14 अगस्त 2026
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माइनिंग बिल पर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, शाहदेव बोले — भाजपा संघीय ढाँचे को कमज़ोर कर रही है

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माइनिंग बिल पर कांग्रेस का केंद्र पर हमला, शाहदेव बोले — भाजपा संघीय ढाँचे को कमज़ोर कर रही है

सारांश

झारखंड की खनन आय पर केंद्र के एकाधिकार को लेकर कांग्रेस का गुस्सा फूटा। किशोर नाथ शाहदेव ने भाजपा पर राजशाही की ओर ले जाने का आरोप लगाया, जबकि राजेश ठाकुर ने कहा कि यह बिल मंईयां सम्मान योजना को छीनने की कोशिश है। मुख्यमंत्री सोरेन के पत्र के बाद अब बड़े आंदोलन की चेतावनी।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता किशोर नाथ शाहदेव ने 14 अगस्त 2026 को माइनिंग बिल पर केंद्र सरकार को घेरा और भाजपा पर संघीय ढाँचे को नष्ट करने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर माइनिंग बिल पर पुनर्विचार की माँग की, जिसे कांग्रेस का पूर्ण समर्थन मिला।
शाहदेव के अनुसार झारखंड की खनन आय पर केंद्र का सेस एकाधिकार — 'ज़मीन हमारी, टैक्स उनका' — पूरी तरह अनुचित है।
झारखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि यह बिल मंईयां सम्मान योजना और 12 साल की निवेश प्रतिबद्धताओं को प्रभावित करेगा।
छात्र आंदोलन पर कांग्रेस ने भूख हड़ताल छोड़ संवाद अपनाने की अपील की; सरकार का दावा — 95-98% माँगें मानी गई हैं।

झारखंड की राजधानी रांची से 14 अगस्त 2026 को कांग्रेस नेताओं ने खनन विधेयक (माइनिंग बिल) पर पुनर्विचार की माँग को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र का समर्थन करते हुए कांग्रेस नेता किशोर नाथ शाहदेव ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को संघीय ढाँचे और लोकतंत्र में कोई भरोसा नहीं है और वह देश को राजशाही की ओर ले जाना चाहती है।

शाहदेव का केंद्र पर सीधा आरोप

कांग्रेस नेता किशोर नाथ शाहदेव ने कहा, "कांग्रेस पार्टी ने पिछले 80 साल देश में लोकतंत्र और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मज़बूत करने में बिताए हैं। दूसरी ओर, केंद्र सरकार में भाजपा है, जिसे संघीय ढाँचे और लोकतंत्र में कोई भरोसा नहीं है। वे देश को राजशाही की ओर ले जाना चाहते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि झारखंड के मामले में स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है — "ज़मीन हमारी है, अधिकार हमारे हैं, लेकिन टैक्स उनका है! यह पूरी तरह से अनुचित है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"

शाहदेव के अनुसार, माइनिंग से प्राप्त सेस (उपकर) पर केंद्र का एकाधिकार स्थापित करना संघीय व्यवस्था के विरुद्ध है। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रदेश की जनता इस मुद्दे पर एकजुट होकर खड़ी होगी और आने वाले समय में बड़े आंदोलन के ज़रिये अपने अधिकार वापस कराए जाएँगे।

माइनिंग बिल और झारखंड के हितों पर असर

झारखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि खनन विधेयक झारखंड की मंईयां सम्मान योजना को छीनने का प्रयास है। उनके अनुसार, यह विधेयक संघीय ढाँचे को नुकसान पहुँचाता है और उन कंपनियों को भी प्रभावित करेगा जिन्होंने 12 साल में राज्य में निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। ठाकुर ने कहा कि इस बिल से झारखंड राज्य का हक मारा जाएगा।

गौरतलब है कि झारखंड की अर्थव्यवस्था में खनन क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका है। राज्य के राजस्व का एक बड़ा हिस्सा इसी स्रोत से आता है, ऐसे में सेस पर केंद्र के नियंत्रण का सीधा असर राज्य के वित्तीय स्वायत्तता पर पड़ेगा।

छात्र आंदोलन पर कांग्रेस की अपील

माइनिंग बिल के अलावा, किशोर नाथ शाहदेव ने राज्य में चल रहे छात्र आंदोलन पर भी बात की। उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों से अपील की कि वे भूख हड़ताल का रास्ता छोड़ें और सरकार द्वारा शुरू किए गए संवाद के माध्यम से अपनी माँगें रखें। शाहदेव ने कहा कि सरकार का दावा है कि छात्रों की 95 से 98 प्रतिशत माँगें मान ली गई हैं, और कुछ माँगों पर कानूनी अड़चनों के कारण निर्णय लेना संभव नहीं है।

राजेश ठाकुर ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों से प्रदेश सरकार पर अटूट विश्वास बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार और छात्रों के बीच संवाद में कोई कमी नहीं है और मंत्रियों तथा मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता के साथ छात्रों के मुद्दों पर ध्यान दिया है।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और झारखंड के बीच खनन राजस्व को लेकर तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। मुख्यमंत्री सोरेन का प्रधानमंत्री को पत्र लिखना और कांग्रेस का खुलकर समर्थन में आना — दोनों मिलकर इस मुद्दे को राज्य बनाम केंद्र की राजनीतिक लड़ाई का रूप दे रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि माइनिंग बिल यथावत लागू हुआ तो झारखंड जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों की राजकोषीय स्वायत्तता पर गहरा आघात होगा। आने वाले हफ्तों में इस मुद्दे पर राजनीतिक सरगर्मी और तेज़ होने के संकेत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अपनी अर्थव्यवस्था के लिए बड़े पैमाने पर खनन पर निर्भर हैं, यदि सेस आय का नियंत्रण खो देते हैं तो उनकी कल्याण योजनाओं का वित्तपोषण सीधे खतरे में पड़ेगा। कांग्रेस की 'बड़े आंदोलन' की चेतावनी राजनीतिक दबाव की रणनीति है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या केंद्र संघीय भावना को ध्यान में रखते हुए इस बिल में संशोधन पर विचार करेगा — या यह टकराव न्यायिक मंच तक पहुँचेगा।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माइनिंग बिल पर झारखंड और केंद्र के बीच विवाद क्या है?
झारखंड सरकार का आरोप है कि नया माइनिंग बिल खनन से मिलने वाले सेस (उपकर) पर केंद्र का एकाधिकार स्थापित करता है, जिससे राज्य की वित्तीय स्वायत्तता को नुकसान पहुँचेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर इस बिल पर पुनर्विचार की माँग की है।
कांग्रेस नेता किशोर नाथ शाहदेव ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए?
शाहदेव ने कहा कि भाजपा को संघीय ढाँचे और लोकतंत्र में कोई भरोसा नहीं है और वह देश को राजशाही की ओर ले जाना चाहती है। उन्होंने माइनिंग सेस पर केंद्र के नियंत्रण को झारखंड के साथ सरासर अन्याय बताया।
माइनिंग बिल से झारखंड की मंईयां सम्मान योजना पर क्या असर पड़ेगा?
झारखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर के अनुसार, यह बिल मंईयां सम्मान योजना को छीनने का प्रयास है, क्योंकि इस योजना का वित्तपोषण काफी हद तक खनन राजस्व पर निर्भर है। उन्होंने यह भी कहा कि 12 साल की निवेश प्रतिबद्धता वाली कंपनियाँ भी इससे प्रभावित होंगी।
झारखंड में छात्र आंदोलन पर कांग्रेस का क्या रुख है?
कांग्रेस ने आंदोलनकारी छात्रों से भूख हड़ताल समाप्त कर सरकार के साथ संवाद के रास्ते पर चलने की अपील की है। शाहदेव ने कहा कि सरकार का दावा है कि 95 से 98 प्रतिशत माँगें मान ली गई हैं और शेष माँगों पर कानूनी बाधाएँ हैं।
आगे क्या होने की संभावना है?
कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि केंद्र माइनिंग बिल पर पुनर्विचार नहीं करता, तो झारखंड में बड़े आंदोलन चलाए जाएँगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह विवाद न्यायिक मंच तक भी पहुँच सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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