कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की फास्ट-ट्रैक सुनवाई अर्जी खारिज की, विदेश यात्रा याचिका पर सामान्य प्रक्रिया जारी
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल-न्यायाधीश पीठ ने बुधवार, 24 जून 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और डायमंड हार्बर लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने आँखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति माँगने वाली याचिका पर फास्ट-ट्रैक सुनवाई की माँग की थी। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस मामले में त्वरित सुनवाई का कोई पर्याप्त आधार नहीं है और सुनवाई सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगी।
मामले की पृष्ठभूमि
मंगलवार, 23 जून को अभिषेक बनर्जी ने न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की एकल-न्यायाधीश पीठ के समक्ष दो अर्जियाँ दायर कीं — एक आँखों के उपचार हेतु विदेश यात्रा की न्यायिक अनुमति के लिए, और दूसरी इस मामले की फास्ट-ट्रैक सुनवाई के लिए। बुधवार को पीठ ने मुख्य याचिका स्वीकार कर ली, किंतु त्वरित सुनवाई की अर्जी यह कहते हुए अस्वीकार कर दी कि इसके लिए कोई विशेष परिस्थिति नहीं है।
गौरतलब है कि अक्टूबर 2016 में मुर्शिदाबाद जिले में पार्टी के एक कार्यक्रम से कोलकाता लौटते समय अभिषेक बनर्जी एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसमें उनकी आँख में गंभीर चोटें आई थीं। उन्होंने तब देश के कई अस्पतालों में उपचार कराया था और बाद में विदेश में भी इलाज करवाया था।
कोर्ट की पाबंदी का संदर्भ
यह याचिका इसलिए आवश्यक हो गई क्योंकि कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक अन्य एकल-न्यायाधीश पीठ — न्यायमूर्ति कौशिक चंदा — ने पहले अभिषेक बनर्जी को पुलिस की कठोर कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी। हालाँकि, यह सुरक्षा कुछ शर्तों के साथ दी गई थी, जिनमें एक प्रमुख शर्त यह थी कि वे न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं कर सकते। इसी शर्त के कारण उन्हें विदेश जाने से पहले अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा।
विधायक हस्ताक्षर विवाद और जाँच
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के लिए आरक्षित सीटों पर नियुक्तियों से जुड़ा एक विवादित प्रस्ताव है। आरोप है कि इस प्रस्ताव पर तृणमूल कांग्रेस के कुछ विधायकों के हस्ताक्षर मेल नहीं खाते। इस मामले की जाँच पश्चिम बंगाल पुलिस के अपराध अन्वेषण विभाग (CID) द्वारा की जा रही है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद CID ने अभिषेक बनर्जी से इस सिलसिले में दो बार पूछताछ कर चुकी है।
अब आगे क्या
विदेश यात्रा की अनुमति माँगने वाली मुख्य याचिका अब न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष सामान्य सूची में सूचीबद्ध है और इसकी सुनवाई नियमित न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगी। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि अदालत इस याचिका पर कब सुनवाई करती है और क्या वह चिकित्सा आधार पर यात्रा की अनुमति देती है। इस बीच, CID की जाँच और न्यायमूर्ति चंदा द्वारा लगाई गई शर्तें यथावत् बनी रहेंगी।