इंदौर पुलिस का कमाल: 5 घंटे में दो अपहृत बच्चे बचाए, शेयर बाजार में घाटे से उपजी थी साजिश

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इंदौर पुलिस का कमाल: 5 घंटे में दो अपहृत बच्चे बचाए, शेयर बाजार में घाटे से उपजी थी साजिश

सारांश

इंदौर पुलिस ने 23 अप्रैल की रात तिरुपति गार्डन से अपहृत दो नाबालिग बच्चों को महज 5 घंटों में बचाया। शेयर बाजार में घाटे से परेशान चार आरोपियों ने ₹15 लाख फिरौती के लिए यह वारदात की थी। पुलिस ने सीसीटीवी और तकनीकी निगरानी से दत्त नगर अपार्टमेंट में दबिश देकर सभी को गिरफ्तार किया।

Key Takeaways

  • 23 अप्रैल 2025 की रात इंदौर के तिरुपति गार्डन से दो नाबालिग लड़कों का अपहरण किया गया।
  • पालासिया पुलिस ने सिर्फ 5 घंटों में बच्चों को दत्त नगर अपार्टमेंट से सुरक्षित बचाया।
  • अपहरणकर्ताओं ने ₹15 लाख फिरौती की मांग की थी और गंभीर नतीजों की धमकी दी थी।
  • गिरफ्तार चार आरोपी — राधिका प्रजापति, तनीशा सेन, ललित सेन और विनीत प्रजापति — ने शेयर बाजार में घाटे को अपराध का कारण बताया।
  • सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी निगरानी ने आरोपियों को ट्रैक करने में निर्णायक भूमिका निभाई।
  • बच्चों को एमवाई अस्पताल में चिकित्सा जांच के बाद परिवार को सौंपा गया; आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है।

इंदौर, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के इंदौर में पालासिया पुलिस ने 23 अप्रैल 2025 की रात एक सुनियोजित बाल अपहरण कांड को महज पाँच घंटों में सुलझाकर दो मासूम लड़कों को सुरक्षित बचा लिया और इस वारदात के पीछे शामिल चार आरोपियों को दबोच लिया। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने शेयर बाजार में भारी नुकसान की भरपाई के लिए फिरौती की नीयत से इस अपराध की योजना बनाई थी।

कैसे हुई वारदात — घटनाक्रम

23 अप्रैल की शाम लाला राम नगर स्थित तिरुपति गार्डन में खेलने गए गीता नगर और खाटिक मोहल्ला के दो नाबालिग लड़के घर नहीं लौटे तो परिवारों में हड़कंप मच गया। रात करीब 8:45 बजे पुलिस को सूचना मिली और तत्काल जांच शुरू हो गई।

सीसीटीवी फुटेज ने खुलासा किया कि एक युवती बच्चों को चिप्स, कैंडी और मोबाइल पर पालतू जानवरों की तस्वीरें दिखाकर बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गई। इसके कुछ ही देर बाद शिकायतकर्ता के पास ₹15 लाख की फिरौती की मांग वाला फोन आया, जिसमें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई।

पुलिस की बिजली-तेज कार्रवाई

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर संयुक्त टीमें गठित की गईं। होटलों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक स्थानों पर पुलिसकर्मी तैनात किए गए। तकनीकी निगरानी और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण के जरिए संदिग्धों को घटनास्थल से करीब 15 किलोमीटर दूर दत्त नगर के एक अपार्टमेंट तक ट्रैक किया गया।

इलाके की घेराबंदी कर दी गई और समन्वित अभियान के तहत आरोपियों को भागने की कोशिश करते हुए धर दबोचा गया। दोनों बच्चे सुरक्षित मिले और उन्हें चिकित्सा जांच के लिए एमवाई अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से उन्हें परिवार को सौंप दिया गया।

आरोपियों की पहचान और कबूलनामा

पुलिस ने गिरफ्तार चारों आरोपियों की पहचान राधिका प्रजापति, तनीशा सेन, ललित सेन और विनीत प्रजापति के रूप में की है। राधिका और विनीत आपस में भाई-बहन हैं।

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि शेयर बाजार में भारी घाटे के बाद उन्होंने फिरौती के जरिए पैसे जुटाने की योजना बनाई। गिरोह ने घटना से दो दिन पहले से रेकी शुरू कर दी थी और एक लड़के को पहले भी एक फ्लैट में ले जाने का प्रयास किया था।

जांचकर्ताओं के अनुसार, अपहरण के बाद आरोपी महिला बच्चों को राजेंद्र नगर स्थित एक फ्लैट में ले गई, उनके वीडियो रिकॉर्ड किए और बच्चों के खाना माँगने पर उन्हें दूध से बनी सेवई खिलाई। अपराध में इस्तेमाल मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं।

गहरा संदर्भ — शेयर बाजार का दबाव और बढ़ते अपहरण

यह मामला महज एक अपहरण नहीं, बल्कि शेयर बाजार की अस्थिरता से उपजी आर्थिक हताशा का खतरनाक परिणाम है। हाल के वर्षों में भारत में रिटेल निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन बाजार की उथल-पुथल में कई लोग भारी नुकसान उठा रहे हैं। जब वित्तीय दबाव चरम पर पहुँचता है, तो कुछ लोग आपराधिक रास्ता चुनते हैं — यह प्रवृत्ति चिंताजनक है।

मध्य प्रदेश में बाल अपहरण के मामलों पर नजर डालें तो एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में हर साल सैकड़ों बच्चे लापता होते हैं। इंदौर जैसे महानगर में जहाँ आबादी का घनत्व अधिक है, वहाँ ऐसी वारदातें और भी चिंताजनक हैं। पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह घटना यह भी सवाल उठाती है कि सार्वजनिक उद्यानों और आवासीय क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा के लिए निगरानी तंत्र कितना मजबूत है।

इस मामले में सीसीटीवी की भूमिका निर्णायक रही — यह साबित करता है कि शहरी निगरानी अवसंरचना में निवेश कितना जरूरी है। चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जा रहा है और आगे की जाँच जारी है।

Point of View

लेकिन इस घटना का असली संदेश यह है कि शेयर बाजार की अस्थिरता अब केवल वित्तीय नुकसान तक सीमित नहीं रही — यह सामाजिक सुरक्षा के लिए भी खतरा बन रही है। जब पढ़े-लिखे लोग बाजार में घाटे के बाद बच्चों का अपहरण जैसे घृणित अपराध की ओर मुड़ते हैं, तो यह मानसिक स्वास्थ्य संकट और वित्तीय साक्षरता की कमी दोनों को उजागर करता है। मुख्यधारा की मीडिया इसे महज एक क्राइम स्टोरी की तरह कवर कर रही है, जबकि असली सवाल यह है कि आर्थिक दबाव में डूबे नागरिकों के लिए सरकार की काउंसलिंग और सहायता प्रणाली कहाँ है। सीसीटीवी और तकनीकी निगरानी ने इस बार बच्चों को बचाया — लेकिन हर शहर, हर गली में यह सुविधा नहीं है।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

इंदौर में दो बच्चों का अपहरण कब और कहाँ हुआ?
23 अप्रैल 2025 की शाम लाला राम नगर स्थित तिरुपति गार्डन से दो नाबालिग लड़कों का अपहरण किया गया। बच्चे रोज की तरह खेलने गए थे लेकिन घर नहीं लौटे।
इंदौर अपहरण कांड में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए और उनके नाम क्या हैं?
पुलिस ने चार आरोपियोंराधिका प्रजापति, तनीशा सेन, ललित सेन और विनीत प्रजापति को गिरफ्तार किया। राधिका और विनीत भाई-बहन हैं।
इंदौर के बच्चों के अपहरण के पीछे क्या कारण था?
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि शेयर बाजार में भारी नुकसान के बाद उन्होंने ₹15 लाख फिरौती वसूलने के लिए बच्चों का अपहरण किया। गिरोह ने दो दिन पहले से रेकी की थी।
इंदौर पुलिस ने अपहृत बच्चों को कितने समय में बचाया?
इंदौर पुलिस ने महज पाँच घंटों के भीतर दोनों बच्चों को दत्त नगर के एक अपार्टमेंट से सुरक्षित बचाया। सीसीटीवी और तकनीकी निगरानी इस सफलता में अहम रही।
बचाए गए बच्चों को कहाँ ले जाया गया?
बचाए गए दोनों बच्चों को चिकित्सा जांच के लिए एमवाई अस्पताल, इंदौर ले जाया गया। जाँच के बाद उन्हें उनके परिवार को सौंप दिया गया।
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