15 अगस्त 2026
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खनिज संशोधन विधेयक 2026: तमिलनाडु के ₹2,265 करोड़ के राजस्व पर खतरा, वाइको की चेतावनी

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खनिज संशोधन विधेयक 2026: तमिलनाडु के ₹2,265 करोड़ के राजस्व पर खतरा, वाइको की चेतावनी

सारांश

खान और खनिज संशोधन विधेयक 2026 की धारा 9डी तमिलनाडु के ₹2,265 करोड़ के खनिज कर राजस्व पर सीधा खतरा है — और सर्वोच्च न्यायालय के 2024 के संविधान पीठ के फैसले को संसदीय रास्ते से पलटने का प्रयास भी। एमडीएमके सांसद दुरई वाइको ने राज्य की वित्त मंत्री से मिलकर कानूनी लड़ाई की नींव रख दी है।

मुख्य बातें

खान और खनिज संशोधन विधेयक, 2026 को 12 अगस्त को लोकसभा और 13 अगस्त को राज्यसभा ने पारित किया।
विधेयक की धारा 9डी राज्यों को खनिज अधिकारों और खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने से रोकती है।
तमिलनाडु को 2025-26 में खनिज युक्त भूमि कर से ₹2,265 करोड़ प्राप्त हुए; कुल खनन राजस्व ₹4,395.68 करोड़ रहा।
सर्वोच्च न्यायालय की नौ सदस्यीय पीठ ने 2024 में राज्यों को खनिज भूमि पर कर लगाने का अधिकार दिया था।
एमडीएमके सांसद दुरई वाइको ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को धारा 9डी हटाने का संशोधन प्रस्तुत किया था, जिसे नज़रअंदाज़ किया गया।
तमिलनाडु की वित्त मंत्री मैरी विल्सन ने मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय की सरकार की ओर से उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया।

लोकसभा सांसद और एमडीएमके नेता दुरई वाइको ने आगाह किया है कि खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 तमिलनाडु के राजस्व को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है और राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता को संवैधानिक रूप से कमज़ोर कर सकता है। यह विधेयक 12 अगस्त को लोकसभा और 13 अगस्त को राज्यसभा में पारित हो चुका है।

मुख्य घटनाक्रम

दुरई वाइको ने शनिवार को तमिलनाडु की वित्त मंत्री मैरी विल्सन से मुलाकात कर विधेयक के उन प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी जो राज्य सरकारों की शक्तियों और वित्तीय संसाधनों को सीमित कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से व्यक्तिगत रूप से मिलकर इस विधेयक को संसदीय स्थायी समिति के पास विस्तृत जाँच हेतु भेजने का अनुरोध किया था।

वाइको ने यह भी बताया कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक संशोधन प्रस्तुत किया था, जिसमें राज्यों की कराधान शक्तियों की रक्षा के लिए धारा 9डी को हटाने की माँग की गई थी। बावजूद इसके, केंद्र सरकार ने विपक्ष की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए व्यापक बहस के बिना दोनों सदनों में विधेयक पारित करा लिया।

धारा 9डी: विवाद की जड़

वाइको के अनुसार, विधेयक में नई जोड़ी गई धारा 9डी राज्य सरकारों को खनिज अधिकारों और खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने से रोकती है। उनका कहना है कि इस प्रावधान के लागू होने से राज्य सरकारें लाखों-करोड़ों रुपये के राजस्व और बकाया राशि की वसूली करने में असमर्थ हो जाएंगी।

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 2024 में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था कि राज्यों को खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने का अधिकार है। इसी फैसले के आधार पर तमिलनाडु सरकार ने तमिलनाडु खनिज युक्त भूमि कर अधिनियम, 2024 लागू किया और 2025 में संबंधित नियम बनाए। राज्य ने 4 अप्रैल, 2025 से इस कर की वसूली शुरू की।

तमिलनाडु के राजस्व पर असर

वाइको ने ठोस आँकड़े पेश करते हुए बताया कि भूविज्ञान और खनन विभाग ने 2025-26 के दौरान कुल ₹4,395.68 करोड़ का राजस्व अर्जित किया, जिसमें से ₹2,265 करोड़ अकेले खनिज युक्त भूमि कर से प्राप्त हुए। यदि संशोधन लागू होता है, तो यह महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत बाधित हो सकता है।

संघीय ढाँचे पर सवाल

वाइको ने इस बात पर जोर दिया कि यह विवाद केवल राजस्व हानि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राज्यों की संवैधानिक शक्तियाँ, वित्तीय स्वायत्तता और भारत की संघीय संरचना भी दाँव पर है। उन्होंने वित्त मंत्री मैरी विल्सन से आग्रह किया कि वे केंद्र पर तमिलनाडु के वित्तीय अधिकारों की रक्षा और उचित कानूनी कार्रवाई के लिए दबाव डालें।

सरकार की प्रतिक्रिया

वित्त मंत्री मैरी विल्सन ने वाइको को आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार इस मामले में उचित कदम उठाएगी। यह मुद्दा आने वाले दिनों में केंद्र-राज्य संबंधों की कसौटी बन सकता है, खासकर तब जब सर्वोच्च न्यायालय के 2024 के फैसले को इस संशोधन के ज़रिये प्रभावहीन करने का आरोप लग रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो राज्यों के पक्ष में था। केंद्र-राज्य राजकोषीय संघवाद पर यह टकराव नया नहीं है, लेकिन इस बार न्यायिक मिसाल को विधायी कदम से पलटने की कोशिश इसे अधिक संवेदनशील बनाती है। तमिलनाडु के लिए ₹2,265 करोड़ का सवाल है, लेकिन खनिज-समृद्ध राज्यों — झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ — के लिए यह मिसाल और भी बड़ी चुनौती बन सकती है। बिना व्यापक संसदीय बहस और राज्यों से परामर्श के पारित यह विधेयक सहकारी संघवाद की भावना पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खान और खनिज संशोधन विधेयक 2026 क्या है और इसमें धारा 9डी क्यों विवादास्पद है?
यह विधेयक खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम में संशोधन करता है और इसमें नई धारा 9डी जोड़ी गई है, जो राज्य सरकारों को खनिज अधिकारों तथा खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने से रोकती है। यह प्रावधान सर्वोच्च न्यायालय के 2024 के उस फैसले के विपरीत है जिसमें राज्यों को यह अधिकार दिया गया था।
तमिलनाडु को इस विधेयक से कितना राजस्व नुकसान हो सकता है?
2025-26 में तमिलनाडु के भूविज्ञान और खनन विभाग के कुल ₹4,395.68 करोड़ के राजस्व में से ₹2,265 करोड़ खनिज युक्त भूमि कर से आए। यदि धारा 9डी लागू होती है, तो यह पूरा हिस्सा जोखिम में पड़ सकता है।
सर्वोच्च न्यायालय ने खनिज कर पर राज्यों के अधिकार के बारे में क्या कहा था?
सर्वोच्च न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 2024 में फैसला सुनाया था कि राज्यों को खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने का संवैधानिक अधिकार है। इसी फैसले के आधार पर तमिलनाडु ने अपना खनिज युक्त भूमि कर अधिनियम, 2024 लागू किया और 4 अप्रैल, 2025 से कर वसूली शुरू की।
विपक्ष ने इस विधेयक को रोकने के लिए क्या प्रयास किए?
विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से मिलकर विधेयक को संसदीय स्थायी समिति के पास भेजने और राज्यों से परामर्श करने की माँग की। दुरई वाइको ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को धारा 9डी हटाने का संशोधन भी प्रस्तुत किया, लेकिन केंद्र ने इन आपत्तियों को नज़रअंदाज़ कर दोनों सदनों में विधेयक पारित करा लिया।
तमिलनाडु सरकार अब क्या कदम उठाएगी?
वित्त मंत्री मैरी विल्सन ने आश्वासन दिया है कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार राज्य के वित्तीय अधिकारों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाएगी। माना जा रहा है कि राज्य कानूनी चुनौती सहित अन्य विकल्पों पर विचार कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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