26 जून 2026
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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: संत समाज ने मांगी निष्पक्ष जांच, बोले — मास्टरमाइंड तक पहुंचे पुलिस

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: संत समाज ने मांगी निष्पक्ष जांच, बोले — मास्टरमाइंड तक पहुंचे पुलिस

सारांश

राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं पर दर्ज एफआईआर के बाद संत समाज में आक्रोश है। वरुण दास महाराज, अनिरुद्ध देव दास, नरेंद्राचार्य और महंत देवेशाचार्य — सभी ने एक सुर में माँग की है कि जांच केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुँचे।

मुख्य बातें

राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं को लेकर ट्रस्ट के एक पदाधिकारी ने एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें 8 लोगों के नाम शामिल हैं।
वरुण दास महाराज ने कहा कि श्रद्धालुओं का दान आस्था का प्रतीक है और इसके दुरुपयोग का पूरा खुलासा होना चाहिए।
अनिरुद्ध देव दास ने पारदर्शिता की माँग करते हुए कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।
नरेंद्राचार्य महाराज ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) के सवालों की सराहना की और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जांच टीम गठित करने पर आभार जताया।
देवेशाचार्य महाराज ने कहा कि एफआईआर में देरी हुई और अब केवल छोटे कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई नाकाफी है — मास्टरमाइंड की पहचान जरूरी है।

अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं और दर्ज एफआईआर पर संत समाज में गहरा रोष व्याप्त है। 26 जून 2026 को विभिन्न संतों और आध्यात्मिक नेताओं ने एक स्वर में निष्पक्ष एवं त्वरित जांच की माँग करते हुए कहा कि असली मास्टरमाइंड तक पहुँचे बिना यह मामला अधूरा रहेगा। ट्रस्ट से जुड़े एक पदाधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई इस एफआईआर में आठ लोगों के नाम विभिन्न धाराओं के तहत शामिल हैं।

संतों की तीखी प्रतिक्रिया

वरुण दास महाराज ने कहा कि यह घटना समस्त राम भक्तों के हृदय को आहत करने वाली है। उन्होंने कहा, 'श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान केवल भौतिक वस्तु नहीं है, बल्कि आस्था और भावनाओं का प्रतीक है।' उनके अनुसार यदि किसी भी स्तर पर दान के दुरुपयोग की आशंका है, तो उसका पूरी तरह खुलासा होना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि पहले जांच की बात चल रही थी, किंतु शिकायत दर्ज नहीं हो पा रही थी — जबकि पूरे मामले में तेजी से कार्रवाई होनी चाहिए थी। अब उन्हें उम्मीद है कि जांच शीघ्र पूरी होगी और सभी तथ्य सार्वजनिक होंगे।

पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग

अनिरुद्ध देव दास ने कहा कि यह विषय पहले से ही चर्चा में था और कई लोग इसे अफवाह बताते रहे, किंतु एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले की गंभीरता स्पष्ट हो गई है। उन्होंने कहा, 'चंदे और दान से जुड़ी राशि की सुरक्षा और पारदर्शिता बेहद जरूरी है, क्योंकि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का विषय है।'

उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों से न केवल संस्थाओं की छवि प्रभावित होती है, बल्कि पूरे सनातन समाज की भावना आहत होती है। उनका स्पष्ट मत था कि जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए।

बड़े नेटवर्क की जांच की अपील

नरेंद्राचार्य महाराज ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) द्वारा उठाए गए सवालों की सराहना की और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया कि उन्होंने जांच के लिए टीम गठित की। उन्होंने कहा कि अभी भी कुछ बड़े लोगों की भूमिका पर सवाल बने हुए हैं और पूरी सच्चाई सामने आना बाकी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआती कार्रवाई में केवल छोटे स्तर के लोगों पर ध्यान दिया गया, जबकि असली जिम्मेदारों तक पहुँचना आवश्यक है। उनके अनुसार जब तक पूरे नेटवर्क की जांच नहीं होगी, इस तरह की घटनाएं पूरी तरह नहीं रुकेंगी।

देरी पर उठे सवाल

महंत डॉ. देवेशाचार्य महाराज ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अयोध्या के संत और भक्त लगातार एफआईआर की माँग करते रहे, लेकिन शुरुआत में कार्रवाई में देरी हुई। उन्होंने कहा कि यह एफआईआर तब दर्ज हुई जब विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों ने दबाव बनाया — हालाँकि उन्होंने इसे देर से सही, उचित कदम बताया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अब केवल छोटे स्तर के कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी — इस पूरे मामले के मास्टरमाइंड की पहचान जरूरी है। उनके अनुसार यह एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है, जिसकी जांच अत्यंत गंभीरता से की जानी चाहिए।

आगे क्या होगा

संतों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से अपेक्षा जताई है कि वे इस मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेंगे और दोषियों को सजा दिलाई जाएगी। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राम मंदिर के प्रति करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास दाँव पर है। जब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आती, भक्तों के मन में शंका बनी रहेगी — और संत समाज इस मुद्दे पर लगातार दबाव बनाए रखने के संकेत दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब तक यह जांच न्याय की जगह प्रबंधन की कवायद बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा विवाद क्या है?
राम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है, जिसके बाद ट्रस्ट के एक पदाधिकारी ने एफआईआर दर्ज कराई है। इस एफआईआर में विभिन्न धाराओं के तहत 8 लोगों के नाम शामिल हैं।
इस मामले में एफआईआर किसने और कब दर्ज कराई?
यह एफआईआर ट्रस्ट से जुड़े एक पदाधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई है। संतों के अनुसार विश्व हिंदू परिषद (VHP) जैसे संगठनों के दबाव के बाद 26 जून 2026 के आसपास यह कदम उठाया गया।
संत समाज की मुख्य माँग क्या है?
संत समाज की माँग है कि जांच केवल छोटे स्तर के कर्मचारियों तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड की पहचान की जाए। वे चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार निष्पक्ष और त्वरित जांच सुनिश्चित करे।
क्या उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले में कोई कदम उठाया है?
नरेंद्राचार्य महाराज के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच के लिए एक टीम गठित की है। हालाँकि संतों का कहना है कि अभी तक बड़े जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई है।
इस विवाद का आम श्रद्धालुओं पर क्या असर है?
संतों का कहना है कि यह मामला करोड़ों राम भक्तों की आस्था से जुड़ा है, क्योंकि चढ़ावे की राशि केवल धन नहीं बल्कि भावनाओं और श्रद्धा का प्रतीक है। जब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आती, भक्तों के मन में शंका बनी रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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