खनिज संशोधन विधेयक 2026: तमिलनाडु के ₹2,265 करोड़ के राजस्व पर खतरा, वाइको की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा सांसद और एमडीएमके नेता दुरई वाइको ने आगाह किया है कि खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 तमिलनाडु के राजस्व को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है और राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता को संवैधानिक रूप से कमज़ोर कर सकता है। यह विधेयक 12 अगस्त को लोकसभा और 13 अगस्त को राज्यसभा में पारित हो चुका है।
मुख्य घटनाक्रम
दुरई वाइको ने शनिवार को तमिलनाडु की वित्त मंत्री मैरी विल्सन से मुलाकात कर विधेयक के उन प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी जो राज्य सरकारों की शक्तियों और वित्तीय संसाधनों को सीमित कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से व्यक्तिगत रूप से मिलकर इस विधेयक को संसदीय स्थायी समिति के पास विस्तृत जाँच हेतु भेजने का अनुरोध किया था।
वाइको ने यह भी बताया कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक संशोधन प्रस्तुत किया था, जिसमें राज्यों की कराधान शक्तियों की रक्षा के लिए धारा 9डी को हटाने की माँग की गई थी। बावजूद इसके, केंद्र सरकार ने विपक्ष की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए व्यापक बहस के बिना दोनों सदनों में विधेयक पारित करा लिया।
धारा 9डी: विवाद की जड़
वाइको के अनुसार, विधेयक में नई जोड़ी गई धारा 9डी राज्य सरकारों को खनिज अधिकारों और खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने से रोकती है। उनका कहना है कि इस प्रावधान के लागू होने से राज्य सरकारें लाखों-करोड़ों रुपये के राजस्व और बकाया राशि की वसूली करने में असमर्थ हो जाएंगी।
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 2024 में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था कि राज्यों को खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने का अधिकार है। इसी फैसले के आधार पर तमिलनाडु सरकार ने तमिलनाडु खनिज युक्त भूमि कर अधिनियम, 2024 लागू किया और 2025 में संबंधित नियम बनाए। राज्य ने 4 अप्रैल, 2025 से इस कर की वसूली शुरू की।
तमिलनाडु के राजस्व पर असर
वाइको ने ठोस आँकड़े पेश करते हुए बताया कि भूविज्ञान और खनन विभाग ने 2025-26 के दौरान कुल ₹4,395.68 करोड़ का राजस्व अर्जित किया, जिसमें से ₹2,265 करोड़ अकेले खनिज युक्त भूमि कर से प्राप्त हुए। यदि संशोधन लागू होता है, तो यह महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत बाधित हो सकता है।
संघीय ढाँचे पर सवाल
वाइको ने इस बात पर जोर दिया कि यह विवाद केवल राजस्व हानि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राज्यों की संवैधानिक शक्तियाँ, वित्तीय स्वायत्तता और भारत की संघीय संरचना भी दाँव पर है। उन्होंने वित्त मंत्री मैरी विल्सन से आग्रह किया कि वे केंद्र पर तमिलनाडु के वित्तीय अधिकारों की रक्षा और उचित कानूनी कार्रवाई के लिए दबाव डालें।
सरकार की प्रतिक्रिया
वित्त मंत्री मैरी विल्सन ने वाइको को आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार इस मामले में उचित कदम उठाएगी। यह मुद्दा आने वाले दिनों में केंद्र-राज्य संबंधों की कसौटी बन सकता है, खासकर तब जब सर्वोच्च न्यायालय के 2024 के फैसले को इस संशोधन के ज़रिये प्रभावहीन करने का आरोप लग रहा है।