अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा याचिका: कलकत्ता हाईकोर्ट ने दूसरी बार त्वरित सुनवाई से किया इनकार
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को 29 जून 2026 को कलकत्ता उच्च न्यायालय से एक और झटका लगा, जब न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य की एकल पीठ ने उनकी आँखों के इलाज हेतु विदेश यात्रा की अनुमति संबंधी याचिका पर त्वरित सुनवाई की माँग को दूसरी बार अस्वीकार कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई निर्धारित समय-सारणी के अनुसार ही होगी।
याचिका की पृष्ठभूमि
23 जून 2026 को अभिषेक बनर्जी ने न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की एकल पीठ में याचिका दायर कर सात दिनों की विदेश यात्रा की अनुमति माँगी थी — उद्देश्य आँखों का चिकित्सीय उपचार। याचिका के साथ मामले की शीघ्र सुनवाई की भी अपील की गई थी। 24 जून को पीठ ने पहली बार त्वरित सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था कि ऐसा करने का कोई पर्याप्त कारण नहीं है।
29 जून को अभिषेक के वकील ने पुनः उसी पीठ के समक्ष त्वरित सुनवाई की अर्जी दी, किंतु न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने इसे फिर खारिज कर दिया।
न्यायालय की अंतरिम सुरक्षा और शर्तें
यह मामला हस्ताक्षर मिलान विवाद से जुड़ा है, जिसमें पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्षी पदों पर नियुक्तियों से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर TMC के कुछ विधायकों के हस्ताक्षर जाली होने के आरोप लगे हैं। इस मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस के आपराधिक जाँच विभाग (CID) ने कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक अन्य एकल पीठ के आदेश के बाद अभिषेक से दो बार पूछताछ की।
इसके बाद न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की एकल पीठ ने अभिषेक को गिरफ्तारी सहित पुलिस की जबरदस्ती कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। हालाँकि, इस सुरक्षा के साथ एक प्रमुख शर्त यह लगाई गई कि वे न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं कर सकते। इसी शर्त के कारण उन्हें याचिका दायर करनी पड़ी।
आँखों की चोट का इतिहास
अक्टूबर 2016 में अभिषेक बनर्जी मुर्शिदाबाद जिले में एक पार्टी कार्यक्रम से कोलकाता लौटते समय एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। उस हादसे में उनकी आँख में गंभीर चोटें आई थीं। उन्होंने देश के कई अस्पतालों में उपचार कराया और बाद में विदेश में भी इलाज करवाया था।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि अभिषेक बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं और TMC के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल पर कई कानूनी और प्रशासनिक मोर्चों पर दबाव बना हुआ है। न्यायालय की अगली निर्धारित सुनवाई में याचिका पर सुनवाई होने की संभावना है।