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कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की फास्ट-ट्रैक सुनवाई अर्जी खारिज की, विदेश यात्रा याचिका पर सामान्य प्रक्रिया जारी

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की फास्ट-ट्रैक सुनवाई अर्जी खारिज की, विदेश यात्रा याचिका पर सामान्य प्रक्रिया जारी

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की फास्ट-ट्रैक सुनवाई अर्जी खारिज कर दी। आँखों के इलाज के लिए विदेश जाने की उनकी मुख्य याचिका स्वीकार हुई, पर सुनवाई सामान्य प्रक्रिया से होगी। विधायक हस्ताक्षर विवाद में CID जाँच और यात्रा-पाबंदी की शर्त अभी भी जारी है।

मुख्य बातें

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने 24 जून को अभिषेक बनर्जी की फास्ट-ट्रैक सुनवाई अर्जी खारिज की।
आँखों के इलाज हेतु विदेश यात्रा की मुख्य याचिका स्वीकार की गई; सुनवाई सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी।
न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की पीठ ने पहले अंतरिम सुरक्षा देते हुए शर्त लगाई थी कि बनर्जी कोर्ट की अनुमति के बिना विदेश नहीं जा सकते ।
पश्चिम बंगाल CID विधानसभा में विपक्षी सीटों की नियुक्तियों से जुड़े विधायक हस्ताक्षर मेल न खाने के मामले में बनर्जी से दो बार पूछताछ कर चुकी है।
अक्टूबर 2016 की सड़क दुर्घटना में आँख में लगी गंभीर चोट के बाद से बनर्जी का उपचार जारी है।

कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल-न्यायाधीश पीठ ने बुधवार, 24 जून 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और डायमंड हार्बर लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने आँखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति माँगने वाली याचिका पर फास्ट-ट्रैक सुनवाई की माँग की थी। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस मामले में त्वरित सुनवाई का कोई पर्याप्त आधार नहीं है और सुनवाई सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगी।

मामले की पृष्ठभूमि

मंगलवार, 23 जून को अभिषेक बनर्जी ने न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की एकल-न्यायाधीश पीठ के समक्ष दो अर्जियाँ दायर कीं — एक आँखों के उपचार हेतु विदेश यात्रा की न्यायिक अनुमति के लिए, और दूसरी इस मामले की फास्ट-ट्रैक सुनवाई के लिए। बुधवार को पीठ ने मुख्य याचिका स्वीकार कर ली, किंतु त्वरित सुनवाई की अर्जी यह कहते हुए अस्वीकार कर दी कि इसके लिए कोई विशेष परिस्थिति नहीं है।

गौरतलब है कि अक्टूबर 2016 में मुर्शिदाबाद जिले में पार्टी के एक कार्यक्रम से कोलकाता लौटते समय अभिषेक बनर्जी एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसमें उनकी आँख में गंभीर चोटें आई थीं। उन्होंने तब देश के कई अस्पतालों में उपचार कराया था और बाद में विदेश में भी इलाज करवाया था।

कोर्ट की पाबंदी का संदर्भ

यह याचिका इसलिए आवश्यक हो गई क्योंकि कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक अन्य एकल-न्यायाधीश पीठ — न्यायमूर्ति कौशिक चंदा — ने पहले अभिषेक बनर्जी को पुलिस की कठोर कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी। हालाँकि, यह सुरक्षा कुछ शर्तों के साथ दी गई थी, जिनमें एक प्रमुख शर्त यह थी कि वे न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं कर सकते। इसी शर्त के कारण उन्हें विदेश जाने से पहले अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा।

विधायक हस्ताक्षर विवाद और जाँच

इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के लिए आरक्षित सीटों पर नियुक्तियों से जुड़ा एक विवादित प्रस्ताव है। आरोप है कि इस प्रस्ताव पर तृणमूल कांग्रेस के कुछ विधायकों के हस्ताक्षर मेल नहीं खाते। इस मामले की जाँच पश्चिम बंगाल पुलिस के अपराध अन्वेषण विभाग (CID) द्वारा की जा रही है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद CID ने अभिषेक बनर्जी से इस सिलसिले में दो बार पूछताछ कर चुकी है।

अब आगे क्या

विदेश यात्रा की अनुमति माँगने वाली मुख्य याचिका अब न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष सामान्य सूची में सूचीबद्ध है और इसकी सुनवाई नियमित न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगी। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि अदालत इस याचिका पर कब सुनवाई करती है और क्या वह चिकित्सा आधार पर यात्रा की अनुमति देती है। इस बीच, CID की जाँच और न्यायमूर्ति चंदा द्वारा लगाई गई शर्तें यथावत् बनी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके निहितार्थ व्यापक हैं — यह स्पष्ट करता है कि अदालतें राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में भी प्रक्रियागत समानता से समझौता नहीं करेंगी। विधायक हस्ताक्षर विवाद और CID जाँच के साथ-साथ यात्रा-पाबंदी की शर्त अभिषेक बनर्जी पर एक साथ कई दबाव बनाती है। मुख्यधारा की कवरेज इसे महज़ एक कानूनी घटनाक्रम के रूप में देख रही है, जबकि असली सवाल यह है कि क्या चिकित्सा आधार पर दायर याचिका को सामान्य सूची में रखना न्यायोचित है, जब मामला स्वास्थ्य से जुड़ा हो।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की फास्ट-ट्रैक सुनवाई अर्जी क्यों खारिज की?
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने कहा कि त्वरित सुनवाई के लिए कोई पर्याप्त विशेष परिस्थिति नहीं है और मामला सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत सुना जाएगा। विदेश यात्रा की मुख्य याचिका स्वीकार कर ली गई है, केवल फास्ट-ट्रैक अर्जी अस्वीकार हुई है।
अभिषेक बनर्जी को विदेश यात्रा के लिए कोर्ट की अनुमति क्यों लेनी पड़ रही है?
न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की पीठ ने पहले अभिषेक बनर्जी को पुलिस कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी थी, लेकिन शर्त रखी थी कि वे न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना विदेश नहीं जा सकते। इसी शर्त के कारण उन्हें आँखों के इलाज के लिए विदेश जाने से पहले अदालत से अनुमति माँगनी पड़ रही है।
विधायक हस्ताक्षर विवाद क्या है, जिसमें अभिषेक बनर्जी से पूछताछ हुई?
यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के लिए आरक्षित कुछ सीटों पर नियुक्तियों से जुड़े एक प्रस्ताव पर TMC विधायकों के हस्ताक्षर मेल न खाने से संबंधित है। पश्चिम बंगाल पुलिस के CID ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर अभिषेक बनर्जी से इस सिलसिले में दो बार पूछताछ की है।
अभिषेक बनर्जी की आँखों की समस्या कब से है?
अक्टूबर 2016 में मुर्शिदाबाद जिले में एक पार्टी कार्यक्रम से कोलकाता लौटते समय हुई सड़क दुर्घटना में उनकी आँख में गंभीर चोटें आई थीं। तब से वे देश के कई अस्पतालों के साथ-साथ विदेश में भी उपचार करा चुके हैं।
अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा याचिका पर आगे क्या होगा?
मुख्य याचिका न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष सामान्य सूची में सूचीबद्ध है और नियमित प्रक्रिया के अनुसार सुनवाई होगी। जब तक अदालत कोई निर्णय नहीं देती, यात्रा-पाबंदी की शर्त यथावत् लागू रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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