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इंदौर में निवेश ठगी: 'द रैपिड इन्वेस्टर्स' के 11 आरोपी चिह्नित, दिलीप पांडेय व शुभम शर्मा गिरफ्तार

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इंदौर में निवेश ठगी: 'द रैपिड इन्वेस्टर्स' के 11 आरोपी चिह्नित, दिलीप पांडेय व शुभम शर्मा गिरफ्तार

सारांश

इंदौर में 'द रैपिड इन्वेस्टर्स' नामक कंपनी के ज़रिये निवेशकों को ठगने के मामले में पुलिस ने 11 आरोपी चिह्नित किए और 2 को गिरफ्तार किया। ₹1 करोड़ से अधिक के 6 म्यूल खाते, 20 सिम कार्ड और 17 मोबाइल बरामद। डीसीपी राठौर का कहना है — म्यूल खातों पर अभियान जारी रहेगा।

मुख्य बातें

इंदौर में 'द रैपिड इन्वेस्टर्स' के खिलाफ कार्रवाई में 11 आरोपी चिह्नित, दिलीप पांडेय और शुभम शर्मा गिरफ्तार।
पुलिस ने 20 सिम कार्ड , 17 मोबाइल फोन , 1 लैपटॉप और अहम दस्तावेज़ बरामद किए।
जाँच में ₹1 करोड़ से अधिक की राशि वाले 6 म्यूल बैंक खाते सामने आए।
कंपनी के पास केवल निवेश एडवाइज़री का लाइसेंस था; सीधे पैसा लेने का अधिकार नहीं था।
आरोपी शुरुआत में नकली मुनाफ़ा दिखाते थे, बाद में पैसा 'डूबने' की जानकारी देते थे।
शेष 9 चिह्नित आरोपियों की भूमिका की जाँच जारी; फॉरेंसिक विश्लेषण से और खुलासे संभव।

मध्य प्रदेश के इंदौर में निवेशकों से ठगी के एक बड़े मामले में पुलिस ने 27 अक्टूबर 2026 को 'द रैपिड इन्वेस्टर्स' नामक कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए 11 आरोपियों को चिह्नित किया और मुख्य संदिग्धों दिलीप पांडेय व शुभम शर्मा को गिरफ्तार किया। जाँच में ₹1 करोड़ से अधिक की राशि वाले 6 म्यूल बैंक खाते सामने आए हैं, जिनके लेनदेन की पड़ताल जारी है।

मामले का घटनाक्रम

पुलिस को शिकायत मिलने के बाद सबसे पहले दिलीप पांडेय को गिरफ्तार किया गया। उससे पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने थाना विजयनगर क्षेत्र में स्थित प्रिंसेस स्काइप बिजनेस पार्क के अंदर संचालित 'द रैपिड इन्वेस्टर्स' के कार्यालय पर दबिश दी।

इस छापेमारी में पुलिस ने 20 सिम कार्ड, 17 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज़ बरामद किए। साथ ही 6 बैंक खातों की पासबुक और चेकबुक भी हाथ लगीं, जिनमें कथित तौर पर ₹1 करोड़ से अधिक की राशि जमा पाई गई।

ठगी का तरीका

इंदौर के डीसीपी अमन राठौर ने बताया कि इस कंपनी के पास केवल निवेशकों को एडवाइज़री देने का लाइसेंस था — अर्थात वह बता सकती थी कि कहाँ निवेश करें, लेकिन स्वयं पैसा लेकर उसे निवेश करने का उसे कोई लाइसेंस नहीं था। इसके बावजूद, कंपनी ने निवेशकों से सीधे धनराशि ली।

डीसीपी राठौर के अनुसार, आरोपी शुरुआत में निवेशकों को कुछ मुनाफ़ा दिखाते थे, जिससे उनका विश्वास बनता था। इसके बाद बाद में निवेशकों को सूचित किया जाता था कि उनका पैसा 'डूब गया' है। म्यूल खाते उपलब्ध कराने का काम कथित तौर पर दिलीप पांडेय करता था, जबकि कंपनी की स्थापना शुभम शर्मा ने की थी, जो मूल रूप से सतना का निवासी बताया गया है।

चिह्नित आरोपियों की सूची

पुलिस ने अब तक जिन 11 संदिग्धों को चिह्नित किया है, उनमें शुभम शर्मा, अहमद राजा, भरत भूषण, नरेश, विजेंद्र, अमित, रमनदीप, नरेंद्र, योगेश तथा अन्य शामिल हैं। इनमें से दिलीप पांडेय और शुभम शर्मा गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि शेष आरोपियों की भूमिका की जाँच की जा रही है।

म्यूल खातों पर इंदौर पुलिस का अभियान

डीसीपी अमन राठौर ने बताया कि इंदौर पुलिस संदिग्ध बैंक खातों — जिन्हें 'म्यूल अकाउंट' कहा जाता है — के विरुद्ध लगातार अभियान चला रही है। यह कार्रवाई उसी अभियान की कड़ी है। गौरतलब है कि म्यूल खाते वे बैंक खाते होते हैं जो फर्जी या किराए पर लेकर अवैध धन के लेनदेन के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में ऑनलाइन निवेश ठगी और म्यूल खातों के ज़रिये साइबर अपराध के मामलों में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की जा रही है। इंदौर जैसे व्यावसायिक रूप से सक्रिय शहरों में ऐसे फर्जी निवेश नेटवर्क अधिक सक्रिय पाए जाते हैं।

आगे की जाँच

पुलिस अब बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेज़ों की गहन फॉरेंसिक जाँच कर रही है, ताकि ठगी के तरीके, पीड़ितों की संख्या और संभावित नेटवर्क का पूरा खुलासा हो सके। 6 बैंक खातों में जमा राशि के स्रोत और उसके उपयोग की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, जाँच के आगे बढ़ने पर और खुलासे होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी सीधे धन लिया गया — यह नियामकीय निगरानी की स्पष्ट विफलता है। म्यूल खातों के ज़रिये रकम के लेनदेन का यह तरीका दर्शाता है कि अपराधी बैंकिंग प्रणाली की खामियों का व्यवस्थित रूप से दोहन कर रहे हैं। असली सवाल यह है कि पीड़ित निवेशकों की वास्तविक संख्या और नुकसान कितना है — जिसका खुलासा फॉरेंसिक जाँच पूरी होने के बाद ही संभव होगा।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'द रैपिड इन्वेस्टर्स' ठगी मामला क्या है?
इंदौर में 'द रैपिड इन्वेस्टर्स' नामक कंपनी पर आरोप है कि उसने निवेशकों से सीधे धन लेकर उन्हें ठगा, जबकि उसके पास केवल निवेश एडवाइज़री का लाइसेंस था। कंपनी पहले नकली मुनाफ़ा दिखाती थी और बाद में पैसा डूब जाने की जानकारी देती थी।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
अब तक दो मुख्य आरोपी — दिलीप पांडेय और शुभम शर्मा — गिरफ्तार किए गए हैं। पुलिस ने कुल 11 संदिग्धों को चिह्नित किया है और शेष की भूमिका की जाँच जारी है।
म्यूल खाता क्या होता है और इस मामले में इसकी क्या भूमिका है?
म्यूल खाते वे बैंक खाते होते हैं जो फर्जी या किराए पर लेकर अवैध धन के लेनदेन के लिए उपयोग किए जाते हैं। इस मामले में पुलिस को ₹1 करोड़ से अधिक की राशि वाले 6 ऐसे खाते मिले हैं, जिनकी पासबुक और चेकबुक भी बरामद हुई हैं।
पुलिस ने छापेमारी में क्या बरामद किया?
पुलिस ने 20 सिम कार्ड, 17 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप और महत्वपूर्ण दस्तावेज़ बरामद किए हैं। इसके अलावा 6 म्यूल बैंक खातों की पासबुक और चेकबुक भी ज़ब्त की गई हैं।
आगे इस मामले में क्या होगा?
पुलिस बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेज़ों की फॉरेंसिक जाँच कर रही है। बैंक खातों में जमा राशि के स्रोत और उपयोग की पड़ताल भी जारी है, जिसके बाद और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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