खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026 राज्यसभा में पारित, मानसून सत्र समाप्त
सारांश
मुख्य बातें
खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 13 अगस्त को राज्यसभा में पारित हो गया, जिसके साथ ही संसद के मानसून सत्र का भी औपचारिक समापन हो गया। केंद्रीय खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया, हालाँकि चर्चा और मतदान के दौरान विपक्षी सदस्यों ने जोरदार नारेबाजी की।
विधेयक की प्रमुख बातें
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने सदन में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में खनिज क्षेत्र से राज्यों को मिलने वाले राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि पहले राज्यों को खनिज राजस्व का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा मिलता था, जो अब बढ़कर 96 प्रतिशत हो गया है, जबकि केंद्र सरकार का हिस्सा घटकर केवल 4 प्रतिशत रह गया है। तेल क्षेत्र में भी राज्यों के राजस्व में काफी वृद्धि होने की बात उन्होंने कही।
सरकार का पक्ष
रेड्डी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्यों के हित की रक्षा करना मोदी सरकार की प्राथमिकता है और विपक्ष को इस पर संदेह करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार गरीबों, किसानों और जरूरतमंद वर्गों के लिए निरंतर काम कर रही है।
विधेयक के उद्देश्य पर बोलते हुए रेड्डी ने कहा, 'मेरा विश्वास है कि खनिज क्षेत्र के विकास से राज्यों का राजस्व बढ़ेगा और देश को इसका लाभ मिलेगा।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कराधान किसी भी क्षेत्र के विकास का अनिवार्य साधन है और संसद की सहमति के बिना खनन क्षेत्र का समग्र विकास संभव नहीं होगा।
सदन की कार्यवाही
राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सदस्यों को सूचित किया कि संसदीय कार्य मंत्री की ओर से अनुरोध प्राप्त हुआ था कि लोकसभा से पारित इस विधेयक को तत्काल विचार के लिए लिया जाए। इसके लिए मानसून सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल को स्थगित किया गया तथा पहले से सूचीबद्ध प्रश्नों के उत्तर सदन के पटल पर रखे हुए माने गए।
विपक्ष का रुख
विधेयक पेश होने के समय से ही विपक्षी दलों ने सदन में नारेबाजी कर अपना विरोध दर्ज कराया। हालाँकि विपक्ष ने अपनी आपत्तियों का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक रूप से नहीं रखा, विशेषज्ञों का मानना है कि खनन क्षेत्र में कराधान और राज्यों के अधिकारों को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
आगे की राह
दोनों सदनों से पारित होने के बाद यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। विधेयक के लागू होने के बाद खनिज क्षेत्र में राज्यों की राजस्व हिस्सेदारी और खनन गतिविधियों के विनियमन पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है।