यूपी के हर जिले में 1,000 से अधिक बायोगैस प्लांट, IIT दिल्ली बनेगा तकनीकी साझेदार
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने 19 जुलाई 2025 को राज्य में गो-आधारित ग्रीन इकोनॉमी का सबसे बड़ा अभियान शुरू करने की घोषणा की, जिसके तहत प्रदेश के हर जिले में 1,000 से अधिक घरों में मिनी बायोगैस प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में आईआईटी दिल्ली तकनीकी साझेदार की भूमिका निभाएगा और 15 से अधिक अग्रणी कंपनियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में क्रियान्वयन के लिए आगे आई हैं।
योजना का स्वरूप और संरचना
इस परियोजना के अंतर्गत फिक्स्ड प्लांट के साथ-साथ पोर्टेबल बायोगैस प्लांट भी लगाए जाएंगे, ताकि छोटे और सीमांत किसान परिवार भी इसका लाभ उठा सकें। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि ग्रामीणों को प्लांट स्थापित करने के लिए अनुदान देने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। यह योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप प्रदेश की गोशालाओं को 'रूरल रिसोर्स एंड एनर्जी हब' के रूप में विकसित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
वैल्यू चेन और आर्थिक संभावनाएँ
इस मॉडल में गोबर से बायोगैस, बायो-सीएनजी, ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर और भविष्य में कार्बन क्रेडिट तक की पूरी वैल्यू चेन विकसित की जाएगी। योगी सरकार का लक्ष्य गो-आधारित उत्पादों को आय, ऊर्जा और रोज़गार का स्थायी स्रोत बनाना है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार की गोबर-धन योजना भी ग्रामीण बायोगैस को बढ़ावा दे रही है, और उत्तर प्रदेश इस दिशा में सबसे बड़े राज्य-स्तरीय प्रयास के रूप में उभर सकता है।
IIT दिल्ली की भूमिका और युवा प्रशिक्षण
आईआईटी दिल्ली प्लांट की तकनीक, संचालन, रखरखाव और युवाओं के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी संभालेगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेशभर के युवाओं को बायोगैस प्लांट की स्थापना, संचालन और रखरखाव का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे ग्रीन टेक्नीशियन की एक नई पीढ़ी तैयार होगी। स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए भी स्वरोज़गार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।
ग्रामीण परिवारों पर असर
प्लांट से उत्पादित गैस का उपयोग घरेलू ईंधन के रूप में होगा, जिससे ग्रामीण परिवारों का रसोई गैस खर्च कम होगा। प्लांट से निकलने वाली स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली ऑर्गेनिक खाद के रूप में खेतों में इस्तेमाल होगी, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा। गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, इस अभियान का मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है।
आगे की राह
यदि यह मॉडल सफल रहा, तो उत्तर प्रदेश देश की गो-आधारित ग्रीन इकोनॉमी का अग्रणी राज्य बन सकता है। अनुदान ढाँचे की अंतिम रूपरेखा और क्रियान्वयन की समयसीमा अभी घोषित की जानी बाकी है, जो इस परियोजना की व्यावहारिक सफलता की असली कसौटी होगी।