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यूपी के हर जिले में 1,000 से अधिक बायोगैस प्लांट, IIT दिल्ली बनेगा तकनीकी साझेदार

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यूपी के हर जिले में 1,000 से अधिक बायोगैस प्लांट, IIT दिल्ली बनेगा तकनीकी साझेदार

सारांश

उत्तर प्रदेश में गो-आधारित ग्रीन इकोनॉमी का सबसे बड़ा दांव — हर जिले में 1,000 से अधिक बायोगैस प्लांट, IIT दिल्ली की तकनीकी साझेदारी और 15 से अधिक कंपनियों की भागीदारी। गोशालाओं को 'रूरल एनर्जी हब' बनाने की योगी सरकार की यह योजना ग्रामीण ऊर्जा आत्मनिर्भरता और जैविक खेती दोनों को एक साथ साधने का प्रयास है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश के हर जिले में 1,000 से अधिक घरों में मिनी बायोगैस प्लांट लगाने की योजना तैयार।
आईआईटी दिल्ली तकनीक, प्रशिक्षण और रखरखाव का जिम्मा संभालेगा; 15 से अधिक कंपनियाँ ग्रामीण क्रियान्वयन में भागीदार।
गोशालाओं को 'रूरल रिसोर्स एंड एनर्जी हब' के रूप में विकसित किया जाएगा — बायोगैस, बायो-सीएनजी, ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर और कार्बन क्रेडिट तक की वैल्यू चेन।
ग्रामीणों को प्लांट स्थापना के लिए अनुदान देने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
प्लांट से घरेलू ईंधन खर्च में कमी और ऑर्गेनिक खाद से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी।
स्वयं सहायता समूहों और युवाओं के लिए ग्रीन टेक्नीशियन के रूप में स्वरोज़गार के नए अवसर।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 19 जुलाई 2025 को राज्य में गो-आधारित ग्रीन इकोनॉमी का सबसे बड़ा अभियान शुरू करने की घोषणा की, जिसके तहत प्रदेश के हर जिले में 1,000 से अधिक घरों में मिनी बायोगैस प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में आईआईटी दिल्ली तकनीकी साझेदार की भूमिका निभाएगा और 15 से अधिक अग्रणी कंपनियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में क्रियान्वयन के लिए आगे आई हैं।

योजना का स्वरूप और संरचना

इस परियोजना के अंतर्गत फिक्स्ड प्लांट के साथ-साथ पोर्टेबल बायोगैस प्लांट भी लगाए जाएंगे, ताकि छोटे और सीमांत किसान परिवार भी इसका लाभ उठा सकें। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि ग्रामीणों को प्लांट स्थापित करने के लिए अनुदान देने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। यह योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप प्रदेश की गोशालाओं को 'रूरल रिसोर्स एंड एनर्जी हब' के रूप में विकसित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

वैल्यू चेन और आर्थिक संभावनाएँ

इस मॉडल में गोबर से बायोगैस, बायो-सीएनजी, ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर और भविष्य में कार्बन क्रेडिट तक की पूरी वैल्यू चेन विकसित की जाएगी। योगी सरकार का लक्ष्य गो-आधारित उत्पादों को आय, ऊर्जा और रोज़गार का स्थायी स्रोत बनाना है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार की गोबर-धन योजना भी ग्रामीण बायोगैस को बढ़ावा दे रही है, और उत्तर प्रदेश इस दिशा में सबसे बड़े राज्य-स्तरीय प्रयास के रूप में उभर सकता है।

IIT दिल्ली की भूमिका और युवा प्रशिक्षण

आईआईटी दिल्ली प्लांट की तकनीक, संचालन, रखरखाव और युवाओं के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी संभालेगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेशभर के युवाओं को बायोगैस प्लांट की स्थापना, संचालन और रखरखाव का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे ग्रीन टेक्नीशियन की एक नई पीढ़ी तैयार होगी। स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए भी स्वरोज़गार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।

ग्रामीण परिवारों पर असर

प्लांट से उत्पादित गैस का उपयोग घरेलू ईंधन के रूप में होगा, जिससे ग्रामीण परिवारों का रसोई गैस खर्च कम होगा। प्लांट से निकलने वाली स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली ऑर्गेनिक खाद के रूप में खेतों में इस्तेमाल होगी, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा। गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, इस अभियान का मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है।

आगे की राह

यदि यह मॉडल सफल रहा, तो उत्तर प्रदेश देश की गो-आधारित ग्रीन इकोनॉमी का अग्रणी राज्य बन सकता है। अनुदान ढाँचे की अंतिम रूपरेखा और क्रियान्वयन की समयसीमा अभी घोषित की जानी बाकी है, जो इस परियोजना की व्यावहारिक सफलता की असली कसौटी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है। IIT दिल्ली की तकनीकी साझेदारी और निजी कंपनियों की रुचि उत्साहजनक है, परंतु अनुदान ढाँचे की अंतिम रूपरेखा और लाभार्थी चयन की पारदर्शिता अभी स्पष्ट नहीं है। गौरतलब है कि केंद्र की गोबर-धन योजना के तहत पहले से चल रहे कई बायोगैस प्रोजेक्ट रखरखाव और कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति की चुनौती से जूझ रहे हैं — यूपी मॉडल को इन्हीं बाधाओं से पार पाना होगा।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में बायोगैस प्लांट योजना क्या है?
यह योगी सरकार की गो-आधारित ग्रीन इकोनॉमी पहल है, जिसके तहत प्रदेश के हर जिले में 1,000 से अधिक घरों में मिनी बायोगैस प्लांट लगाए जाएंगे। फिक्स्ड और पोर्टेबल दोनों प्रकार के प्लांट शामिल होंगे और IIT दिल्ली तकनीकी साझेदार होगा।
इस योजना में IIT दिल्ली की क्या भूमिका है?
आईआईटी दिल्ली प्लांट की तकनीक, संचालन, रखरखाव और युवाओं के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी संभालेगा। इसके प्रशिक्षण कार्यक्रम से प्रदेशभर में ग्रीन टेक्नीशियन की नई पीढ़ी तैयार होगी।
क्या ग्रामीणों को बायोगैस प्लांट लगाने के लिए सरकारी सहायता मिलेगी?
हाँ, ग्रामीणों को प्लांट स्थापित करने के लिए अनुदान देने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। हालाँकि अनुदान की राशि और पात्रता मानदंड अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किए गए हैं।
इस योजना से ग्रामीण परिवारों को क्या फायदा होगा?
प्लांट से उत्पादित गैस घरेलू ईंधन के रूप में काम आएगी, जिससे रसोई गैस का खर्च कम होगा। इसके अलावा प्लांट की स्लरी ऑर्गेनिक खाद के रूप में खेतों में इस्तेमाल होगी, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी।
गोशालाओं को 'रूरल रिसोर्स एंड एनर्जी हब' कैसे बनाया जाएगा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुसार गोशालाओं में गोबर से बायोगैस, बायो-सीएनजी, ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर और भविष्य में कार्बन क्रेडिट तक की पूरी वैल्यू चेन विकसित की जाएगी। इससे गोशालाएँ आय और ऊर्जा के केंद्र बनेंगी।
राष्ट्र प्रेस
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