झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र 25-26 नवंबर को; MMDR संशोधन और SIR पर प्रस्ताव की तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र 25 और 26 नवंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार, 27 अक्टूबर को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में इस सत्र को बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सत्र में मुख्य रूप से केंद्र के खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 (MMDR Act) और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसे विवादास्पद मुद्दों पर चर्चा किए जाने की संभावना है।
विशेष सत्र क्यों बुलाया गया
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों और SIR के मुद्दे पर विस्तार से विचार-विमर्श की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, 'एसआईआर को लेकर देश में माहौल गरम है' और इंडिया गठबंधन भी इस मसले पर विरोध के स्वर में है। इसी कारण कम अवधि का विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया गया।
सोरेन ने यह भी संकेत दिया कि SIR के अलावा अन्य मुद्दे भी सत्र की कार्यसूची में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने चिंता जताई कि कुछ मामलों में ऐसे दस्तावेज़ माँगे जा सकते हैं जिन्हें उपलब्ध कराना आम नागरिकों के लिए संभव नहीं होगा।
MMDR संशोधन विवाद: राज्य के राजस्व पर खतरा
केंद्र सरकार के खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 में खनिज अधिकारों और खनिजयुक्त भूमि पर राज्यों द्वारा कर या उपकर लगाने पर पाबंदियाँ निर्धारित की गई हैं। झारखंड सरकार का तर्क है कि यह केंद्रीय संशोधन राज्य के राजस्व को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।
गौरतलब है कि झारखंड देश के सर्वाधिक खनिज-समृद्ध राज्यों में से एक है और खनिज उपकर उसकी वित्तीय आत्मनिर्भरता का एक प्रमुख स्रोत है। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सितंबर में यह घोषणा की थी कि सरकार इस कानून को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगी और खनिज उपकर से जुड़े बकाये की वसूली जारी रखेगी।
सर्वोच्च न्यायालय का रुख और कानूनी लड़ाई
झारखंड सरकार पहले ही MMDR संशोधन को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की मंशा सार्वजनिक कर चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और विभिन्न खनिज-संपन्न राज्यों के बीच राजकोषीय अधिकारों को लेकर तनाव बढ़ रहा है। विशेष सत्र के दौरान विधानसभा से इस कानून के विरोध में प्रस्ताव पारित कराने की कोशिश की जाएगी, जिससे केंद्र पर राजनीतिक और संवैधानिक दबाव बनाया जा सके।
SIR विवाद: मतदाता सूची पर सवाल
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मुद्दा भी विशेष सत्र का केंद्र बिंदु बनने जा रहा है। विपक्षी इंडिया गठबंधन के दलों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के तहत ऐसे दस्तावेज़ माँगे जा रहे हैं जो हाशिए पर जीने वाले मतदाताओं — विशेष रूप से आदिवासियों और ग्रामीण आबादी — के लिए जुटाना कठिन है। झारखंड की जनसांख्यिकीय संरचना को देखते हुए यह मुद्दा यहाँ विशेष रूप से संवेदनशील है।
यह पहली बार नहीं है जब किसी राज्य विधानसभा ने SIR के विरोध में विशेष सत्र आयोजित किया हो — इससे पहले कई विपक्ष-शासित राज्यों ने भी इसी मुद्दे पर अपनी विधायिकाओं में प्रस्ताव पारित किए हैं।
आगे क्या होगा
विशेष सत्र 25 नवंबर से शुरू होकर 26 नवंबर को समाप्त होगा। माना जा रहा है कि सत्र में MMDR संशोधन और SIR दोनों मुद्दों पर केंद्र के विरुद्ध प्रस्ताव लाए जाएंगे। यदि विधानसभा से ऐसे प्रस्ताव पारित होते हैं, तो यह केंद्र-राज्य संबंधों में नए तनाव का संकेत होगा और सर्वोच्च न्यायालय में चल रही कानूनी लड़ाई को और धार देगा।