राम मंदिर दान विवाद: एफआईआर में बड़े नाम नहीं, अयोध्या के संतों का ट्रस्ट पर सीधा हमला
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के साधु-संतों ने 26 जून 2026 को राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया, जब दान प्रकरण में दर्ज एफआईआर में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम शामिल नहीं किए गए। संतों ने ट्रस्ट के लोगों को सीधे तौर पर 'चोर' बताया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निष्पक्ष जाँच की माँग की।
महंत धर्मदास का तीखा हमला
हनुमानगढ़ी के महंत धर्मदास ने राम मंदिर दान प्रकरण में ट्रस्ट की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'ट्रस्ट खुद ट्रस्ट के लोगों में सम्मिलित है। वही एफआईआर कर रहे हैं। इसी से समझा जा सकता है कि कितना सही हो रहा है और कितना गलत। हम जानते हैं कि भगवान सबका फैसला करेगा।'
महंत धर्मदास ने यह भी स्पष्ट किया कि जो इंचार्ज होता है, वही सभी चीज़ों के लिए जिम्मेदार होता है — कोई कर्मचारी नहीं, बल्कि सर्वोच्च पदाधिकारी। उन्होंने कहा, 'एक पैसे की चोरी भी चोरी होती है। अब चोर ही चोर-चोर चिल्ला रहे हैं।'
शिला पूजन से अब तक का हिसाब
महंत धर्मदास ने आरोप लगाया कि शिला पूजन से लेकर अब तक ट्रस्ट के लोगों ने गोलमाल किया है। उन्होंने कहा, 'हमने राम जन्मभूमि सेवा समिति को दान दिया था, और हमसे बिना पूछे राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट बना दिया गया। इस ट्रस्ट ने अयोध्या के साधु-संतों के अधिकारों को छीनने का काम किया।' यह आरोप गंभीर है क्योंकि यह ट्रस्ट की संरचनात्मक वैधता पर ही सवाल उठाता है।
पुजारी रमेश दास और सरकार से अपेक्षा
हनुमानगढ़ी के पुजारी रमेश दास ने केंद्र और राज्य सरकार का धन्यवाद करते हुए कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट और जाँच के बाद जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'यही सही कदम है।'
स्वामी करपात्री जी महाराज की माँग
स्वामी करपात्री जी महाराज ने एफआईआर और एसआईटी जाँच दोनों पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा, 'मैं एफआईआर से संतुष्ट नहीं हूँ, क्योंकि मुख्य दोषियों को निशाना नहीं बनाया गया है। सिर्फ छोटे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। ऐसा लगता है कि बड़ी गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों को बचाया गया है।' करपात्री जी महाराज ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से माँग की कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच सुनिश्चित की जाए।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े दान-प्रबंधन को लेकर देशभर में जनता की नज़रें टिकी हुई हैं। संतों की एकजुट आवाज़ और एसआईटी जाँच पर उठे सवाल यह संकेत देते हैं कि यह मामला राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर और गहरा हो सकता है। अब सबकी निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।