12 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

खनन संशोधन विधेयक 2026 बिना बहस के लोकसभा में पास, हंगामे के चलते सदन दिनभर के लिए स्थगित

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
खनन संशोधन विधेयक 2026 बिना बहस के लोकसभा में पास, हंगामे के चलते सदन दिनभर के लिए स्थगित

सारांश

लोकसभा में 12 अगस्त को खनन संशोधन विधेयक बिना एक शब्द की बहस के पारित हो गया — विपक्ष वेल में था, सरकार ने मौका भुनाया। उसी दिन विदेशी अंशदान विधेयक JPC को भेजा गया। संसदीय कार्यवाही का यह दिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल छोड़ गया।

मुख्य बातें

खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में 12 अगस्त 2026 को बिना किसी चर्चा के पारित किया गया।
विधेयक पेश होने के दौरान विपक्षी सांसद सदन के वेल में विरोध प्रदर्शन करते रहे।
विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को JPC के पास भेजा गया — समिति में 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा सदस्य होंगे।
JPC की रिपोर्ट शीतकालीन सत्र 2026 के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक प्रस्तुत की जाएगी।
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सदन के 80% सदस्य नीट छात्र मुद्दे पर तुरंत चर्चा चाहते हैं।
हंगामा न थमने पर अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल ने सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी।

लोकसभा में 12 अगस्त 2026 को खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 बिना किसी चर्चा के पारित कर दिया गया। विधेयक पेश होने के दौरान विपक्षी सांसद सदन के वेल में डटे रहे और विरोध प्रदर्शन जारी रखा, जिसके कारण अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल ने अंततः कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी।

मुख्य घटनाक्रम

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही जगदंबिका पाल ने विपक्षी सांसदों से सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की, लेकिन हंगामा थमा नहीं। इसी अव्यवस्था के बीच खनन संशोधन विधेयक पारित कर दिया गया — बिना एक भी सांसद के बोले।

इससे पहले उसी दिन केंद्र सरकार का विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का प्रस्ताव भी विपक्ष के हंगामे के बीच स्वीकार किया गया। JPC में लोकसभा के 21 सांसद और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे, और समिति अपनी रिपोर्ट शीतकालीन सत्र 2026 के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक सदन में प्रस्तुत करेगी।

विपक्ष की माँग

विपक्षी दलों की प्रमुख माँग विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को पूरी तरह वापस लेने की थी। जगदंबिका पाल ने विपक्ष को याद दिलाया कि किसी विधेयक को JPC के पास भेजा जाना स्वयं में एक उपलब्धि है।

सरकार की प्रतिक्रिया

संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखे पत्र का हवाला देते हुए कहा, 'हम चर्चा शुरू करने के लिए तैयार हैं और सदन के 80 प्रतिशत सदस्य भी छात्रों के विरोध प्रदर्शन के मुद्दे पर तुरंत चर्चा चाहते हैं।' उन्होंने विपक्षी सांसदों से अपनी सीटों पर लौटकर सहयोग करने की अपील की।

अध्यक्षता कर रहे पाल ने भी कहा, 'मैं चर्चा शुरू करवा दूंगा, लेकिन आपसे अनुरोध है कि सदन का वेल खाली करें। सरकार और गृह मंत्री आपके सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं।' इसके बावजूद विपक्षी सांसदों ने विरोध जारी रखा।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब संसद के मानसून सत्र में पहले से ही कई महत्त्वपूर्ण विधेयकों पर बहस की माँग उठ रही है। बिना चर्चा के पारित खनन विधेयक खनिज क्षेत्र में नियामकीय बदलावों को प्रभावित करेगा, जिसका असर खनन उद्योग, राज्य सरकारों के राजस्व और संबंधित रोज़गार पर पड़ सकता है। आलोचकों का कहना है कि बिना संसदीय बहस के पारित विधेयक लोकतांत्रिक जवाबदेही को कमज़ोर करते हैं।

क्या होगा आगे

विदेशी अंशदान विधेयक पर JPC की रिपोर्ट शीतकालीन सत्र 2026 तक आने की उम्मीद है। खनन संशोधन विधेयक के क्रियान्वयन की रूपरेखा अब सरकार की अधिसूचना पर निर्भर करेगी। संसद में जारी गतिरोध के बीच विपक्ष का अगला कदम और सरकार की रणनीति पर नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन खनन विधेयक पर यही रास्ता क्यों नहीं अपनाया गया — इसका जवाब सरकार को देना होगा।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खान और खनिज संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
यह खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम में संशोधन करने वाला विधेयक है, जो खनिज क्षेत्र के नियमन और विकास से संबंधित प्रावधानों को अद्यतन करता है। इसे 12 अगस्त 2026 को लोकसभा में बिना किसी संसदीय चर्चा के पारित किया गया।
विधेयक बिना बहस के क्यों पारित हुआ?
विपक्षी सांसद विदेशी अंशदान विधेयक वापस लेने की माँग को लेकर सदन के वेल में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इसी हंगामे के बीच सरकार ने खनन संशोधन विधेयक पारित करा लिया और बाद में कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
विदेशी अंशदान विधेयक को JPC के पास क्यों भेजा गया?
विपक्ष इस विधेयक को पूरी तरह वापस लेने की माँग कर रहा था। सरकार ने इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का प्रस्ताव रखा, जिसे स्वीकार कर लिया गया। JPC में 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा सदस्य होंगे और रिपोर्ट शीतकालीन सत्र 2026 तक आएगी।
इस घटनाक्रम का आम नागरिकों पर क्या असर होगा?
खनन संशोधन विधेयक खनिज उद्योग, राज्य सरकारों के राजस्व और खनन से जुड़े रोज़गार को प्रभावित कर सकता है। बिना बहस के पारित होने से इसके प्रावधानों पर सार्वजनिक जाँच-परख का अवसर नहीं मिला, जिसे आलोचक लोकतांत्रिक प्रक्रिया की कमज़ोरी मानते हैं।
नीट छात्रों के मुद्दे पर संसद में चर्चा कब होगी?
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार और सदन के 80% सदस्य नीट छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर तुरंत चर्चा के लिए तैयार हैं। हालाँकि विपक्षी हंगामे के कारण 12 अगस्त को यह चर्चा नहीं हो सकी और सदन स्थगित कर दिया गया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 21 घंटे पहले
  2. 2 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 2 सप्ताह पहले
  8. 3 सप्ताह पहले