14 जुलाई 2026
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बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर हमला: झारखंड में अवैध खनन को सत्ता का संरक्षण, कानून-व्यवस्था ध्वस्त

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बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर हमला: झारखंड में अवैध खनन को सत्ता का संरक्षण, कानून-व्यवस्था ध्वस्त

सारांश

झारखंड में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने चाईबासा में हेमंत सोरेन सरकार पर अवैध बालू-कोयला खनन को सत्ता का संरक्षण देने, डीएमएफटी फंड में गड़बड़ी और कानून-व्यवस्था की विफलता का आरोप लगाया। साथ ही आदिवासी संगठन ने हो भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की माँग का ज्ञापन सौंपा।

मुख्य बातें

बाबूलाल मरांडी ने 14 जुलाई को चाईबासा में हेमंत सोरेन सरकार पर कानून-व्यवस्था ध्वस्त होने का आरोप लगाया।
मरांडी के अनुसार, अवैध बालू और कोयला खनन खुलेआम हो रहा है और इसकी कमाई सत्ता-प्रतिष्ठान से जुड़े लोगों तक पहुँच रही है।
पश्चिमी सिंहभूम के डीएमएफटी फंड के उपयोग में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप; निष्पक्ष जाँच की माँग।
आदिवासी हो समाज युवा महासभा ने हो भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने और सरना धर्म कोड लागू करने की माँग का ज्ञापन सौंपा।
कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा , पूर्व सांसद गीता कोड़ा सहित BJP के कई नेता उपस्थित रहे।

झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 14 जुलाई को चाईबासा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार पर कड़ा प्रहार किया और आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है तथा अवैध खनन को सत्ता-प्रतिष्ठान का खुला संरक्षण मिल रहा है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के मेघाहातुबुरू स्थित सेल गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने सरकार को हर मोर्चे पर विफल करार दिया।

अवैध खनन और पुलिस की भूमिका पर सवाल

मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्यभर में अवैध बालू और कोयला खनन खुलेआम जारी है और इससे होने वाली कमाई सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोगों की जेब में जा रही है। उनका कहना था कि पुलिस अपराध नियंत्रण की जगह इन्हीं अवैध कारोबारों से जुड़े मामलों में उलझी हुई है, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा दाँव पर लग गई है। आलोचकों का कहना है कि यह स्थिति खनिज-समृद्ध राज्यों में देखी जाने वाली उस पुरानी समस्या की पुनरावृत्ति है जहाँ राजस्व का बड़ा हिस्सा अनौपचारिक नेटवर्क में समा जाता है।

डीएमएफटी फंड में अनियमितताओं का आरोप

नेता प्रतिपक्ष ने पश्चिमी सिंहभूम जिले में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) के फंड के उपयोग पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस राशि के उपयोग में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुई हैं और माँग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। गौरतलब है कि डीएमएफटी फंड खनन-प्रभावित क्षेत्रों के स्थानीय विकास के लिए होता है और इसके दुरुपयोग के आरोप पहले भी कई राज्यों में उठ चुके हैं।

युवा रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली

मरांडी ने कहा कि राज्य के शिक्षित युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं, जबकि शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था भी बदहाल है। उनके अनुसार, सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और बुनियादी सुविधाओं में सुधार करने में पूरी तरह नाकाम रही है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड की युवा आबादी का एक बड़ा हिस्सा पलायन कर अन्य राज्यों में काम की तलाश करता है।

हो भाषा और सरना धर्म कोड की माँग

इस अवसर पर आदिवासी हो समाज युवा महासभा की केंद्रीय समिति के राष्ट्रीय संगठन सचिव गोपी लागुरी ने मरांडी को एक स्मरण पत्र सौंपा। इसमें केंद्र सरकार से हो भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने और सरना धर्म कोड लागू करने की माँग की गई। महासभा के प्रतिनिधियों का कहना था कि इन मुद्दों को कई बार केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख नेता

इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई, जे.बी. तुबिद सहित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। आगे देखना होगा कि सोरेन सरकार इन आरोपों का जवाब किस रूप में देती है और डीएमएफटी जाँच की माँग पर क्या रुख अपनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ठोस जाँच के परिणाम सार्वजनिक नहीं हुए। असली कसौटी यह है कि क्या इस बार विपक्ष इन आरोपों को दस्तावेज़ी साक्ष्यों के साथ न्यायिक या विधायी मंच तक ले जाता है, या यह केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित रहता है। हो भाषा और सरना धर्म कोड की माँग आदिवासी पहचान की उस गहरी राजनीति को रेखांकित करती है जो झारखंड में हर चुनावी चक्र में केंद्र में आती है — और जिस पर केंद्र सरकार का मौन अब तक अपने आप में एक राजनीतिक संदेश बन चुका है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर क्या आरोप लगाए?
मरांडी ने 14 जुलाई को चाईबासा में आरोप लगाया कि झारखंड में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है, अवैध बालू और कोयला खनन को सत्ता-प्रतिष्ठान का संरक्षण मिल रहा है, और डीएमएफटी फंड के उपयोग में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुई हैं। उन्होंने सरकार को युवा रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के मोर्चे पर भी विफल बताया।
डीएमएफटी फंड क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) खनन-प्रभावित क्षेत्रों के स्थानीय विकास के लिए खनन कंपनियों से एकत्रित राशि से बनाया जाता है। मरांडी ने आरोप लगाया कि पश्चिमी सिंहभूम में इस फंड के उपयोग में बड़ी गड़बड़ियाँ हुई हैं और निष्पक्ष जाँच की माँग की है।
हो भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की माँग क्यों उठाई जा रही है?
आदिवासी हो समाज युवा महासभा का कहना है कि हो भाषा झारखंड और ओडिशा में लाखों आदिवासियों की मातृभाषा है और इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कर आधिकारिक दर्जा दिया जाना चाहिए। यह माँग कई बार केंद्र सरकार के समक्ष रखी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ।
सरना धर्म कोड क्या है?
सरना धर्म कोड आदिवासी समुदायों की उस माँग को संदर्भित करता है जिसमें जनगणना में उनके पारंपरिक प्रकृति-पूजक धर्म को एक अलग धर्म कोड के रूप में दर्ज करने की अपील की जाती है। महासभा ने मरांडी को सौंपे ज्ञापन में इसे लागू करने की माँग दोहराई।
इस कार्यक्रम में कौन-कौन से प्रमुख नेता उपस्थित थे?
चाईबासा के इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई और जे.बी. तुबिद सहित BJP के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
राष्ट्र प्रेस
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