आईबीईटी 2026 का समापन: उत्तर प्रदेश में ₹15,000 करोड़ के बायोएनर्जी निवेश वादे, ग्रीन हब के रूप में नई पहचान
सारांश
मुख्य बातें
गौतमबुद्धनगर में आयोजित तीन दिवसीय इंडिया बायोएनर्जी एंड टेक एक्सपो (आईबीईटी) 2026 का 14 अगस्त 2026 को समापन हुआ, जिसमें बायोएनर्जी क्षेत्र में ₹15,000 करोड़ के अनुमानित निवेश वादों और समझौता ज्ञापनों (MoU) ने उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख ग्रीन एनर्जी निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी और उत्तर प्रदेश न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (UPNEDA) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस एक्सपो ने राज्य की बायोएनर्जी महत्वाकांक्षाओं को नई ऊर्जा दी है।
मुख्य घटनाक्रम
तीन दिनों तक चले इस एक्सपो में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG), इथेनॉल, बायोमास, बायोडीजल, वेस्ट-टू-एनर्जी, बायो-मोबिलिटी, बायोमटीरियल्स और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) जैसे क्षेत्रों में निवेश एवं तकनीकी संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। केंद्र और राज्य सरकार के नीति-निर्माताओं, निवेशकों, तकनीकी कंपनियों, उद्यमियों तथा उद्योग विशेषज्ञों ने इसमें भाग लिया।
एक्सपो के अंतिम दिन 'किसानों के लिए ग्रीन एनर्जी और आय के अवसर' विषय पर विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें कृषि अवशेषों को ऊर्जा में परिवर्तित कर किसानों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करने पर जोर दिया गया।
सरकार की प्रतिबद्धता
उत्तर प्रदेश के ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री ए.के. शर्मा ने किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण रोजगार सृजन और कृषि कचरे को आर्थिक संपत्ति में बदलने में CBG की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित किया। राज्य सरकार ने बायोएनर्जी क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि उत्तर प्रदेश के CBG सेक्टर में अब तक लगभग ₹3,500 करोड़ का निवेश हो चुका है और इससे करीब 25,000 रोजगार सृजित हुए हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आने वाले समय में प्रदेश में 70 से 80 और CBG प्लांट स्थापित किए जाने की संभावना है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी के महानिदेशक संजय गंजू ने कहा कि भारत में बायोएनर्जी का अवसर अब केवल नीतिगत लक्ष्यों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वास्तविक निवेश और कारोबार का एक बड़ा क्षेत्र बन चुका है। उनके अनुसार अगले चरण में परियोजनाओं का विस्तार, फीडस्टॉक सप्लाई चेन को मजबूत करना, किसानों को वैल्यू चेन से जोड़ना और बैंक-वित्तपोषण योग्य व्यावसायिक मॉडल विकसित करना प्रमुख प्राथमिकताएँ होंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि खेतों से निकलने वाली पराली और अन्य कृषि अवशेष — जो अब तक समस्या माने जाते थे — आर्थिक संसाधन में तब्दील किए जा सकते हैं। CBG प्लांटों के विस्तार से एक ओर कृषि अवशेषों का बेहतर उपयोग होगा, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर भी बनेंगे।
आम जनता और किसानों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब पराली जलाने की समस्या उत्तर भारत में वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण बनी हुई है। CBG आधारित मॉडल इस समस्या का दोहरा समाधान प्रस्तुत करता है — पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की अतिरिक्त आमदनी। गौरतलब है कि ₹15,000 करोड़ के संभावित निवेश से उत्तर प्रदेश में नई परियोजनाओं, तकनीकी विकास और रोजगार के अवसरों को गति मिलने की उम्मीद है।
आगे की राह
आईबीईटी 2026 के समापन के साथ आयोजकों ने इसे देश के बायोएनर्जी इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। एक्सपो में सामने आई निवेशकों की रुचि यह दर्शाती है कि भारत के क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन में बायोएनर्जी की भूमिका निरंतर बढ़ रही है। ऊर्जा राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत सहित वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति ने इस क्षेत्र में सरकार की गंभीरता को रेखांकित किया। अब नजरें इन निवेश वादों के धरातल पर उतरने की गति पर टिकी हैं।