एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026: BJP सांसद संजय सेठ बोले — संविधान से चलता है देश, JMM की जिद नहीं चलेगी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद संजय सेठ ने 2 अक्टूबर 2026 को रांची में मीडिया से बात करते हुए एमएमडीआर (खान और खनिज विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 के विरोध पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश संविधान और कानून से चलता है, किसी दल की जिद से नहीं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) इस केंद्रीय विधेयक का लगातार विरोध कर रही है, जिसके चलते झारखंड में सियासी तनाव बढ़ता जा रहा है।
सेठ का संवैधानिक तर्क
संसद सदस्य सेठ ने कहा, 'देश संविधान से चलता है। जब संसद के अंदर लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा हुई, विधेयक पास हुआ और राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर कर दिए तो देश में कानून बन गया। फिर यह कहना कि हम नहीं मानेंगे, यह कहाँ तक उचित है?' उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के बनाए संविधान का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति या संगठन कानून से ऊपर नहीं हो सकता।
अवैध खनन पर BJP का कड़ा रुख
सेठ ने अवैध खनन को झारखंड के राजस्व के लिए बड़ा खतरा बताया। उनके अनुसार, करोड़ों रुपये जो सरकारी खजाने में आने चाहिए, वे लूट के कारण नहीं पहुँच पाते — और यही धनराशि स्कूलों, अस्पतालों और बुनियादी ढाँचे के निर्माण में काम आनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में एक किलो भी खनिज की लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
छत्तीसगढ़ का उदाहरण
BJP सांसद ने छत्तीसगढ़ का तुलनात्मक उदाहरण पेश किया। उन्होंने बताया कि दस साल पहले छत्तीसगढ़ को खनन रॉयल्टी के रूप में मात्र ₹19 हजार करोड़ मिलते थे, जो अब बढ़कर ₹2 लाख 80 हजार करोड़ हो गया है। सेठ के अनुसार, इस बदलाव की वजह वैध खनन की व्यवस्था है — 'कोई माफिया राज नहीं, कोई चोरी नहीं।' उन्होंने झारखंड सरकार को इससे सीख लेने की नसीहत दी।
मुख्यमंत्री सोरेन पर सीधा निशाना
राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए सेठ ने कहा, 'मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी संविधान की शपथ लेकर आए हैं — क्या वे उसकी अवहेलना करेंगे? राजनीतिक तौर पर मीडिया के सामने कुछ भी बोल देना अलग बात है, लेकिन देश कानून और संविधान से ही चलेगा।' उन्होंने राज्य सरकार की कर नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वैध खनन को प्रोत्साहित करने की बजाय अवैध खनन को बढ़ावा देना उचित नहीं है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026 को लेकर केंद्र और खनिज-सम्पन्न राज्यों के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। JMM सहित कई विपक्षी दल इसे आदिवासी और राज्य के अधिकारों पर अतिक्रमण मानते हैं। अब देखना होगा कि झारखंड सरकार इस कानून के क्रियान्वयन पर क्या रुख अपनाती है और क्या यह विवाद न्यायिक मंच तक पहुँचता है।