीकार किया कि मंदिरों में छोटी-मोटी चोरी की घटनाएं असामान्य नहीं होतीं, लेकिन इस मामले में गड़बड़ी अधिक गंभीर प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि इससे सनातन धर्म की छवि को नुकसान पहुंचा है।
महंत अवधेश दास ने कहा कि जब समाजवादी पार्टी की ओर से पहला वीडियो जारी किया गया, तभी से इस प्रकरण में राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका पैदा हुई। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस घटनाक्रम से बेहद दुखी हैं, क्योंकि उन्होंने अयोध्या के विकास और उसे विश्व स्तर पर स्थापित करने के लिए अथक परिश्रम किया है। उनके अनुसार, निचले स्तर पर हुई गड़बड़ी के लिए मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
महंत जन्मेजय शरण की संक्षिप्त प्रतिक्रिया
जानकी घाट बड़ा स्थान के रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण ने संक्षिप्त किंतु स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके मन में किसी के प्रति कोई नाराजगी नहीं है, और जिन लोगों की गलती है, उन्हें कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए।
एसआईटी जांच और आगे की राह
तीनों संतों ने एकमत से कहा कि एसआईटी की जांच पर भरोसा रखा जाना चाहिए और उसके निष्कर्षों का इंतजार किया जाना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर से जुड़े कथित धन दुरुपयोग का मामला राजनीतिक और धार्मिक दोनों हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। गौरतलब है कि जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है। एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद ही दोषियों की भूमिका और कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हो सकेगी।