गैरसैंण में केंद्रीय विद्यालय की मांग: अनिल बलूनी ने शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से की मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और गढ़वाल से सांसद अनिल बलूनी ने 25 अगस्त 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से नई दिल्ली में मुलाकात की और उत्तराखंड के चार स्थानों — गैरसैंण, रामनगर, यमकेश्वर और देवप्रयाग — में केंद्रीय विद्यालय स्थापित करने की माँग रखी। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब प्रह्लाद जोशी ने हाल ही में शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार संभाला है।
मुख्य घटनाक्रम
बलूनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी माँग सार्वजनिक करते हुए लिखा, 'आज मैंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात की और शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार संभालने पर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर, उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में केंद्रीय विद्यालय स्थापित करने की अपनी मांग को दोहराते हुए, मैंने मंत्री से इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया। साथ ही, मैंने रामनगर, यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र और देवप्रयाग में भी केंद्रीय विद्यालय स्थापित करने का अनुरोध किया।'
बलूनी ने यह भी बताया कि शिक्षा मंत्री ने इस विषय पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
गैरसैंण की विशेष अहमियत
गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया जा चुका है, फिर भी यहाँ अभी तक कोई केंद्रीय विद्यालय स्थापित नहीं हो सका है। स्थानीय निवासियों और छात्रों की यह माँग लंबे समय से लंबित है। बलूनी इस विषय को लगातार उठाते रहे हैं और इसे पहाड़ी क्षेत्र की शैक्षणिक उपेक्षा का प्रतीक मानते हैं।
गौरतलब है कि राजधानी का दर्जा मिलने के बावजूद गैरसैंण में बुनियादी शैक्षणिक ढाँचे की कमी क्षेत्र के समग्र विकास पर सवाल खड़े करती है।
पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा की चुनौती
रामनगर, यमकेश्वर और देवप्रयाग जैसे पहाड़ी और अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए छात्रों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। बलूनी का तर्क है कि इन क्षेत्रों में केंद्रीय विद्यालय खुलने से न केवल स्थानीय बच्चों को, बल्कि आसपास के गाँवों के विद्यार्थियों को भी बेहतर शिक्षा सुलभ होगी।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पहाड़ी क्षेत्रों से हो रहे पलायन को रोकने में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की भूमिका निर्णायक है — यदि युवाओं को घर के पास ही बेहतर शैक्षणिक अवसर मिलें, तो वे रोज़गार की तलाश में मैदानी इलाकों की ओर पलायन नहीं करेंगे।
आम जनता पर असर
केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना से इन क्षेत्रों में CBSE पाठ्यक्रम पर आधारित शिक्षा उपलब्ध होगी, जो सरकारी कर्मचारियों के बच्चों के साथ-साथ स्थानीय विद्यार्थियों के लिए भी सुलभ होगी। इसके अलावा, शिक्षकों और सहायक कर्मचारियों के रूप में स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।
क्या होगा आगे
शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के आश्वासन के बाद अब निगाहें मंत्रालय की औपचारिक प्रक्रिया पर टिकी हैं। केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) की स्वीकृति और बजट आवंटन इस दिशा में अगले अहम कदम होंगे। बलूनी की यह पहल उत्तराखंड में आगामी राजनीतिक परिदृश्य के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।