एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने झामुमो-कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर सियासी संग्राम गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने 20 अगस्त 2026 को रांची में स्पष्ट किया कि यह संशोधन राज्यों के अधिकारों पर हमला नहीं, बल्कि खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में एक ज़रूरी कदम है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और अन्य विपक्षी दलों द्वारा विधेयक के विरुद्ध आंदोलन की घोषणा के बीच साहू ने विपक्ष पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।
विधेयक पर भाजपा का पक्ष
साहू ने कहा कि एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026 का मूल उद्देश्य खनन क्षेत्र में समानता, पारदर्शिता और निवेश की संभावनाएँ बढ़ाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संशोधन के बाद भी राज्यों को रॉयल्टी, जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफ), नीलामी प्रीमियम, राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (एनएमईटी) और जीएसटी से मिलने वाली हिस्सेदारी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। उनके अनुसार, 2014-15 में कुल खनिज राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत थी, जो 2024-25 तक बढ़कर 88 प्रतिशत से अधिक हो गई। इसी अवधि में राज्यों का खनिज राजस्व ₹25,206 करोड़ से बढ़कर ₹1,14,549 करोड़ हो गया।
मुख्यमंत्री सोरेन के बयान पर पलटवार
साहू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के उस बयान को भ्रामक करार दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि संशोधन का असर आदिवासियों, दलितों और पिछड़े वर्गों पर पड़ेगा। साहू का कहना था कि BJP की प्राथमिकता खनिज संपदा का लाभ खनन प्रभावित क्षेत्रों और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। उन्होंने राज्य सरकार से खनन राजस्व के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और प्रभावित क्षेत्रों के विकास का हिसाब देने की माँग की।
खनिज उपकर पर विवाद
साहू ने झारखंड सरकार द्वारा लगाए गए खनिज उपकर को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने दावा किया कि राज्य में लौह अयस्क पर ₹600 प्रति टन उपकर लगाया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह मात्र ₹22.50 प्रति टन है। इसी तरह, कोयले पर उपकर ₹100 प्रति टन से बढ़ाकर ₹450 प्रति टन कर दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अत्यधिक उपकर से खनन उत्पादन और प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है, और इससे अवैध खनन को बढ़ावा मिलने की आशंका बनी रहती है। उनके अनुसार, कोई भी राज्य मनमाने ढंग से उपकर बढ़ाकर खनन उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को नष्ट नहीं कर सकता।
डीएमएफटी फंड पर सवाल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड के उपयोग को लेकर भी राज्य सरकार से जवाब माँगा। उन्होंने कहा कि सरकार को आदिवासी कल्याण, मंईयां सम्मान योजना और अबुआ आवास जैसी योजनाओं के लिए केंद्र पर आरोप लगाने की बजाय यह स्पष्ट करना चाहिए कि राज्य में उपलब्ध डीएमएफटी राशि का कितना और किस प्रकार उपयोग हुआ।
झामुमो के आंदोलन पर भाजपा का रुख
साहू ने झामुमो के एमएमडीआर विरोधी आंदोलन को राजनीतिक जमीन बचाने की कवायद बताया। उन्होंने झामुमो से सीधा सवाल किया कि राज्य में लंबे समय से जारी अवैध खनन, खनिजों की लूट और राजस्व के नुकसान को रोकने के लिए सरकार ने अब तक क्या ठोस कार्रवाई की है। साहू ने घोषणा की कि BJP विधेयक के प्रावधानों को लेकर राज्यभर में जागरूकता अभियान चलाएगी और पार्टी कार्यकर्ता गाँव-गाँव जाकर जनता को इसकी जानकारी देंगे। उन्होंने कहा कि झारखंड के खनिज संसाधनों पर पहला अधिकार राज्य की जनता के विकास का है, न कि खनन माफिया और अवैध कारोबार करने वालों का।