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जीसीसी निवेश में यूपी की छलांग: गोवा समिट में ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का रोडमैप पेश

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जीसीसी निवेश में यूपी की छलांग: गोवा समिट में ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का रोडमैप पेश

सारांश

गोवा में मशीनकॉन जीसीसी समिट-2026 में उत्तर प्रदेश ने ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का रोडमैप पेश किया — 25% पूंजीगत अनुदान, ₹225 करोड़ एआई मिशन, 8,000+ उच्च शिक्षण संस्थान और सालाना 2 लाख STEM स्नातक। नोएडा, लखनऊ और कानपुर को वैश्विक जीसीसी गंतव्य बनाने की रणनीति सामने आई।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश ने 20 जून 2026 को गोवा में मशीनकॉन जीसीसी समिट-2026 में खुद को प्रमुख जीसीसी हब के रूप में प्रस्तुत किया।
यूपी जीसीसी नीति-2024 के तहत निवेशकों को 25% तक पूंजीगत अनुदान , पेरोल सहायता और स्टाम्प शुल्क में छूट मिलती है।
राज्य में 8,000 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थान और प्रतिवर्ष 2 लाख+ एसटीईएम स्नातक तैयार होते हैं।
राज्य सरकार का ₹225 करोड़ का एआई मिशन और आईआईटी कानपुर व आईआईआईटी लखनऊ में प्रस्तावित डीप-टेक हब्स।
जेवर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और 'निवेश मित्र' सिंगल विंडो प्रणाली निवेशकों के लिए प्रमुख आकर्षण।

उत्तर प्रदेश ने 20 जून 2026 को गोवा में आयोजित मशीनकॉन जीसीसी समिट-2026 में खुद को भारत के अग्रणी ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) हब के रूप में प्रस्तुत किया। राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने निवेश-अनुकूल नीतियों, विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी, विशाल प्रतिभा पूल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-आधारित रणनीति का खाका सामने रखते हुए वैश्विक कंपनियों को उत्तर प्रदेश में निवेश का न्योता दिया।

मुख्य घटनाक्रम

अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने अपने मुख्य वक्तव्य में कहा कि उत्तर प्रदेश सुशासन, तेज़ गति से विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेशक-अनुकूल नीतियों के बल पर अभूतपूर्व आर्थिक परिवर्तन के दौर में है। उन्होंने उत्तर प्रदेश जीसीसी नीति-2024 को देश की सबसे प्रतिस्पर्धी और प्रगतिशील नीतियों में शामिल बताया, जो निवेशकों को स्थापना से लेकर विस्तार तक हर चरण में सहयोग देती है।

नीति के तहत निवेशकों को 25 प्रतिशत तक पूंजीगत अनुदान, परिचालन व्यय सहायता, भूमि संबंधी प्रोत्साहन, पेरोल सहायता और स्टाम्प शुल्क में व्यापक छूट दी जा रही है। बिजनेस पार्क्स नीति के ज़रिए सरकार और निजी डेवलपर्स मिलकर आधुनिक कार्यस्थलों का निर्माण कर रहे हैं।

नोएडा, लखनऊ और कानपुर — नए टेक हब

नोएडा पहले ही ज्ञान-आधारित और तकनीकी उद्योगों का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जबकि लखनऊ और कानपुर तेज़ी से नए प्रौद्योगिकी एवं नवाचार हब के रूप में उभर रहे हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य इन शहरों को वैश्विक कंपनियों के लिए पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।

प्रतिभा पूल — यूपी की सबसे बड़ी ताकत

समिट में 'टैलेंट ऐज़ ए ग्रोथ लीवर' विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने उत्तर प्रदेश की मानव संसाधन क्षमता को राज्य की सबसे बड़ी शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 8,000 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थान हैं, जिनमें आईआईटी कानपुर, आईआईटी-बीएचयू, आईआईआईटी और आईआईएम लखनऊ जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश प्रतिवर्ष 2 लाख से अधिक एसटीईएम स्नातक तैयार करता है — यही प्रतिभा पूल राज्य को जीसीसी निवेश के लिए सबसे आकर्षक स्थलों में रखता है।

एआई मिशन और डीप-टेक हब्स

भविष्य की तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करते हुए अधिकारियों ने राज्य सरकार के ₹225 करोड़ के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मिशन का उल्लेख किया। आईआईटी कानपुर और आईआईआईटी लखनऊ में प्रस्तावित डीप-टेक हब्स कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, डेटा विज्ञान और क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय नेतृत्व दिलाने की दिशा में काम करेंगे।

कनेक्टिविटी और निवेश प्रक्रिया

अधिकारियों ने जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, प्रदेशभर में विकसित हो रहे एक्सप्रेसवे नेटवर्क और 'निवेश मित्र' सिंगल विंडो प्रणाली को निवेशकों के लिए प्रमुख आकर्षण बताया। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के राज्य जीसीसी निवेश को आकर्षित करने की होड़ में हैं और उत्तर प्रदेश इस दौड़ में अपनी नीतिगत तैयारी से अलग पहचान बना रहा है। गौरतलब है कि बेहतर कनेक्टिविटी, त्वरित अनुमोदन प्रक्रिया और उद्योग-अनुकूल माहौल के कारण उत्तर प्रदेश वैश्विक तकनीकी एवं डिजिटल निवेश का नया केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विशाल प्रतिभा पूल और बुनियादी ढाँचे में तेज़ निवेश। लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या 'निवेश मित्र' जैसी खिड़कियाँ ज़मीन पर उतनी ही चुस्त हैं जितनी मंच पर दिखती हैं — क्योंकि कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्य वर्षों की पारिस्थितिकी और ब्रांड विश्वसनीयता के साथ इस दौड़ में हैं। ₹225 करोड़ का एआई मिशन उत्साहजनक है, पर यह तब तक सांकेतिक ही रहेगा जब तक डीप-टेक हब्स की समयसीमा और जवाबदेही का ढाँचा सार्वजनिक नहीं होता। जीसीसी निवेश घोषणाओं से नहीं, निरंतर क्रियान्वयन से आता है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मशीनकॉन जीसीसी समिट-2026 में उत्तर प्रदेश ने क्या पेश किया?
उत्तर प्रदेश ने गोवा में आयोजित मशीनकॉन जीसीसी समिट-2026 में खुद को देश के उभरते जीसीसी हब के रूप में प्रस्तुत किया और ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का रोडमैप साझा किया। राज्य ने यूपी जीसीसी नीति-2024, एआई मिशन और विशाल प्रतिभा पूल को निवेश के प्रमुख आधार के रूप में रखा।
उत्तर प्रदेश जीसीसी नीति-2024 में निवेशकों को क्या सुविधाएँ मिलती हैं?
यूपी जीसीसी नीति-2024 के तहत निवेशकों को 25 प्रतिशत तक पूंजीगत अनुदान, परिचालन व्यय सहायता, भूमि संबंधी प्रोत्साहन, पेरोल सहायता और स्टाम्प शुल्क में व्यापक छूट दी जाती है। बिजनेस पार्क्स नीति के ज़रिए सरकार और निजी डेवलपर्स मिलकर आधुनिक कार्यस्थल भी बना रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में जीसीसी निवेश के लिए प्रतिभा की क्या स्थिति है?
उत्तर प्रदेश में 8,000 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थान हैं, जिनमें आईआईटी कानपुर, आईआईटी-बीएचयू, आईआईआईटी और आईआईएम लखनऊ शामिल हैं। राज्य हर वर्ष 2 लाख से अधिक एसटीईएम स्नातक तैयार करता है, जो वैश्विक कंपनियों को कुशल कार्यबल उपलब्ध कराने में सक्षम हैं।
यूपी का ₹225 करोड़ का एआई मिशन क्या है?
राज्य सरकार ने ₹225 करोड़ के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन की घोषणा की है। इसके तहत आईआईटी कानपुर और आईआईआईटी लखनऊ में डीप-टेक हब्स स्थापित किए जाएँगे, जो एआई, साइबर सुरक्षा, डेटा विज्ञान और क्वांटम प्रौद्योगिकी में उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय नेतृत्व दिलाएँगे।
जीसीसी निवेश के लिए यूपी में कनेक्टिविटी कैसी है?
उत्तर प्रदेश में जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, प्रदेशभर में विकसित हो रहा एक्सप्रेसवे नेटवर्क और 'निवेश मित्र' सिंगल विंडो प्रणाली निवेशकों के लिए प्रमुख आकर्षण हैं। ये सुविधाएँ त्वरित अनुमोदन प्रक्रिया और बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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