5 अगस्त 2026
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अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा याचिका पर आज कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 7 दिन की समयसीमा

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अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा याचिका पर आज कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 7 दिन की समयसीमा

सारांश

सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने मामला वापस भेजा, 7 दिन में फैसले का निर्देश दिया — और अब कलकत्ता हाईकोर्ट आज तय करेगा कि TMC सांसद अभिषेक बनर्जी को आँखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मिलेगी या नहीं। 2016 की सड़क दुर्घटना से शुरू हुई यह कानूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य 5 अगस्त, बुधवार को सुबह 11 बजे अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा याचिका पर सुनवाई करेंगे।
पिछले महीने इसी पीठ ने याचिका खारिज कर एसएसकेएम अस्पताल से परामर्श और मेडिकल रिपोर्ट पेश करने को कहा था।
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने मामला वापस कलकत्ता हाईकोर्ट भेजा और 7 दिनों में फैसले का निर्देश दिया।
20 जुलाई को अदालत ने कथित हेट स्पीच मामले में बनर्जी को अक्टूबर तक गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी।
बनर्जी की आँख में चोट अक्टूबर 2016 में मुर्शिदाबाद में एक सड़क दुर्घटना के दौरान आई थी।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी की आँखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति संबंधी याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ बुधवार, 5 अगस्त को सुनवाई करेगी। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने यह सुनवाई सुबह 11 बजे निर्धारित की है — और यह सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्देश के बाद हो रही है, जिसमें हाईकोर्ट को सात दिनों के भीतर फैसला सुनाने को कहा गया है।

मामले का पूरा घटनाक्रम

इसी पीठ ने पिछले महीने अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा की याचिका खारिज करते हुए उन्हें पहले कोलकाता स्थित सरकारी एसएसकेएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञों से परामर्श लेने की सलाह दी थी। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया था कि एसएसकेएम की मेडिकल रिपोर्ट मिलने के बाद ही अदालत आगे कोई निर्णय लेगी।

इसके बाद बनर्जी ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। हालाँकि, भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वेंकटा सुब्रमणि मोहन की तीन सदस्यीय पीठ ने पिछले सप्ताह इस मामले को वापस कलकत्ता हाईकोर्ट को सौंप दिया और सात दिनों में सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया।

20 जुलाई की सुनवाई में क्या हुआ था

20 जुलाई को हुई पिछली सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने यह भी पूछा था कि क्या अभिषेक बनर्जी ने किसी नेत्र रोग विशेषज्ञ से बाकायदा परामर्श लिया है। उसी दिन अदालत ने कथित हेट स्पीच मामले में बनर्जी को अक्टूबर तक गिरफ्तारी सहित किसी भी कठोर पुलिस कार्रवाई से अंतरिम राहत प्रदान की थी।

इस हेट स्पीच मामले में आरोप है कि बनर्जी ने हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले एक चुनावी रैली में हिंसा भड़काने वाले बयान दिए और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी दी। अदालत ने बनर्जी को जाँच में पुलिस का सहयोग करने का निर्देश भी दिया था, और राज्य की आपराधिक जाँच विभाग (CID) को जाँच शीघ्र पूरी करने को कहा था।

आँख की चोट की पृष्ठभूमि

उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2016 में मुर्शिदाबाद जिले में एक पार्टी कार्यक्रम से कोलकाता लौटते समय अभिषेक बनर्जी एक सड़क दुर्घटना के शिकार हुए थे, जिसमें उनकी आँख में गंभीर चोट आई थी। प्रारंभ में उन्होंने देश के कई अस्पतालों में इलाज कराया और बाद में बेहतर उपचार के लिए विदेश भी गए। यह याचिका उसी चोट के निरंतर उपचार से जुड़ी है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय की समयसीमा को देखते हुए न्यायमूर्ति भट्टाचार्य को इस सप्ताह के भीतर अपना आदेश सुनाना होगा। यह सुनवाई तय करेगी कि अभिषेक बनर्जी को विदेश में नेत्र चिकित्सा की अनुमति मिलती है या नहीं — और साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि एसएसकेएम की मेडिकल रिपोर्ट अदालत की शर्तों को पूरा करती है अथवा नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी परतें गहरी हैं — एक सत्तारूढ़ राज्य पार्टी के शीर्ष नेता और न्यायपालिका के बीच की यह खींचतान पश्चिम बंगाल की राजनीति का प्रतिबिंब है। सुप्रीम कोर्ट का मामला वापस भेजना और सात दिन की समयसीमा देना इस बात का संकेत है कि शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट को पहले अपनी शर्तें पूरी करवाने का अवसर दिया है। साथ ही, हेट स्पीच मामले में अंतरिम राहत और विदेश यात्रा याचिका का एक साथ चलना यह सवाल उठाता है कि न्यायिक प्रक्रिया और राजनीतिक दबाव के बीच की रेखा कहाँ खींची जाए।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी की कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका किस बारे में है?
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने आँखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति माँगी है। यह याचिका अक्टूबर 2016 में मुर्शिदाबाद में हुई एक सड़क दुर्घटना से जुड़ी है, जिसमें उनकी आँख में गंभीर चोट आई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या कहा?
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वेंकटा सुब्रमणि मोहन की तीन सदस्यीय पीठ ने पिछले सप्ताह इस मामले को वापस कलकत्ता हाईकोर्ट भेज दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट को सात दिनों के भीतर फैसला सुनाने का निर्देश दिया।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पहले याचिका क्यों खारिज की थी?
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने याचिका खारिज करते हुए अभिषेक बनर्जी को पहले कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञों से परामर्श लेने और उस रिपोर्ट को अदालत में पेश करने को कहा था। अदालत ने कहा था कि रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।
अभिषेक बनर्जी पर हेट स्पीच का क्या मामला है?
बनर्जी पर आरोप है कि उन्होंने हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले एक चुनावी रैली में हिंसा भड़काने वाले बयान दिए और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी दी। 20 जुलाई को न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने इस मामले में उन्हें अक्टूबर तक गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी।
आज की सुनवाई के बाद क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट की सात दिन की समयसीमा के अनुसार न्यायमूर्ति भट्टाचार्य को इस सप्ताह के भीतर आदेश सुनाना होगा। अदालत का फैसला तय करेगा कि अभिषेक बनर्जी को विदेश में नेत्र चिकित्सा की अनुमति मिलती है या नहीं, और एसएसकेएम की मेडिकल रिपोर्ट न्यायिक शर्तों को पूरा करती है या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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