भुवनेश्वर में एमएमडीआर संशोधन अधिनियम के खिलाफ विपक्ष का बड़ा प्रदर्शन, ओडिशा के राजस्व पर मंडराते खतरे का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
भुवनेश्वर में विपक्षी दलों ने 25 अगस्त 2026 को माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट एक्ट, 2026 (एमएमडीआर संशोधन अधिनियम) के विरोध में व्यापक प्रदर्शन किया। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि यह कानून ओडिशा के खनिज राजस्व पर सीधी चोट करता है और राज्य के संवैधानिक वित्तीय अधिकारों को कमज़ोर करता है।
मुख्य घटनाक्रम
कांग्रेस भवन से एक बड़ा जुलूस निकाला गया जो लोअर पीएमजी तक पहुँचा, जहाँ विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के अंत में विरोध स्वरूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पुतले जलाए गए।
विपक्षी नेताओं ने एमएमडीआर संशोधन को 'जन-विरोधी' और 'ओडिशा-विरोधी' करार देते हुए केंद्र सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की माँग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र ने इस कानून पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आंदोलन और अधिक तीव्र किया जाएगा।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
मंगलवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रसाद कुमार हरिचंदन ने कहा, 'एमएमडीआर अमेंडमेंट एक्ट, 2026 सहकारी संघवाद और खनिज-समृद्ध राज्यों के वित्तीय अधिकारों पर सीधा हमला है।' उन्होंने आगे कहा, 'कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है, इसलिए हमारी माँग अब स्पष्ट और दृढ़ है — केंद्र सरकार को इस कानून को वापस लेना चाहिए, रद्द करना चाहिए और राज्यों के संवैधानिक व वित्तीय अधिकारों को बहाल करना चाहिए।'
ओडिशा सरकार पर निशाना
विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार के साथ-साथ ओडिशा राज्य सरकार को भी घेरा। उनका आरोप था कि राज्य सरकार इस कानून का विरोध करने की बजाय कथित तौर पर मौन बनी रही, जो ओडिशा के हितों के साथ विश्वासघात है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के बावजूद केंद्र की नीतियों को भेदभावपूर्ण बताया जाता रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी केंद्र की आलोचना की और आरोप लगाया कि राज्य के समग्र हितों की अनदेखी की जा रही है।
आम जनता और राज्य पर असर
विपक्षी दलों का दावा है कि एमएमडीआर संशोधन के चलते ओडिशा को लाखों करोड़ रुपये के खनिज राजस्व से हाथ धोना पड़ सकता है। गौरतलब है कि ओडिशा देश के प्रमुख खनिज-उत्पादक राज्यों में शामिल है और लौह अयस्क, कोयला तथा बॉक्साइट जैसे संसाधनों से राज्य की अर्थव्यवस्था को बड़ा योगदान मिलता है। आलोचकों का कहना है कि यदि राजस्व हिस्सेदारी घटती है तो इसका सीधा असर राज्य के विकास बजट और आम जनता की सुविधाओं पर पड़ेगा।
क्या होगा आगे
विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि वे इस मुद्दे पर किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं हैं और राज्य के खनिज राजस्व की रक्षा के लिए अपना आंदोलन जारी रखेंगे। आने वाले दिनों में और व्यापक विरोध प्रदर्शनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।