गोबरधन योजना: गुजरात में 2026-27 में लगेंगे 20,000 नए बायोगैस प्लांट, पशुपालकों को ₹25,000 की सहायता
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्यभर में 20,000 नए 2-क्यूबिक मीटर फ्लेक्सिबल बायोगैस प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया है — और इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने में केंद्र सरकार की गोबर-धन (GOBARDHAN) योजना की अहम भूमिका होगी। बनासकांठा सहित राज्य के ग्रामीण इलाकों में गोबर और कृषि अवशेषों को क्लीन एनर्जी एवं ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर में बदलकर 'वेस्ट टू वेल्थ' का यह मॉडल अब ज़मीन पर उतरता दिख रहा है।
योजना का ढाँचा और वित्तीय सहायता
इन बायोगैस प्लांट्स को अमूल, बनास, दूधसागर और एनडीडीबी (NDDB) जैसी स्थापित मिल्क सोसाइटियों के नेटवर्क के ज़रिए स्थापित किया जाएगा। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत प्रत्येक पशुपालक को बायोगैस प्लांट लगाने के लिए ₹25,000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
इस पहल से ग्रामीण परिवारों को — विशेषकर महिलाओं को — रसोई के धुएं से राहत मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा हर परिवार को सालाना 8 से 10 एलपीजी सिलेंडर के खर्च की बचत होने का अनुमान है।
बनास डेयरी का अनुभव और विशेषज्ञ राय
बनास डेयरी के प्रबंध निदेशक संग्राम चौधरी ने कहा कि रिन्यूएबल और क्लीन एनर्जी, क्लाइमेट चेंज की वजह से ओजोन लेयर को जो नुकसान पहुँच रहा है उससे बचाव करती है। उन्होंने यह भी कहा कि 'कम्प्रेस्ड सीएनजी की वजह से हमें कार्बन उत्सर्जन से मुक्ति मिलती है, जो कि ग्लोबल वार्मिंग का एक बड़ा कारण है।'
गौरतलब है कि बनासकांठा में बनास डेयरी द्वारा एक कमर्शियल बायोगैस प्लांट पहले से संचालित है, जिसके लिए आसपास के गाँवों के पशुपालकों से नियमित रूप से गोबर खरीदा जा रहा है।
पशुपालकों पर असर: ज़मीनी आवाज़ें
पशुपालक रामजीभाई चौधरी ने बताया, 'पहले हम गोबर का उपयोग करते थे और खेती में भी इस्तेमाल करते थे। जब से प्लांट लगा है तब से हम सारा गोबर वहीं भेजते हैं। रोजाना डेयरी से ट्रैक्टर आता है, गोबर ले जाता है।'
रिंकूबेन चौधरी ने कहा, 'डेयरी से होने वाली इनकम, दूध से होने वाली आमदनी और बायोगैस प्लांट से होने वाली इनकम — इन सबसे हमारे बच्चों और हमें बहुत मदद मिलती है और हमारे बच्चों का जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है।'
अब तक की उपलब्धि और पर्यावरणीय लाभ
गुजरात सरकार पहले ही मिल्क सोसाइटियों के सहयोग से 88 क्लस्टर्स में 14,000 बायोगैस प्लांट सफलतापूर्वक चालू कर चुकी है। आँकड़ों के अनुसार, एक बायोगैस प्लांट से सालभर में करीब 834 किलोग्राम कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन कम होता है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने 'नेट जीरो' कार्बन उत्सर्जन के दीर्घकालिक लक्ष्य की दिशा में काम कर रहा है। बायोगैस प्लांट से निकलने वाली बायो-स्लरी को ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर के रूप में उपयोग करने से किसानों को रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने और मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
आगे की राह
नए 20,000 प्लांट की स्थापना के साथ राज्य का कुल बायोगैस इन्फ्रास्ट्रक्चर 34,000 यूनिट से अधिक हो जाएगा — जो ग्रामीण ऊर्जा स्वावलंबन की दिशा में एक उल्लेखनीय छलाँग होगी। यह पहल न केवल पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने का ज़रिया बनेगी, बल्कि गाँवों में स्वच्छ ईंधन और जैविक खेती की नींव भी मज़बूत करेगी।