20 अगस्त 2026
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एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने झामुमो-कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया

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एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने झामुमो-कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया

सारांश

एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026 पर झारखंड में सियासी संग्राम तेज है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने झामुमो के विरोध को राजनीतिक कवायद बताते हुए राज्यों की खनिज राजस्व हिस्सेदारी 60% से 88% बढ़ने के आँकड़े पेश किए और डीएमएफटी फंड के उपयोग पर सरकार से जवाब माँगा।

मुख्य बातें

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने 20 अगस्त 2026 को रांची में एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026 का बचाव करते हुए झामुमो-कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
साहू के अनुसार राज्यों की खनिज राजस्व हिस्सेदारी 2014-15 में 60% से बढ़कर 2024-25 में 88% से अधिक हो गई; राजस्व ₹25,206 करोड़ से बढ़कर ₹1,14,549 करोड़ पहुँचा।
झारखंड में लौह अयस्क पर उपकर ₹600 प्रति टन है, जबकि छत्तीसगढ़ में मात्र ₹22.50 प्रति टन ; कोयले पर उपकर ₹100 से बढ़ाकर ₹450 प्रति टन किया गया।
साहू ने डीएमएफटी फंड के उपयोग पर राज्य सरकार से पारदर्शिता की माँग की।
BJP राज्यभर में जागरूकता अभियान चलाएगी और कार्यकर्ता गाँव-गाँव विधेयक के प्रावधान समझाएँगे।

झारखंड में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर सियासी संग्राम गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने 20 अगस्त 2026 को रांची में स्पष्ट किया कि यह संशोधन राज्यों के अधिकारों पर हमला नहीं, बल्कि खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में एक ज़रूरी कदम है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और अन्य विपक्षी दलों द्वारा विधेयक के विरुद्ध आंदोलन की घोषणा के बीच साहू ने विपक्ष पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।

विधेयक पर भाजपा का पक्ष

साहू ने कहा कि एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026 का मूल उद्देश्य खनन क्षेत्र में समानता, पारदर्शिता और निवेश की संभावनाएँ बढ़ाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संशोधन के बाद भी राज्यों को रॉयल्टी, जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफ), नीलामी प्रीमियम, राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (एनएमईटी) और जीएसटी से मिलने वाली हिस्सेदारी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। उनके अनुसार, 2014-15 में कुल खनिज राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत थी, जो 2024-25 तक बढ़कर 88 प्रतिशत से अधिक हो गई। इसी अवधि में राज्यों का खनिज राजस्व ₹25,206 करोड़ से बढ़कर ₹1,14,549 करोड़ हो गया।

मुख्यमंत्री सोरेन के बयान पर पलटवार

साहू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के उस बयान को भ्रामक करार दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि संशोधन का असर आदिवासियों, दलितों और पिछड़े वर्गों पर पड़ेगा। साहू का कहना था कि BJP की प्राथमिकता खनिज संपदा का लाभ खनन प्रभावित क्षेत्रों और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। उन्होंने राज्य सरकार से खनन राजस्व के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और प्रभावित क्षेत्रों के विकास का हिसाब देने की माँग की।

खनिज उपकर पर विवाद

साहू ने झारखंड सरकार द्वारा लगाए गए खनिज उपकर को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने दावा किया कि राज्य में लौह अयस्क पर ₹600 प्रति टन उपकर लगाया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह मात्र ₹22.50 प्रति टन है। इसी तरह, कोयले पर उपकर ₹100 प्रति टन से बढ़ाकर ₹450 प्रति टन कर दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अत्यधिक उपकर से खनन उत्पादन और प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है, और इससे अवैध खनन को बढ़ावा मिलने की आशंका बनी रहती है। उनके अनुसार, कोई भी राज्य मनमाने ढंग से उपकर बढ़ाकर खनन उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को नष्ट नहीं कर सकता।

डीएमएफटी फंड पर सवाल

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड के उपयोग को लेकर भी राज्य सरकार से जवाब माँगा। उन्होंने कहा कि सरकार को आदिवासी कल्याण, मंईयां सम्मान योजना और अबुआ आवास जैसी योजनाओं के लिए केंद्र पर आरोप लगाने की बजाय यह स्पष्ट करना चाहिए कि राज्य में उपलब्ध डीएमएफटी राशि का कितना और किस प्रकार उपयोग हुआ।

झामुमो के आंदोलन पर भाजपा का रुख

साहू ने झामुमो के एमएमडीआर विरोधी आंदोलन को राजनीतिक जमीन बचाने की कवायद बताया। उन्होंने झामुमो से सीधा सवाल किया कि राज्य में लंबे समय से जारी अवैध खनन, खनिजों की लूट और राजस्व के नुकसान को रोकने के लिए सरकार ने अब तक क्या ठोस कार्रवाई की है। साहू ने घोषणा की कि BJP विधेयक के प्रावधानों को लेकर राज्यभर में जागरूकता अभियान चलाएगी और पार्टी कार्यकर्ता गाँव-गाँव जाकर जनता को इसकी जानकारी देंगे। उन्होंने कहा कि झारखंड के खनिज संसाधनों पर पहला अधिकार राज्य की जनता के विकास का है, न कि खनन माफिया और अवैध कारोबार करने वालों का।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ राज्य का 'संसाधन संप्रभुता' का दावा। साहू के राजस्व आँकड़े प्रभावशाली हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि डीएमएफटी की अरबों की राशि खनन प्रभावित ज़िलों में ज़मीन पर कितनी उतरी — जिसका जवाब न राज्य सरकार ने दिया है, न केंद्र ने माँगा है। झामुमो का आंदोलन राजनीतिक हो या न हो, उपकर असमानता का मुद्दा वैध है और इसे महज़ 'भ्रम' कहकर खारिज नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026 क्या है और इसका झारखंड पर क्या असर होगा?
खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 खनन क्षेत्र में पारदर्शिता, निवेश और एकरूपता लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा लाया गया है। भाजपा का दावा है कि इससे राज्यों की रॉयल्टी, डीएमएफ और जीएसटी हिस्सेदारी अप्रभावित रहेगी, जबकि झामुमो का कहना है कि इससे आदिवासी और पिछड़े वर्गों के हित प्रभावित होंगे।
झामुमो और कांग्रेस एमएमडीआर संशोधन का विरोध क्यों कर रहे हैं?
झामुमो और कांग्रेस का आरोप है कि यह संशोधन राज्यों के खनन अधिकारों को कमज़ोर करेगा और आदिवासियों, दलितों तथा पिछड़े वर्गों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस आधार पर विधेयक के खिलाफ आंदोलन की घोषणा की है, जिसे भाजपा ने राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश बताया है।
झारखंड में खनिज उपकर को लेकर विवाद क्या है?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के अनुसार झारखंड सरकार ने लौह अयस्क पर ₹600 प्रति टन उपकर लगाया है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह केवल ₹22.50 प्रति टन है। कोयले पर उपकर ₹100 से बढ़ाकर ₹450 प्रति टन किया गया है, जिससे खनन उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता घटने और अवैध खनन बढ़ने की आशंका है।
राज्यों को खनिज राजस्व में कितनी हिस्सेदारी मिलती है?
आदित्य साहू के दावे के अनुसार 2014-15 में राज्यों की कुल खनिज राजस्व में हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में बढ़कर 88 प्रतिशत से अधिक हो गई। इसी दौरान राज्यों का खनिज राजस्व ₹25,206 करोड़ से बढ़कर ₹1,14,549 करोड़ हो गया।
डीएमएफटी फंड को लेकर भाजपा ने क्या सवाल उठाए हैं?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने माँग की है कि राज्य सरकार स्पष्ट करे कि जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) की राशि का कितना उपयोग आदिवासी कल्याण, मंईयां सम्मान योजना और अबुआ आवास जैसी योजनाओं पर हुआ। उनका कहना है कि केंद्र पर आरोप लगाने से पहले राज्य को अपने खनन राजस्व के उपयोग का हिसाब देना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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