खनिज संशोधन विधेयक 2026: CM हेमंत सोरेन की केंद्र को चेतावनी — बिल वापस लो, वरना देशव्यापी आंदोलन
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 13 अगस्त 2026 को संसद के दोनों सदनों से पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 के खिलाफ कड़ा मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार से विधेयक तत्काल वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि ऐसा न होने पर झारखंड में ऐसा आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसे पूरा देश देखेगा।
मुख्यमंत्री की घोषणा और संगठनात्मक तैयारी
गुरुवार को मुख्यमंत्री सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के सांसदों, जिलाध्यक्षों और पार्टी पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विस्तृत चर्चा की। इस बैठक में सांसद विजय हांसदा, महुआ माजी, महासचिव सह मंत्री सुदिव्य कुमार, महासचिव विनोद पांडेय, अभिषेक प्रसाद पिंटू तथा विभिन्न जिला इकाइयों के अध्यक्ष शामिल हुए।
सोरेन ने पार्टी संगठन को निर्देश दिया कि विधेयक के विरुद्ध विरोध को प्रत्येक जिले, प्रखंड, पंचायत और शहर तक ले जाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन गांव-गांव तक पहुँचेगा।
झारखंड के अधिकारों पर सवाल
मुख्यमंत्री ने तीखे शब्दों में कहा — 'खनिज झारखंड का, जमीन झारखंड की' — तो राज्य के हक-अधिकार का फैसला दिल्ली क्यों करे? उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा और राज्यसभा में जल्दबाजी में विधेयक पारित कराकर केंद्र सरकार ने झारखंड के संवैधानिक अधिकारों को कमज़ोर किया है।
सोरेन ने विधेयक को 'झारखंड और झारखंडियों के साथ अन्याय' करार देते हुए कहा कि यह राज्य के विकास और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर बड़ा कुठाराघात है। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड केंद्र के इस 'सौतेले व्यवहार' को स्वीकार नहीं करेगा।
कल्याणकारी योजनाओं पर संकट का दावा
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस विधेयक के लागू होने से राज्य की कई महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाएं प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो सकती हैं। इनमें मईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, पेंशन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं।
गौरतलब है कि झारखंड देश का एक प्रमुख खनिज-संपन्न राज्य है और खनन राजस्व राज्य के बजट की रीढ़ है। ऐसे में खनिज नीति में केंद्रीय हस्तक्षेप को लेकर राज्य सरकार की चिंता स्वाभाविक मानी जा रही है।
केंद्र को अल्टीमेटम
सोरेन ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार नहीं चेती और झारखंड को उसका हक-अधिकार वापस नहीं किया गया, तो झारखंड निर्णायक और ऐतिहासिक निर्णय लेने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने JMM का पूरजोर विरोध जारी रखने का संकल्प दोहराया।
आगे क्या होगा
राज्यभर में विधेयक-विरोधी अभियान की रूपरेखा तैयार हो चुकी है। पंचायत स्तर तक संगठनात्मक ढाँचे को सक्रिय करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इस राजनीतिक दबाव पर क्या रुख अपनाती है और क्या अन्य खनिज-संपन्न राज्य भी इस विरोध में शामिल होते हैं।