14 अगस्त 2026
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MMDR संशोधन विधेयक 2026: भाजपा के आदित्य साहू का हेमंत सोरेन पर पलटवार, भ्रम फैलाने का आरोप

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MMDR संशोधन विधेयक 2026: भाजपा के आदित्य साहू का हेमंत सोरेन पर पलटवार, भ्रम फैलाने का आरोप

सारांश

MMDR संशोधन विधेयक 2026 पर सियासी जंग तेज हो गई है। BJP के आदित्य साहू ने हेमंत सोरेन पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया और झारखंड में महज 3 खनिज ब्लॉकों की नीलामी बनाम ओडिशा की 45 और छत्तीसगढ़ की 49 का आँकड़ा पेश कर राज्य सरकार को घेरा।

मुख्य बातें

BJP प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने 14 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर MMDR संशोधन विधेयक के ज़रिए जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।
साहू के अनुसार विधेयक से राज्यों की रॉयल्टी, DMF हिस्सेदारी और नीलामी प्रीमियम पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
देशभर में 434 खनिज ब्लॉकों की नीलामी के मुकाबले झारखंड में केवल 3 ब्लॉक नीलाम हुए; ओडिशा में 45 और छत्तीसगढ़ में 49 ।
साहू ने बोकारो, रांची, धनबाद समेत कई जिलों में DMF फंड में कथित तौर पर ₹2,000 करोड़ की अनियमितता का आरोप लगाया — स्वतंत्र पुष्टि नहीं।
सोरेन द्वारा मंईयां सम्मान और अबुआ आवास योजनाओं पर खतरे की आशंका को BJP ने राजनीतिक विचलन की कोशिश बताया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने 14 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि वे खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 — जिसे MMDR संशोधन विधेयक के नाम से जाना जाता है — के बहाने जनता को गुमराह कर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। साहू ने स्पष्ट किया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और विपक्ष की ओर से जताई जा रही आशंकाएं पूरी तरह बेबुनियाद हैं।

विधेयक का मूल उद्देश्य क्या है

साहू ने कहा कि खनिज पर उपकर (सेस) का विषय केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश से जुड़ा मसला है। उनके अनुसार, संशोधन का मूल उद्देश्य खनन क्षेत्र में एकरूपता लाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार राज्यों के भूमि और खनिज संबंधी अधिकार समाप्त नहीं कर रही, बल्कि एक समान राष्ट्रीय ढाँचा तैयार कर रही है। संशोधन के तहत राज्य सरकारें खनिजों पर कर, सेस या अन्य लेवी लगा सकती हैं, परन्तु केंद्र द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन अनिवार्य होगा।

राज्यों की रॉयल्टी और राजस्व पर असर

साहू ने दावा किया कि इस विधेयक से राज्यों को मिलने वाली रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, जिला खनिज फाउंडेशन (DMF), राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट और जीएसटी में हिस्सेदारी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह विधेयक खनन क्षेत्र को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और निवेश के अनुकूल बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है, जिससे निवेश, उत्पादन, रोज़गार, बुनियादी ढाँचे और ऊर्जा सुरक्षा को बल मिलेगा।

झारखंड में खनिज नीलामी की धीमी रफ्तार पर सवाल

साहू ने झारखंड सरकार की खनिज नीलामी में सुस्ती को लेकर कड़ी आलोचना की। उन्होंने आँकड़े पेश करते हुए कहा कि देशभर में 434 खनिज ब्लॉकों की नीलामी हुई, जबकि झारखंड में केवल 3 ब्लॉकों की नीलामी हो सकी। इसकी तुलना में ओडिशा में 45 और छत्तीसगढ़ में 49 खनिज ब्लॉकों की नीलामी हुई। उनके अनुसार, राज्य सरकार को खनिज क्षेत्र से राजस्व बढ़ाने के लिए नीलामी प्रक्रिया पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

DMF फंड में कथित अनियमितताओं का आरोप

साहू ने जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) फंड में कथित गड़बड़ियों का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि बोकारो, चाईबासा, रांची, कोडरमा, रामगढ़ और धनबाद समेत कई जिलों में कथित तौर पर लगभग ₹2,000 करोड़ की अनियमितताएं हुई हैं, जिनमें अकेले बोकारो में ₹631 करोड़ की कथित गड़बड़ी शामिल है। हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

सरकार पर ध्यान भटकाने का आरोप

साहू ने मुख्यमंत्री सोरेन द्वारा मंईयां सम्मान और अबुआ आवास जैसी योजनाओं पर असर पड़ने की आशंका जताए जाने को सरकार की नाकामियों से ध्यान हटाने की कोशिश बताया। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में छात्र परीक्षा और भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, और ऐसे समय में मुख्यमंत्री का नया आंदोलन की घोषणा करना इस मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाने की रणनीति हो सकती है। आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव के और तीखे होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन झारखंड की खनिज क्षमता और वास्तविक राजस्व वसूली के बीच की खाई एक वास्तविक प्रशासनिक विफलता को रेखांकित करती है। DMF में ₹2,000 करोड़ की कथित गड़बड़ी के आरोप — जो अभी सत्यापित नहीं हैं — यदि जाँच में सही निकले, तो यह उन्हीं आदिवासी समुदायों को नुकसान पहुँचाने वाली होगी जिनके नाम पर यह फंड बना था। मुख्यधारा की कवरेज इस विधेयक को केवल केंद्र-राज्य टकराव के रूप में देख रही है, जबकि असली सवाल यह है कि खनिज समृद्ध होने के बावजूद झारखंड के आदिवासी जिले विकास सूचकांकों में पिछड़े क्यों हैं।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

MMDR संशोधन विधेयक 2026 क्या है और इसका झारखंड पर क्या असर होगा?
खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 संसद से पारित एक केंद्रीय कानून है जो खनन क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एकरूपता लाने का प्रयास करता है। BJP के अनुसार इससे झारखंड की रॉयल्टी, DMF हिस्सेदारी या नीलामी प्रीमियम पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जबकि मुख्यमंत्री सोरेन इसे राज्य के खनिज अधिकारों के लिए खतरा मान रहे हैं।
आदित्य साहू ने हेमंत सोरेन पर क्या आरोप लगाए?
BJP प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन MMDR विधेयक के बहाने जनता में भ्रम फैलाकर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। साहू का कहना है कि सरकार अपनी नाकामियों — जैसे भर्ती अनियमितताएं और धीमी खनिज नीलामी — से ध्यान हटाने के लिए यह रणनीति अपना रही है।
झारखंड में खनिज ब्लॉकों की नीलामी इतनी कम क्यों हुई?
साहू के अनुसार देशभर में 434 खनिज ब्लॉकों की नीलामी हुई, लेकिन झारखंड में केवल 3 ब्लॉक नीलाम हो सके, जबकि ओडिशा में 45 और छत्तीसगढ़ में 49 ब्लॉकों की नीलामी हुई। उन्होंने इसे राज्य सरकार की प्रशासनिक विफलता बताया और कहा कि नीलामी पर ध्यान देने से राजस्व में वृद्धि हो सकती है।
DMF फंड में कथित अनियमितताओं के आरोप क्या हैं?
साहू ने आरोप लगाया कि बोकारो, चाईबासा, रांची, कोडरमा, रामगढ़ और धनबाद समेत कई जिलों में जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) फंड में कथित तौर पर लगभग ₹2,000 करोड़ की अनियमितताएं हुई हैं, जिनमें बोकारो में ₹631 करोड़ की कथित गड़बड़ी शामिल है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
क्या MMDR विधेयक से मंईयां सम्मान और अबुआ आवास जैसी योजनाएं बंद हो सकती हैं?
मुख्यमंत्री सोरेन ने आशंका जताई है कि विधेयक से राज्य की कल्याण योजनाओं पर असर पड़ सकता है। हालाँकि BJP के आदित्य साहू ने इसे निराधार बताते हुए कहा कि सरकार अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए इन योजनाओं के बंद होने का डर दिखा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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