14 अगस्त 2026
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खनन विधेयक वापस लो या आर्थिक नाकेबंदी झेलो — भाकपा-माले का केंद्र को अल्टीमेटम

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खनन विधेयक वापस लो या आर्थिक नाकेबंदी झेलो — भाकपा-माले का केंद्र को अल्टीमेटम

सारांश

भाकपा-माले ने खनन विधेयक 2026 को झारखंड के आर्थिक और संघीय अधिकारों पर हमला बताते हुए केंद्र को साफ अल्टीमेटम दिया है — विधेयक वापस लो, वरना खनिज ढुलाई ठप कर दी जाएगी। मंईयां सम्मान योजना समेत तमाम जनकल्याण कार्यक्रमों पर खतरे की आशंका ने इस विवाद को और धार दे दी है।

मुख्य बातें

भाकपा-माले के राज्य सचिव मनोज भक्ति ने 14 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर खनन एवं खनिज संशोधन विधेयक, 2026 वापस लेने की माँग की।
विधेयक न लिए जाने पर झारखंड में आर्थिक नाकेबंदी और खनिज ढुलाई बंद करने की चेतावनी दी गई।
भाकपा-माले का आरोप — विधेयक राज्य के संघीय अधिकारों और खनिज राजस्व पर सीधा हमला है।
मंईयां सम्मान योजना सहित शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास योजनाओं पर प्रतिकूल असर की आशंका।
झारखंड के भाजपा सांसदों से सवाल — राज्य हित के विरुद्ध विधेयक का समर्थन क्यों?
जेपीएससी-सीजीएल छात्र आंदोलन को भाकपा-माले का समर्थन; आइसा आंदोलन स्थल पर मौजूद।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के झारखंड राज्य सचिव मनोज भक्ति ने 14 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर खनन एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को तत्काल वापस लेने की माँग की है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने विधेयक वापस नहीं लिया, तो झारखंड में आर्थिक नाकेबंदी और खनिज ढुलाई ठप करने का व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।

विधेयक पर भाकपा-माले की आपत्तियाँ

मनोज भक्ति ने कहा कि यह विधेयक झारखंड के आर्थिक हितों पर सीधा हमला है और राज्य के संघीय अधिकारों को कमज़ोर करने की कोशिश है। उनके अनुसार, खनिजों पर लागू टैक्स का मौजूदा फॉर्मूला अपर्याप्त है और खनन भूमि पर सेस व उपकर लगाने का अधिकार राज्य सरकार को मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा में पेश किया गया यह विधेयक राज्य की खनिज-आधारित अर्थव्यवस्था की जड़ों पर प्रहार करता है।

जनकल्याण योजनाओं पर संकट की आशंका

भाकपा-माले नेता ने विशेष रूप से चिंता जताई कि यदि विधेयक लागू हुआ, तो राज्य सरकार की मंईयां सम्मान योजना सहित शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि झारखंड की अर्थव्यवस्था में खनिज राजस्व की केंद्रीय भूमिका है और यह राजस्व सीधे राज्य के सामाजिक कार्यक्रमों को वित्तपोषित करता है।

झारखंड के भाजपा सांसदों पर निशाना

मनोज भक्ति ने केंद्र सरकार में मंत्री पद संभाल रहे झारखंड के भाजपा सांसदों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जनता ने इन सांसदों को राज्य के प्रतिनिधि के रूप में संसद भेजा है, फिर भी वे ऐसे विधेयक का समर्थन क्यों कर रहे हैं जो झारखंड के हितों को नुकसान पहुँचाता है। उनके अनुसार, इन सांसदों को जनता के सवालों का जवाब देना होगा।

छात्र आंदोलन को समर्थन, भाजपा पर आरोप

भाकपा-माले ने जेपीएससी और सीजीएल से जुड़े मुद्दों पर चल रहे छात्र आंदोलन का भी समर्थन किया। मनोज भक्ति ने कहा कि पार्टी का छात्र संगठन आइसा (AISA) आंदोलन स्थल पर मौजूद है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसने छात्र आंदोलन को अपने राजनीतिक हितों के लिए हाईजेक करने की कोशिश की है, जबकि उसी भाजपा ने जेपीएससी प्रथम और द्वितीय से जुड़े मामलों की सीबीआई जाँच को दबाने का काम किया और इन मामलों के आरोपी अभी भी जमानत पर बाहर हैं।

आगे का रास्ता और इंडिया गठबंधन की एकजुटता

मनोज भक्ति ने कहा कि इंडिया गठबंधन झारखंड के हितों से जुड़े मुद्दों पर लगातार संघर्ष कर रहा है और विपक्षी दल संयुक्त आंदोलन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। भाकपा-माले इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएगी और व्यापक आंदोलन की तैयारी की जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में खनिज अधिकारों को लेकर केंद्र-राज्य संबंधों में पहले से तनाव बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि केंद्र-राज्य खनिज राजस्व विभाजन की उस पुरानी खींचतान की नई कड़ी है जो झारखंड के गठन के दिन से चली आ रही है। असली सवाल यह है कि क्या विधेयक में ऐसे प्रावधान हैं जो राज्य के रॉयल्टी और सेस अधिकारों को वास्तव में सीमित करते हैं — जिसका जवाब विधेयक के विस्तृत प्रावधानों की पड़ताल के बिना नहीं मिल सकता। आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी राजनीतिक दबाव की रणनीति है, लेकिन मंईयां सम्मान जैसी योजनाओं पर असर की आशंका को खारिज करना भी जल्दबाज़ी होगी। इंडिया गठबंधन की एकजुटता की बात और भाजपा सांसदों को घेरने की कोशिश यह भी बताती है कि यह मुद्दा आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खनन एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 क्या है?
यह केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पेश किया गया विधेयक है जो खनन और खनिज क्षेत्र के नियमन में संशोधन करता है। भाकपा-माले का आरोप है कि इससे झारखंड जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों के राजस्व अधिकार और संघीय स्वायत्तता प्रभावित होती है।
भाकपा-माले की आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी का क्या मतलब है?
भाकपा-माले के राज्य सचिव मनोज भक्ति ने कहा है कि यदि विधेयक वापस नहीं लिया गया तो झारखंड की जनता खनिजों की ढुलाई ठप कर देगी और आर्थिक नाकेबंदी का रास्ता अपनाएगी। यह झारखंड के कोयला, लोहा और अन्य खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है।
इस विधेयक से झारखंड की जनकल्याण योजनाओं पर क्या असर पड़ सकता है?
मनोज भक्ति के अनुसार, खनिज राजस्व में कमी आने पर राज्य सरकार की मंईयां सम्मान योजना, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं। हालाँकि यह आशंका है, इसकी पुष्टि विधेयक के विस्तृत वित्तीय विश्लेषण पर निर्भर है।
झारखंड के भाजपा सांसदों को निशाना क्यों बनाया जा रहा है?
भाकपा-माले का तर्क है कि केंद्र में मंत्री पद संभाल रहे झारखंड के भाजपा सांसद राज्य की जनता के प्रतिनिधि हैं, इसलिए उनकी जिम्मेदारी राज्य के हितों की रक्षा करना है। विधेयक का समर्थन करने पर उन्हें जनता को जवाब देना होगा।
जेपीएससी और सीजीएल छात्र आंदोलन से इस मुद्दे का क्या संबंध है?
भाकपा-माले ने खनन विधेयक के विरोध के साथ-साथ जेपीएससी और सीजीएल भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन का भी समर्थन किया है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा ने जेपीएससी प्रथम और द्वितीय की सीबीआई जाँच दबाई और अब छात्र आंदोलन को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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