10 अगस्त 2026
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अभिषेक बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, सितंबर में तीन सप्ताह विदेश में आँखों का इलाज कराने की सशर्त अनुमति

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अभिषेक बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, सितंबर में तीन सप्ताह विदेश में आँखों का इलाज कराने की सशर्त अनुमति

सारांश

कलकत्ता उच्च न्यायालय की अस्वीकृति के बाद TMC सांसद अभिषेक बनर्जी को सर्वोच्च न्यायालय से राहत मिली है — सितंबर में तीन सप्ताह विदेश में आँखों का इलाज कराने की सशर्त अनुमति। शर्त यह है कि यात्रा, ठहरने और अस्पताल का पूरा विवरण पहले अदालत को देना होगा।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 10 अगस्त को TMC सांसद अभिषेक बनर्जी को सितंबर में तीन सप्ताह विदेश में आँखों का इलाज कराने की सशर्त अनुमति दी।
अनुमति की शर्त: यात्रा से पहले उड़ान विवरण , ठहरने का स्थान और इलाज करने वाले चिकित्सक/अस्पताल की जानकारी अदालत को देनी होगी।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पहले याचिका खारिज की थी और एसएसकेएम अस्पताल, कोलकाता के विशेषज्ञों से परामर्श की सलाह दी थी।
उच्च न्यायालय ने बनर्जी के मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित न होने की स्थिति में याचिका खारिज की थी।
अभिषेक बनर्जी पर कई आपराधिक मामले लंबित हैं और जाँच जारी है।

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार, 10 अगस्त को तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी को आँखों के इलाज के लिए सितंबर माह में तीन सप्ताह विदेश यात्रा करने की सशर्त अनुमति प्रदान की। यह राहत ऐसे समय मिली है जब कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हाल ही में उनकी इसी माँग को खारिज कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट की शर्तें और निर्देश

सर्वोच्च न्यायालय ने अनुमति देते हुए स्पष्ट किया कि अभिषेक बनर्जी को विदेश रवाना होने से पहले अपनी यात्रा की सम्पूर्ण रूपरेखा प्रस्तुत करनी होगी। इसमें उड़ान का विवरण, ठहरने का स्थान तथा इलाज करने वाले अस्पताल या चिकित्सक की पूरी जानकारी शामिल है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि प्रत्येक नागरिक को विदेश यात्रा और अपनी पसंद का चिकित्सा उपचार कराने का मौलिक अधिकार प्राप्त है।

बनर्जी पक्ष की दलील

अभिषेक बनर्जी के अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि उनके मुवक्किल जाँच प्रक्रिया में पहले ही शामिल हो चुके हैं और विदेश प्रवास के दौरान भी अदालत द्वारा निर्धारित समस्त शर्तों का पालन करने को तत्पर हैं। अदालत ने इन परिस्थितियों पर विचार करते हुए सितंबर में तीन सप्ताह की यात्रा को मंजूरी दी।

कलकत्ता उच्च न्यायालय का पूर्व निर्णय

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इससे पहले अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा की अर्जी अस्वीकार करते हुए सलाह दी थी कि वे कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम अस्पताल के विशेषज्ञों से परामर्श लें। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया था कि बनर्जी पर कई आपराधिक मामले लंबित हैं और उनकी जाँच अभी जारी है, जिसे इलाज के विकल्प पर विचार करते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।

उच्च न्यायालय ने बनर्जी को मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया था, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया। इस आधार पर उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा था कि 'आवेदक के वकील की दलील को देखते हुए कि वह कोर्ट के निर्देशानुसार मेडिकल बोर्ड के सामने पेश नहीं होंगे, मौजूदा याचिका खारिज की जाती है।'

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति के बाद अब अभिषेक बनर्जी को निर्धारित शर्तों के अनुसार यात्रा विवरण अदालत में दाखिल करना होगा। गौरतलब है कि यह मामला न केवल एक सांसद की चिकित्सा आवश्यकता से जुड़ा है, बल्कि लंबित आपराधिक जाँच के बीच व्यक्तिगत स्वतंत्रता और न्यायिक निगरानी के संतुलन का भी उदाहरण है। आने वाले हफ्तों में अदालत में प्रस्तुत यात्रा विवरण और उसकी स्वीकृति इस प्रकरण की अगली कड़ी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह अंतर यह भी दर्शाता है कि उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय के बीच विवेकाधिकार के प्रयोग में स्पष्ट फर्क बना हुआ है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या निर्धारित शर्तों का पालन वास्तव में सुनिश्चित हो पाता है, और क्या यह मिसाल भविष्य में लंबित मामलों वाले अन्य आरोपियों के लिए एक नज़ीर बनती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को विदेश जाने की अनुमति क्यों दी?
सर्वोच्च न्यायालय ने आँखों के इलाज की चिकित्सा आवश्यकता और इस तथ्य को देखते हुए अनुमति दी कि बनर्जी जाँच में पहले ही शामिल हो चुके हैं। अदालत ने यह भी कहा कि प्रत्येक नागरिक को विदेश यात्रा और अपनी पसंद का इलाज कराने का अधिकार है।
अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा की क्या शर्तें हैं?
सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि यात्रा से पहले उड़ान का पूरा विवरण, ठहरने का स्थान और इलाज करने वाले अस्पताल या चिकित्सक की जानकारी अदालत में प्रस्तुत करनी होगी। इन शर्तों के पालन के बाद ही सितंबर में तीन सप्ताह की यात्रा संभव होगी।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की याचिका क्यों खारिज की थी?
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने याचिका इसलिए खारिज की क्योंकि बनर्जी ने अदालत के निर्देश पर मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होने से इनकार कर दिया था। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि उन पर लंबित आपराधिक मामलों को इलाज के विकल्प पर विचार करते समय ध्यान में रखना जरूरी है।
अभिषेक बनर्जी पर कौन-से मामले चल रहे हैं?
स्रोत के अनुसार अभिषेक बनर्जी पर कई आपराधिक मामले लंबित हैं और उनकी जाँच अभी जारी है। हालाँकि मामलों का विशिष्ट विवरण अदालती आदेश में उल्लिखित नहीं किया गया है।
अभिषेक बनर्जी सितंबर में कब और कितने समय के लिए विदेश जाएँगे?
सर्वोच्च न्यायालय ने सितंबर माह में तीन सप्ताह की विदेश यात्रा की अनुमति दी है। यात्रा की सटीक तारीखें अदालत में विवरण प्रस्तुत करने के बाद तय होंगी।
राष्ट्र प्रेस
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