खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026 पर झामुमो सांसद महुआ माजी का विरोध, भूमिपुत्रों के साथ अन्याय बताया
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने 20 अगस्त 2026 को खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 का कड़ा विरोध किया। उन्होंने राज्य के अधिकारों की रक्षा की माँग करते हुए स्पष्ट किया कि झामुमो केंद्र की इस नीति के विरुद्ध लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगी। माजी ने इस विधेयक को झारखंड के भूमिपुत्र-पुत्रियों के साथ 'बड़ा अन्याय' करार दिया।
मुख्य घटनाक्रम
महुआ माजी ने बताया कि पार्टी की बैठक में तीन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई — खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026 का विरोध, परिसीमन का प्रश्न, और एसआईआर से जुड़ी समस्याएँ। उन्होंने माँग की कि केंद्र सरकार इस विधेयक को रद्द करे।
उन्होंने कहा, 'हम ऐसा मानते हैं कि केंद्र सरकार को खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक रद्द करना होगा। केंद्र सरकार दो-तीन काले कानून लेकर आई थी, उसके खिलाफ जिस तरह से किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया, कई लोग शहीद हुए, उसके बाद मजबूरी में केंद्र सरकार ने उसे रद्द किया।'
भूमिपुत्रों के अधिकार और राज्य की योजनाओं पर असर
माजी ने चेताया कि यह विधेयक झारखंड सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को सीधे प्रभावित करेगा। उन्होंने मंईयां सम्मान योजना, आवास योजना और छात्रवृत्ति योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सभी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा, 'इसी तरह ये बिल भी राज्य को काफी नुकसान पहुंचाने वाला है। यह भूमिपुत्र-पुत्रियों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है।' माजी ने सर्वोच्च न्यायालय की नौ जजों की पीठ के उस निर्णय का हवाला दिया, जिसने राज्यों के खनिज अधिकारों को मान्यता दी थी, और केंद्र से पूछा कि क्या वह शीर्ष अदालत के आदेश की भी अनदेखी करेगी।
आंदोलन और पार्टी की रणनीति
माजी ने स्पष्ट किया कि झामुमो एक आंदोलनकारी पार्टी है और शिबू सोरेन के दिखाए रास्ते पर चलते हुए पार्टी के सभी सदस्य और कार्यकर्ता इस संघर्ष में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर आंदोलन शुरू हो चुके हैं और उन्हें रोका भी गया है।
छात्र आंदोलन पर भाजपा पर आरोप
झारखंड में छात्रों की माँगों के संदर्भ में माजी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आरोप लगाया कि उसने कुछ छात्रों के साथ मिलकर दबाव बनाने की कोशिश की और उन्हें राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उकसाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने छात्रहित में निर्णय लिया और अब मामला न्यायालय पर निर्भर है।
आगे क्या होगा
झामुमो के इस विरोध के साथ यह विधेयक संसद में और राज्यों के स्तर पर राजनीतिक विवाद का केंद्र बनता दिख रहा है। आने वाले दिनों में झारखंड सहित अन्य खनिज-समृद्ध राज्यों की प्रतिक्रिया इस बहस की दिशा तय करेगी।