MMDR संशोधन बिल से झारखंड को ₹14,000 करोड़ का नुकसान — सुबोधकांत सहाय का केंद्र पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने 25 अगस्त को रांची स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में संसद से पारित खनिज संसाधन (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक (MMDR Amendment Bill) को झारखंड के आर्थिक और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संशोधन से राज्य को खनिज सेस के रूप में मिलने वाले करीब ₹14,000 करोड़ रुपये के राजस्व पर संकट खड़ा हो सकता है, जिसका सीधा असर झारखंड के साढ़े तीन करोड़ नागरिकों की जनकल्याणकारी योजनाओं पर पड़ेगा।
क्या है विवाद का केंद्र
सहाय के अनुसार, झारखंड सरकार ने चालू वित्त वर्ष के बजट में खनिज सेस से प्राप्त इस राशि का स्पष्ट प्रावधान किया है। उनका तर्क है कि यदि MMDR संशोधन के कारण यह राजस्व राज्य को नहीं मिलता, तो पेयजल आपूर्ति सहित अनेक जनकल्याणकारी योजनाएँ बाधित हो सकती हैं। उन्होंने सवाल उठाया, 'इस ₹14,000 करोड़ के नुकसान की भरपाई कौन करेगा — क्या केंद्र सरकार इसकी गारंटी लेगी?'
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
सहाय ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ पहले ही राज्यों के खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकारों पर एक महत्वपूर्ण निर्णय दे चुकी है। उनका आरोप है कि इस न्यायिक व्यवस्था के बावजूद केंद्र सरकार ने लोकसभा में अपने संख्या बल का उपयोग करते हुए यह संशोधन बिल पारित करा लिया — जो कि राज्यों के संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी है।
भाजपा सांसदों से अपील
कांग्रेस नेता ने झारखंड से निर्वाचित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसदों से भी अपील की कि वे पार्टी लाइन से ऊपर उठकर राज्य के हित में इस बिल के विरुद्ध आवाज़ उठाएँ। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी एक दल या सरकार का नहीं, बल्कि झारखंड की जनता के आर्थिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है।
राज्य की विकास योजनाओं पर संभावित असर
सहाय ने चेतावनी दी कि खनिज राजस्व में कमी का असर केवल कल्याण योजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा — इससे राज्य की पुलिसिंग और विकास परियोजनाएँ भी प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि आने वाले समय में भूमि अधिग्रहण और खनन गतिविधियों से संबंधित मामलों में केंद्रीय बलों की भूमिका बढ़ सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में खनन से जुड़े विस्थापन और आदिवासी अधिकारों का मुद्दा पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है।
आगे की रणनीति
सहाय ने घोषणा की कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) MMDR संशोधन बिल के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन चलाएगी। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होकर झारखंड के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए साझा मंच बनाने की अपील की। झारखंड की स्थापना ही यहाँ के लोगों के अधिकारों और समस्याओं को ध्यान में रखकर हुई थी — यह याद दिलाते हुए सहाय ने कहा कि इस विरासत को कमज़ोर नहीं होने दिया जाएगा।