13 अगस्त 2026
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खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026 राज्यसभा में पारित, मानसून सत्र समाप्त

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खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026 राज्यसभा में पारित, मानसून सत्र समाप्त

सारांश

खान और खनिज संशोधन विधेयक 2026 राज्यसभा में पारित हो गया — और इसी के साथ मानसून सत्र का पटाक्षेप हुआ। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी के अनुसार राज्यों की खनिज राजस्व हिस्सेदारी 50% से बढ़कर 96% हो गई है। विपक्ष की नारेबाजी के बीच पारित यह विधेयक खनन क्षेत्र के विनियमन को नया रूप देगा।

मुख्य बातें

खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 13 अगस्त को राज्यसभा में पारित हुआ।
केंद्रीय खान मंत्री जी.
किशन रेड्डी के अनुसार राज्यों की खनिज राजस्व हिस्सेदारी 50% से बढ़कर 96% हुई; केंद्र का हिस्सा केवल 4% ।
विधेयक पारित होते ही संसद के मानसून सत्र का औपचारिक समापन हो गया।
मानसून सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल स्थगित कर विधेयक को प्राथमिकता दी गई।
विपक्षी सदस्यों ने चर्चा और मतदान के दौरान जोरदार नारेबाजी कर विरोध दर्ज कराया।

खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 13 अगस्त को राज्यसभा में पारित हो गया, जिसके साथ ही संसद के मानसून सत्र का भी औपचारिक समापन हो गया। केंद्रीय खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया, हालाँकि चर्चा और मतदान के दौरान विपक्षी सदस्यों ने जोरदार नारेबाजी की।

विधेयक की प्रमुख बातें

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने सदन में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में खनिज क्षेत्र से राज्यों को मिलने वाले राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि पहले राज्यों को खनिज राजस्व का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा मिलता था, जो अब बढ़कर 96 प्रतिशत हो गया है, जबकि केंद्र सरकार का हिस्सा घटकर केवल 4 प्रतिशत रह गया है। तेल क्षेत्र में भी राज्यों के राजस्व में काफी वृद्धि होने की बात उन्होंने कही।

सरकार का पक्ष

रेड्डी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्यों के हित की रक्षा करना मोदी सरकार की प्राथमिकता है और विपक्ष को इस पर संदेह करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार गरीबों, किसानों और जरूरतमंद वर्गों के लिए निरंतर काम कर रही है।

विधेयक के उद्देश्य पर बोलते हुए रेड्डी ने कहा, 'मेरा विश्वास है कि खनिज क्षेत्र के विकास से राज्यों का राजस्व बढ़ेगा और देश को इसका लाभ मिलेगा।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कराधान किसी भी क्षेत्र के विकास का अनिवार्य साधन है और संसद की सहमति के बिना खनन क्षेत्र का समग्र विकास संभव नहीं होगा।

सदन की कार्यवाही

राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सदस्यों को सूचित किया कि संसदीय कार्य मंत्री की ओर से अनुरोध प्राप्त हुआ था कि लोकसभा से पारित इस विधेयक को तत्काल विचार के लिए लिया जाए। इसके लिए मानसून सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल को स्थगित किया गया तथा पहले से सूचीबद्ध प्रश्नों के उत्तर सदन के पटल पर रखे हुए माने गए।

विपक्ष का रुख

विधेयक पेश होने के समय से ही विपक्षी दलों ने सदन में नारेबाजी कर अपना विरोध दर्ज कराया। हालाँकि विपक्ष ने अपनी आपत्तियों का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक रूप से नहीं रखा, विशेषज्ञों का मानना है कि खनन क्षेत्र में कराधान और राज्यों के अधिकारों को लेकर मतभेद बने हुए हैं।

आगे की राह

दोनों सदनों से पारित होने के बाद यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। विधेयक के लागू होने के बाद खनिज क्षेत्र में राज्यों की राजस्व हिस्सेदारी और खनन गतिविधियों के विनियमन पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित करने के लिए विस्तृत आँकड़ों की आवश्यकता है — विशेषकर तब जब राज्यों और केंद्र के बीच खनन रॉयल्टी को लेकर विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। मानसून सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल स्थगित कर विधेयक पारित करने की जल्दबाजी संसदीय जाँच की गुंजाइश को सीमित करती है। विपक्ष की नारेबाजी महज शोर नहीं — खनन क्षेत्र में कराधान और राज्य स्वायत्तता के प्रश्न संवैधानिक हैं। असली कसौटी यह होगी कि विधेयक लागू होने के बाद राज्यों को वास्तव में कितना राजस्व मिलता है और खनन-प्रभावित समुदायों की स्थिति में क्या बदलाव आता है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खान और खनिज संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
यह खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम में संशोधन करने वाला विधेयक है, जो खनिज क्षेत्र के विनियमन और राज्यों की राजस्व हिस्सेदारी को पुनर्परिभाषित करता है। यह पहले लोकसभा में और फिर 13 अगस्त 2026 को राज्यसभा में पारित हुआ।
इस विधेयक से राज्यों को क्या फायदा होगा?
केंद्रीय खान मंत्री जी. किशन रेड्डी के अनुसार, विधेयक के लागू होने के बाद राज्यों को खनिज राजस्व का 96% हिस्सा मिलेगा, जबकि पहले यह करीब 50% था। केंद्र सरकार का हिस्सा घटकर केवल 4% रहेगा।
विधेयक पारित होने के दौरान विपक्ष ने विरोध क्यों किया?
विपक्षी सदस्यों ने विधेयक पेश होने और चर्चा के दौरान सदन में नारेबाजी की। विशेषज्ञों के अनुसार खनन कराधान और राज्यों के अधिकारों को लेकर मतभेद इस विरोध की मुख्य वजह रहे, हालाँकि विपक्ष ने अपनी आपत्तियों का विस्तृत सार्वजनिक बयान नहीं दिया।
मानसून सत्र में प्रश्नकाल क्यों स्थगित किया गया?
संसदीय कार्य मंत्री के अनुरोध पर राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने मानसून सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल स्थगित कर दिया, ताकि इस विधेयक पर तत्काल विचार किया जा सके। पहले से सूचीबद्ध प्रश्नों के उत्तर सदन के पटल पर रखे हुए माने गए।
विधेयक अब आगे क्या होगा?
दोनों सदनों से पारित होने के बाद विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून का रूप लेगा और खनिज क्षेत्र में नए नियम लागू होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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