अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट का झटका, विदेश इलाज की याचिका खारिज; 16 FIR मामले में 7 अगस्त को सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी को 5 जुलाई 2026 को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा, जब अदालत ने आँखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति माँगने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने यह फैसला तब सुनाया जब बनर्जी के वकील ने अदालत के उस सुझाव को मानने से इनकार कर दिया, जिसमें एसएसकेएम अस्पताल के मेडिकल बोर्ड से उनकी आँखों की जाँच कराने को कहा गया था।
मुख्य घटनाक्रम
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शुरुआत में यह जानने के लिए कि क्या भारत में ही इलाज संभव है, एसएसकेएम अस्पताल के मेडिकल बोर्ड से जाँच का सुझाव दिया था और बोर्ड को 7 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। अदालत का इरादा था कि रिपोर्ट के आधार पर विदेश यात्रा की ज़रूरत तय की जाए।
हालाँकि, अभिषेक बनर्जी के वकील ने मेडिकल बोर्ड के समक्ष पेश होने से साफ़ इनकार कर दिया। इस पर अदालत ने अपने आदेश में कहा, 'आवेदक के वकील की दलील को देखते हुए कि वह कोर्ट के निर्देशानुसार मेडिकल बोर्ड के सामने पेश नहीं होंगे, कोर्ट का मानना है कि याचिका दायर करके उठाए गए मुद्दे को और अधिक समय तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। इसलिए, मौजूदा याचिका खारिज की जाती है।'
आपराधिक मामलों की पृष्ठभूमि
4 मई 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत और राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गईं। इनमें चुनाव प्रचार के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ बयान देने से संबंधित मामले भी शामिल हैं। कुल मिलाकर उनके खिलाफ 16 एफआईआर दर्ज हैं और इन मामलों की जाँच अभी जारी है।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने विदेश यात्रा की अनुमति पर विचार करते समय यह भी ध्यान में रखा कि बनर्जी पर कई आपराधिक मामले लंबित हैं। बनर्जी ने इन मामलों को रद्द करने के लिए याचिकाएँ दायर की हैं और कई मामलों में उन्हें अंतरिम राहत भी मिली है।
आगे क्या होगा
मुख्य मामला — जिसमें 16 एफआईआर और ब्लैंकेट प्रोटेक्शन की अपील शामिल है — अब 7 अगस्त 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। यह सुनवाई इस दृष्टि से अहम होगी कि बनर्जी को किन मामलों में राहत मिलती है और किन में नहीं।
राजनीतिक संदर्भ
अभिषेक बनर्जी TMC की युवा इकाई के प्रमुख चेहरे रहे हैं और पश्चिम बंगाल में पार्टी के दूसरे सबसे बड़े नेता माने जाते हैं। BJP के सत्ता में आने के बाद राज्य में TMC नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाइयों की यह एक लंबी श्रृंखला का हिस्सा है। आलोचकों का कहना है कि ये मामले राजनीति से प्रेरित हैं, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष इन्हें कानूनी प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा बताता है।
7 अगस्त की सुनवाई तय करेगी कि अभिषेक बनर्जी को इन मामलों में व्यापक राहत मिलती है या नहीं — और यह पश्चिम बंगाल की नई राजनीतिक परिस्थितियों में न्यायपालिका की भूमिका का एक अहम पड़ाव होगा।