MMDR संशोधन विधेयक 2026: भाजपा के आदित्य साहू का हेमंत सोरेन पर पलटवार, भ्रम फैलाने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने 14 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि वे खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 — जिसे MMDR संशोधन विधेयक के नाम से जाना जाता है — के बहाने जनता को गुमराह कर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। साहू ने स्पष्ट किया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और विपक्ष की ओर से जताई जा रही आशंकाएं पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
विधेयक का मूल उद्देश्य क्या है
साहू ने कहा कि खनिज पर उपकर (सेस) का विषय केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश से जुड़ा मसला है। उनके अनुसार, संशोधन का मूल उद्देश्य खनन क्षेत्र में एकरूपता लाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार राज्यों के भूमि और खनिज संबंधी अधिकार समाप्त नहीं कर रही, बल्कि एक समान राष्ट्रीय ढाँचा तैयार कर रही है। संशोधन के तहत राज्य सरकारें खनिजों पर कर, सेस या अन्य लेवी लगा सकती हैं, परन्तु केंद्र द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन अनिवार्य होगा।
राज्यों की रॉयल्टी और राजस्व पर असर
साहू ने दावा किया कि इस विधेयक से राज्यों को मिलने वाली रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, जिला खनिज फाउंडेशन (DMF), राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट और जीएसटी में हिस्सेदारी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह विधेयक खनन क्षेत्र को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और निवेश के अनुकूल बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है, जिससे निवेश, उत्पादन, रोज़गार, बुनियादी ढाँचे और ऊर्जा सुरक्षा को बल मिलेगा।
झारखंड में खनिज नीलामी की धीमी रफ्तार पर सवाल
साहू ने झारखंड सरकार की खनिज नीलामी में सुस्ती को लेकर कड़ी आलोचना की। उन्होंने आँकड़े पेश करते हुए कहा कि देशभर में 434 खनिज ब्लॉकों की नीलामी हुई, जबकि झारखंड में केवल 3 ब्लॉकों की नीलामी हो सकी। इसकी तुलना में ओडिशा में 45 और छत्तीसगढ़ में 49 खनिज ब्लॉकों की नीलामी हुई। उनके अनुसार, राज्य सरकार को खनिज क्षेत्र से राजस्व बढ़ाने के लिए नीलामी प्रक्रिया पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
DMF फंड में कथित अनियमितताओं का आरोप
साहू ने जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) फंड में कथित गड़बड़ियों का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि बोकारो, चाईबासा, रांची, कोडरमा, रामगढ़ और धनबाद समेत कई जिलों में कथित तौर पर लगभग ₹2,000 करोड़ की अनियमितताएं हुई हैं, जिनमें अकेले बोकारो में ₹631 करोड़ की कथित गड़बड़ी शामिल है। हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
सरकार पर ध्यान भटकाने का आरोप
साहू ने मुख्यमंत्री सोरेन द्वारा मंईयां सम्मान और अबुआ आवास जैसी योजनाओं पर असर पड़ने की आशंका जताए जाने को सरकार की नाकामियों से ध्यान हटाने की कोशिश बताया। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में छात्र परीक्षा और भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, और ऐसे समय में मुख्यमंत्री का नया आंदोलन की घोषणा करना इस मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाने की रणनीति हो सकती है। आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव के और तीखे होने की संभावना है।