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राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी: करपात्री महाराज बोले — एसआईटी जांच अधूरी, CM योगी करें निष्पक्ष कार्रवाई

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राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी: करपात्री महाराज बोले — एसआईटी जांच अधूरी, CM योगी करें निष्पक्ष कार्रवाई

सारांश

राम मंदिर दान हेराफेरी मामले में एसआईटी जांच पर करपात्री महाराज ने सवाल उठाए हैं — उनका आरोप है कि बड़े आरोपी बचाए जा रहे हैं। उन्होंने CM योगी से निष्पक्ष जांच और गंभीर आरोपियों को तत्काल पद से हटाने की मांग की है।

मुख्य बातें

धार्मिक नेता करपात्री महाराज ने 26 जून 2026 को राम मंदिर दान हेराफेरी मामले में एसआईटी जांच पर असंतोष जताया।
उनका आरोप है कि मुख्य आरोपियों को बचाया जा रहा है और केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई हो रही है।
VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा संगठन में 'कैंसर जैसी समस्या' की पहचान के बाद एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
करपात्री महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग की।
गंभीर आरोपियों को जांच पूरी होने तक तत्काल पद से हटाने और नई एफआईआर दर्ज करने की भी मांग की गई।

अयोध्या के राम मंदिर में दान की कथित हेराफेरी से जुड़े मामले में दर्ज एफआईआर और चल रही एसआईटी जांच पर धार्मिक नेता एवं आध्यात्मिक वक्ता करपात्री महाराज ने 26 जून 2026 को गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि अब तक की जांच में मुख्य आरोपियों को बचाया जा रहा है, जबकि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है।

मुख्य आरोप और जांच पर सवाल

करपात्री महाराज के अनुसार, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष को जब संगठन के भीतर 'कैंसर जैसी समस्या' की जानकारी मिली, तभी उसे जड़ से खत्म करने के इरादे से एफआईआर दर्ज कराई गई थी। उन्होंने कहा कि एफआईआर का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और वास्तविक दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईटी की जांच में उन लोगों को बचाने की कोशिश हो रही है जो कथित तौर पर बड़ी गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार हैं। उनके अनुसार, यदि केवल छोटे पदाधिकारियों पर कार्रवाई होगी और प्रभावशाली व्यक्तियों को छोड़ दिया जाएगा, तो मामले की सच्चाई कभी सामने नहीं आ पाएगी।

CM योगी से निष्पक्ष जांच की मांग

करपात्री महाराज ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस पूरे मामले की व्यापक और निष्पक्ष जांच कराने की सीधी मांग की। उन्होंने कहा कि बिना किसी दबाव या पक्षपात के सभी आरोपियों की भूमिका की पड़ताल होनी चाहिए, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो।

गंभीर आरोपियों को पद से हटाने की मांग

उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों पर गंभीर आरोप हैं, उन्हें जांच पूरी होने तक संबंधित पदों से तत्काल हटाया जाना चाहिए। साथ ही, उनके खिलाफ नई एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर से जुड़े प्रशासनिक मामले पहले से ही सार्वजनिक बहस के केंद्र में हैं।

जनता के विश्वास की बहाली पर जोर

करपात्री महाराज ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार पूरे मामले का निष्पक्ष खुलासा करना चाहती है तो किसी भी आरोपी का नाम दबाए बिना कार्रवाई करनी होगी। उनका मानना है कि तभी राम मंदिर दान से जुड़े इस कथित हेराफेरी मामले में जनता का विश्वास बहाल हो सकेगा और दोषियों को उचित सजा मिल सकेगी। गौरतलब है कि देश के सबसे संवेदनशील धार्मिक स्थलों में से एक से जुड़े इस मामले पर देशभर के श्रद्धालुओं की नजर टिकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

एसआईटी की निष्पक्षता पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न है जिसे सरकार नजरअंदाज नहीं कर सकती। यह ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब राम मंदिर देश की धार्मिक और राजनीतिक पहचान का केंद्र बन चुका है। बिना पारदर्शी और स्वतंत्र जांच के, यह मामला न केवल न्यायिक विश्वसनीयता को कमज़ोर करेगा, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को भी ठेस पहुँचाएगा।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर दान हेराफेरी मामला क्या है?
यह अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी से जुड़ा मामला है, जिसमें एफआईआर दर्ज की गई है और एसआईटी जांच चल रही है। VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा संगठन के भीतर गड़बड़ी की पहचान के बाद यह मामला सामने आया था।
करपात्री महाराज ने एसआईटी जांच पर क्या आपत्ति जताई?
करपात्री महाराज का कहना है कि एसआईटी जांच में मुख्य आरोपियों को बचाया जा रहा है और केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई हो रही है। उनके अनुसार इस तरह की जांच से मामले की सच्चाई कभी सामने नहीं आ सकती।
करपात्री महाराज ने CM योगी से क्या मांग की है?
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बिना किसी दबाव या पक्षपात के सभी आरोपियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही, गंभीर आरोपियों को जांच पूरी होने तक तत्काल पद से हटाने और नई एफआईआर दर्ज करने की भी अपील की है।
इस मामले में VHP की क्या भूमिका है?
करपात्री महाराज के अनुसार, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष को संगठन के भीतर 'कैंसर जैसी समस्या' की जानकारी मिलने पर ही एफआईआर दर्ज कराई गई थी। VHP का लक्ष्य इस गड़बड़ी को समाप्त करना था, लेकिन जांच की दिशा पर सवाल उठ रहे हैं।
इस मामले में आगे क्या होने की उम्मीद है?
करपात्री महाराज की मांग के बाद अब यह देखना होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार एसआईटी जांच की दिशा पर पुनर्विचार करती है या नहीं। यदि सरकार निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करती है, तो मुख्य आरोपियों के खिलाफ नई एफआईआर और पद से हटाने की कार्रवाई हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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